आस्था:आज पारण के साथ समाप्त होगा व्रतियों का निर्जला व्रत

मोतिहारी2 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
मधुछपरा में जिउतिया व्रत पर पूजा करती व्रती। - Dainik Bhaskar
मधुछपरा में जिउतिया व्रत पर पूजा करती व्रती।
  • शहर से लेकर गांव तक व्रतियों ने पुत्र की दीर्घायु और कुशलता की कामना की

जिले में बुधवार को जिउतीया व्रत पर व्रतियों ने पुत्र की दीर्घायु एवं कुशलता की कामना की। व्रती का निर्जला उपवास गुरुवार की अलस्सुबह व्रत के पारण के साथ समाप्त होगा। शहर से लेकर गांव तक महिलाओं ने जिउतीया व्रत रखी और पुत्र की दीर्घायु की कामना की। इस कड़ी में व्रतियों ने कुश का जिमुतवाहन बनाया व चिल्ह एवं सियारिन का भी आह्वान करने के बाद विधि विधान पूर्वक पूजा-अर्चना की। इस बीच व्रतियों ने कथा श्रवण भी किया। बताया जाता है कि निर्णयसिन्धु के अनुसार आश्विन कृष्णपक्ष में जिस दिन चन्द्रोदय काल में अष्टमी प्राप्त हो, उस दिन लक्ष्मी व्रत एवं जिस दिन सूर्योदय में अष्टमी प्राप्त हो उस दिन जीवत्पुत्रिका (जीउतिया) व्रत करना चाहिए। इधर, मंगलवार को नहाय-खाय पर व्रतियों ने भोजन के रूप में मड़ुआ की रोटी व नोनी का साग ग्रहण किया। वहीं सुबह में दही- चूड़ा चढ़ाने व सरगही खाने की प्रक्रिया भी पूरी की। बताया जाता है कि जीवित्पुत्रिका व्रत संतान प्राप्ति और उसकी लंबी आयु की कामना के साथ किया जाता है।

श्रीकृष्ण संतान की रक्षा करते हैं

धार्मिक मान्यता के अनुसार, व्रत करने से संतान के सभी कष्ट दूर हो जाते हैं। पौराणिक कथाओं के अनुसार, महाभारत काल में भगवान श्रीकृष्ण ने अपने पुण्य कर्मों को अर्जित करके उत्तरा के गर्भ में पल रहे शिशु को जीवनदान दिया था, इसलिए यह व्रत संतान की रक्षा की कामना के लिए किया जाता है। मान्यता है कि इस व्रत के फलस्वरुप भगवान श्रीकृष्ण संतान की रक्षा करते हैं।

खबरें और भी हैं...