विरोध किया / श्रम कानून में बदलाव के फैसले पर नाराजगी बैंककर्मियों ने काला बिल्ला लगा किया विरोध

ग्रामीण बैंक की मुख्य शाखा में काला बिल्ला लगा विरोध जताते कर्मी ग्रामीण बैंक की मुख्य शाखा में काला बिल्ला लगा विरोध जताते कर्मी
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ग्रामीण बैंक की मुख्य शाखा में काला बिल्ला लगा विरोध जताते कर्मीग्रामीण बैंक की मुख्य शाखा में काला बिल्ला लगा विरोध जताते कर्मी

  • उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक कर्मियों ने फैसले को मजदूर हितों के खिलाफ बताया

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

मोतिहारी. कोरोना संकट काल में मध्यप्रदेश सहित कई राज्यों में श्रम कानून में बदलाव के लिए गए फैसले के विरोध में उत्तर बिहार ग्रामीण बैंक के कर्मियों ने काला बिल्ला लगाकर विरोध जाहिर किया। बैंक की 86 शाखाओं के सभी 150 कर्मी मजदूर विरोधी नीतियों के खिलाफ एकजुटता प्रदर्शित की। ऑल इंडिया ग्रामीण  बैंक ऑफिसर एसोसिएशन के महासचिव डीएन त्रिवेत्री ने कहा कि केंद्र सरकार के श्रम कानून संशोधन के लंबित प्रस्ताव के बीच मध्यप्रदेश, गुजरात समेत कई राज्यों ने कोरोना संकट के समय उद्योग जगत और आर्थिक गतिविधियों को बढ़ावा देने के बहाने  श्रम कानूनों में बदलाव करने का फैसला लिया है। राज्य सरकारों की ओर से बताया गया है कि श्रम कानूनों में बदलाव से घर लौट रहे प्रवासी मजदूरों को रोजगार मिल सकेगा। जबकि केंद्रीय श्रमिक संगठनों व बैंक यूनियनों ने राज्यों की ओर से उठाए गए इस कदमों को मजदूर हितों के खिलाफ करार दिया है। मौके पर चंद्रकिशोर महतो, प्रेम कुमार, चंदन मिश्रा, निक्की कुमारी, इंदूबाला, पूजन आदि थीं। 
डाककर्मियों ने काली पट्‌टी बांध किया काम
मोतिहारी |
सरकार के श्रम कानून के विरोध में शुक्रवार को नेशनल यूनियन ऑफ पोस्टल इंप्लाइज के बैनर तले डाक कर्मियों ने हाथ में काला पट्टी बांधकर काम किया। इस विरोध प्रदर्शन के बाद डाक कर्मियों ने डाक अधीक्षक को एक ज्ञापन सौंपा। जिसमें लॉकडाउन की आड़ में सरकार से कर्मचारी विरोधी निर्णय को वापस लेने की मांग की गई। इस दौरान नरेंद्र कुमार यादव, अजय कुमार दुबे, अजय कुमार सिंह, चुन्नू कुमार, विपिन पटेल, नंद प्रकाश पांडेय, अजय श्रीवास्तव, स्मिता गुप्ता, अमिताभ कुमार सिंह आदि शामिल थे।
विरोध की है वजह
औद्योगिक विवाद अधिनियम 1947 में संशोधन के बाद नवीन स्थापनाओं को एक हजार दिवस तक औद्योगिक विवाद अधिनियम में अनेक प्रावधानों से छूट मिल जाएगी। संस्थान अपनी सुविधानुसार श्रमिकों को सेवा में रख सकेगा। उद्योगों द्वारा की गई कार्रवाई के संबंध में श्रम विभाग एवं श्रम न्यायालय का हस्तक्षेप बंद हो जाएगा। वहीं मध्यप्रदेश औद्योगिक नियोजन(स्थायी आदेश)अधिनियम 1961 में संशोधन के बाद 100 श्रमिक तक नियोजित करने वाले कारखानों को अधिनियम के प्रावधानों से छूट मिल जाएगी।
मजदूरों को 8 के बजाए 12 घंटे करना पड़ेगा काम, यह गलत है
महासचिव ने बताया कि कोरोना संकट से उद्योग धंधे बंद होने की वजह से इन्हें रफ़्तार देने के लिए कई राज्य सरकारों ने श्रम कानूनों में बदलाव किए हैं। इससे मजदूरों को प्रति दिन या प्रति शिफ्ट 8 घंटे के बजाए 12 घंटे काम करना पड़ेगा।

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