धर्म-आस्‍था:भगवान चित्रगुप्त की पूजा सांस्कृतिक कार्यक्रम होंगे

मोतिहारी25 दिन पहले
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चित्रगुप्त पूजा शनिवार को होगी। इसको लेकर समाज के लोगों ने तैयारी पूरी कर ली है। चांदमारी, बरियारपुर, ठाकुरवाड़ी आदि जगहों पर प्रतिमा स्थापित कर चित्रगुप्त भगवान की पूजा होगी। चांदमारी दुर्गा मंदिर परिसर में आयोजित पूजा की कड़ी में देर शाम भंडारा का भी आयोजन होगा। ठाकुरबाड़ी स्थित चित्रगुप्त मंदिर परिसर में भव्य पूजनोत्सव का आयोजन किया जा रहा है।

यहां सुबह दस बजे से पूजा शुरू होगी। शाम में सांस्कृतिक कार्यक्रम का भी आयोजन किया गया है। साथ ही भंडारा भी होगा। इसकी तैयारी में प्रो विनय वर्मा, रूमित रौशन, अनिल वर्मा, गुड्‌डू श्रीवास्तव, डॉ अतुल कुमार, कुमार विजय उर्फ टिंकुजी, ऋषभ रंजन, युगराज, अविनाश किशोर, अभिषेक राज, अमित कुमार, सोनल श्रीवास्तव, अतुल श्रीवास्तव, सोनू श्रीवास्तव, आरूणी सिन्हा आदि लगे हैं।

संरक्षक रूमित रौशन ने बताया कि ठाकुरबाड़ी में 1983 में मूर्ति की स्थापना की गई थी। तब से यहां प्रतिवर्ष भव्य पूजनोत्सव का आयोजन होता है। पौराणिक मान्यतानुसार, एक बार ब्रह्मा ने एकाग्रचित्त होकर समाधि लगायी और अंत में विश्रान्तचित्त हुए। ब्रह्मा के शरीर से बड़े बड़े भुजाओं वाले, श्यामवर्ण, कमलवत नेत्र वाले, शंख के तुल्य गर्दन, चक्रवत मुख, हाथ में कलम और दवात लिए एक पुरुष की उत्पत्ति ब्रह्मा के शरीर से हुई।

तब ब्रह्माजी ने अपने शरीर से उत्पन्न पुरुष को बोले कि तुम मेरे काया से उत्पन्न हुए हो, इसलिए तुम्हारी कायस्थ संज्ञा होगी और पृथ्वी पर चित्रगुप्त के नाम से विख्यात होगे। धर्मराज की यमपुरी में धर्माधर्म के विचार व लेखा-जोखा के लिए उन्हें अधिकृत किया।

सुशील पांडेय ने बताया कि भगवान चित्रगुप्त की पूजा से मनुष्य समस्त पापों एवं रोगों से मुक्त होकर दीर्घायुष्य को प्राप्त करता है। मधुबन में कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की द्वितीया तिथि को जहां भाई दूज का पर्व मनाया जाता है, वहीं दूसरी ओर चित्रगुप्त पूजा भी की जाती है। कलम-दवात के देवता भगवान चित्रगुप्त की पूजा को लेकर कायस्थ परिवार के लोगों ने सारी तैयारियां पूरी कर ली है।

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