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स्मरण:भारत की स्वतंत्रता क्रांतिकारियों व अज्ञात समाज के विभिन्न वर्गों एवं समूहों के शौर्य वीरों की देन : कुलपति

मोतिहारी11 दिन पहले
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  • केविवि में शहीद मंगल पांडेय की याद में आजादी का अमृत महोत्सव पर वेब गोष्ठी आयोजित की

महात्मा गांधी केंद्रीय विश्वविद्यालय, जनसंपर्क प्रकोष्ठ एवं लोक कला एवं संस्कृति निष्पादन केंद्र के संयुक्त तत्वावधान में पंडित मदन मोहन मालवीय स्कूल ऑफ कामर्स एवं प्रबंध विज्ञान विभाग की ओर से वेब संगोष्ठी आयोजित की गयी। विश्वविद्यालय के कुलपति प्रो डॉ संजीव कुमार शर्मा और प्रति कुलपति प्रो जी गोपाल रेड्डी के संरक्षण और अध्यक्षता में आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत आयोजित वेब संगोष्ठी का विषय था- भारत का प्रथम स्वतंत्रता संग्राम। इसमें मुख्य रूप से शहीद मंगल पांडेय को याद किया गया।

बतौर मुख्य अतिथि प्रो. योगेन्द्र सिंह (पूर्व कुलपति जननायक चंद्रशेखर विश्वविद्यालय बलिया एवं विभागाध्यक्ष, इतिहास विभाग, महात्मागांधी काशी विद्यापीठ, वाराणसी) शामिल हुए। श्री सिंह ने कहा कि क्रांतिकारी भूमि बागी बलिया की बगावत की गाथा विश्व प्रसिद्ध है। इस धरती के शौर्यवीर और क्रान्तिकारी शहीद मंगल पांडे ने भारत के प्रथम स्वतंत्रता संग्राम के आंदोलन की लड़ाई लड़ी जो 1857 के विद्रोह एवं भारत की स्वतंत्रता का ऐतिहासिक विजय गाथा है। उन्होंने कहा कि भारतीय राष्ट्रवादी इतिहासकर लेखन प्रकाशन का अंग विनायक दामोदर वीर सावरकर ने अंग्रेजों के विद्रोह की गाथा 1909 में लिखी। इसमें उन्होंने कहा भारतीय स्वाधीनता संघर्ष एवं स्वराज के लिए लड़ा गया संघर्ष है जो भारतवासियों को राष्ट्र गौरव सीखने की प्रेरणा देता है। संगोष्ठी में आमंत्रित विशिष्ठ अतिथि एवं मुख्य वक्ता शतरुद्र प्रताप (सदस्य, निदेशक मंडल, नेहरू युवा केन्द्र संगठन) ने पुस्तकों के माध्यम से 1957 के गदर के ब्रिटिश हुकुमत के षड़यंत्र और सबूत को बताया। उन्होंने कहा कि सरदार भगत सिंह ने उस पुस्तक की प्रतियां क्रान्तिकारियों में बांटी, जिससे क्रान्तिकारियों को अंग्रेजों के षड़यंत्र का पता चला। उन्होंने इसाई मिशनरियों द्वारा धर्मांतरण का भी उल्लेख किया। बताया कि विक्टोरिया साम्राज्य में जो नौकरी करता था या विक्टोरिया साम्राज्य के पक्ष में बंदूक उठाता था तो उसपर जबरदस्ती नियम-कानून थोपकर इसाई मिशनरियों द्वारा धर्मांन्तरण कराया जाता था। कुलपति प्रो संजीव कुमार शर्मा ने कहा कि आधुनिक भारत के निर्माण में आजादी का अमृत महोत्सव के अंतर्गत 75 वर्षों की उपलब्धि महत्वपूर्ण है। क्योंकि भारत की स्वतंत्रता एवं वर्तमान भारत की पृष्ठभूमि उन्हीं स्वतंत्र्यवीर क्रान्तिकारियों और अनेक ज्ञात-अज्ञात समाज के विभिन्न वर्गों एवं समूहों के शौर्य वीरों की देन है। उन्होंने कहा कि यह स्वीकार करना चाहिए कि वर्तमान भारत का निर्माण केवल नेतृत्व एवं राजनीतिक विषेषज्ञों से ही नहीं, वरन उन क्रान्तिकारियों, शौर्य वीरों और इतिहासकारों का भी योगदान है, जिनकी गाथाएं गायी नहीं गई, जिन्होंने स्वतंत्र भारत की पृष्ठभूमि बनाई।

संगोष्ठी के संयोजक एवं संचालक पंडित मदन मोहन मालवीय स्कूल ऑफ कामर्स एवं प्रबंध विज्ञान के डीन प्रो पवनेश कुमार रहे। उन्होंने स्वतंत्र्यवीर मंगल पांडेय के पराक्रम एवं शौर्य की गाथा को विद्यार्थियों और शोधार्थियों को पढ़ने और जानने को आवश्यक बताया। सह संचालक डॉ अंजनी कुमार श्रीवास्तव के धन्यवाद ज्ञापन से कार्यक्रम का समापन हुआ। संगोष्ठी में प्रो सुधीर कुमार साहू, डॉ सपना सुगंधा, डॉ अलका ललहाल, डॉ स्वाति कुमारी, कमलेश कुमार, अरुण कुमार समेत 100 से ज्यादा विद्यार्थी, शोधार्थी शामिल हुए।

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