वट सावित्री व्रत / सुहागिनों ने वट सावित्री पर की वट वृक्ष की पूजा, पति की लंबी आयु की कामना

वट वृक्ष के नीचे पूजा करती महिलाएं। वट वृक्ष के नीचे पूजा करती महिलाएं।
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वट वृक्ष के नीचे पूजा करती महिलाएं।वट वृक्ष के नीचे पूजा करती महिलाएं।

  • गांव से लेकर शहर तक में लॉकडाउन का गंभीरता से किया गया पालन
  • पेड़ में कच्चा सूत लपेटकर की परिक्रमा, कथा भी सुनीं

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

मोतिहारी. जिले में शुक्रवार को सुहागिन महिलाओं ने वट सावित्री व्रत श्रद्धा व उत्साह के साथ मनाया। सोलह शृंगार से सजी महिलाओं ने वट वृक्ष की पूजा-अर्चना की। इसके बाद प्रसाद चढ़ाया और पति की दीर्घायु का वरदान मांगा। शहर से लेकर गांव तक पर्व को लेकर महिलाओं में उत्साह चरमोत्कर्ष पर रहा। कोरोना संक्रमण के बढ़ते खतरे को देखते हुए लाए गए लॉकडाउन की वजह से पूजा को वट वृक्ष के समक्ष पहुंची महिलाओं ने सामाजिक दूरी बनाए रखी। वहीं कुछ ने घर के आसपास नवोदित वट वृक्ष या वट वृक्ष का पत्ते से भी पूजा की। महिलाओं ने सिंदूर, फूल, अक्षत, फल आदि सामग्रियों से सावित्री, सत्यवान व यमराज की पूजा की और फिर वट वृक्ष के जड़ को दूध व जल से सींचा। फिर कच्चे सूत को लपेटते हुए 108 बार परिक्रमा की और फिर यमराज से पति की लंबी आयु के लिए प्रार्थना की। इस क्रम में महिलाओं ने वट वृक्ष के नीचे बैठ सावित्री व सत्यवान की कथा भी सुनी। बताते चले कि गुरुवार को महिलाओं ने नहाय-खाय के साथ व्रत की शुरुआत की थी। शनिवार को पारण कर पर्व का समापन करेंगी। वेद विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार पांडेय ने बताया कि वट वृक्ष की पूजा करने से महिलाओं को अखंड सौभाग्य का आशीर्वाद मिलता है। 
वट सावित्री पूजा सुहागिनों के लिए है महत्वपूर्ण | सुहागिनों के वट सावित्री व्रत काफी महत्वपूर्ण है। मान्यता है कि व्रत करने से अखंड सौभाग्यवती रहने का आशीष प्राप्त होता है। वेद विद्यालय के प्राचार्य सुशील कुमार पांडेय बताते हैं कि सनातन धर्म में वृक्ष की पूजा को अहम माना गया है। वट वृक्ष में साक्षात महादेव विराजमान रहते हैं। 

चांदमारी स्थित दुर्गा मंदिर में वट सावित्री व्रत की कथा सुनती महिलाएं।
चांदमारी स्थित दुर्गा मंदिर में वट सावित्री व्रत की कथा सुनती महिलाएं।

सुबह से दोपहर तक चला पूजा-अर्चना का दौर
शहर से लेकर गांव तक सुबह से ही महिलाएं घर के आसपास वट वृक्ष के समक्ष पहुंचने लगी। यह सिलसिला दोपहर तक जारी रहा। पर्व को लेकर नवविवाहिताएं काफी उत्साहित दिखी। महिलाओं ने सुबह से दोपहर तक पूजा की। नवविवाहिता इसको लेकर काफी उत्साहित दिखीं। पर्व पर महिलाएं उपवास के साथ फलाहार का सेवन किया।

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