मैत्री पुल पर की गई स्क्रीनिंग / नेपाल के 69 मजदूरों को सीमा पर पहुंचने के बाद नियंत्रण में लिया, सभी को क्वारेंटाइन सेंटर भेजा

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  • तीन भारतीय मजदूर भी हैं शामिल, स्वच्छ रक्सौल संस्था की ओर से सभी को कराया गया भोजन

दैनिक भास्कर

May 23, 2020, 05:00 AM IST

मोतिहारी. गुरुवार के देर रात भारत के विभिन्न स्थानों में काम करनेवाले नेपाल के 72 कामगारों समेत भारत के तीन कामगार को सीमा पर पहुंचने से दोनों देश के अधिकारी पोशेपेश में पड़ गए। शहर के मुख्य नाका मैत्रीपुल पर पहुंचे इन नेपाली नागरिकों की स्क्रीनिग करवाकर नाका पर तैनात एसएसबी के जवान मजिस्ट्रेट और पुलिस अधिकारी स्टेशन परिसर पर लाकर शुक्रवार को दोपहर तक अपने नियंत्रण में रखा। इनमें नेपाल के बारा जिला के 63 रामेछाप जिला के 6 और बिहार पूर्वी चंपारण रक्सौल के तीन नागरिक शामिल है। स्थानीय लोगों ने इन लोगों को नास्ता  कराया और स्वच्छ रक्सौल के अध्यक्ष रणजीत सिंह ने इन लोगों को खाना खिलाया। नेपाली मजदूरों में शामील नेपाल के बारा जिला के करैया माई गांव पालिका निवासी कृष्णा चौधरी, ओमप्रकाश चौधरी, नीरज चौधरी, धीरज चौधरी, उपेन्द्र चौधरी, अमित चौधरी, चन्दन चौधरी, ध्रुव चौधरी, अंत चौधरी, श्याम  चौधुर,  सफिक आलम, देवन अजय, चौधरी लालबाबू चौधरी, उपेन्द्र चौधरी, संतोष चौधरी, बारा जिला के मधुबन निवासी  रूप चौधरी, हरैया निवासी ओमप्रकाश चौधरी सहित बारा जिला सभी 63 लोगों ने बताया कि वह गुजरात के सूरत में कपड़ा फैक्ट्री में काम करते थे। वहां लॉकडाउन के बाद उद्योग बंद हो गया। जिसके बाद वह बेरोजगार हो गए। उद्योग द्वारा जितना दिन काम किया था केवल वही पैसा दिया गया।
वतन लौटने के अलावा कोई विकल्प नहीं था
 उसके अतिरिक्त कोई सहयोग नही मिलने पर सभी के पास अपने वतन लौटने के अतिरिक्त कोई विकल्प नहीं था। नतीजतन जो पैसा बचा था उसी से वह एक बस भाड़ा कर रक्सौल आ गए। वहांं से सभी लोग मैत्रीपुल के रास्ते नेपाल जाना चाह रहे थे। मगर वहांं तैनात सुरक्षाकर्मी हमें रोक लिया। अधिकारियों ने कहा कि वीरगंज के डीएम से बात करो वो तुम लोगों को सहयोग करेंगे और परमिशन देंगे तो जाने दिया जाएगा। नेपाल के रामेछाप निवासी 6 नेपाली नागरिकों ने बताया की हमलोग मध्य प्रदेश के होटल में काम करते थे। लॉकडाउन के वजह से होटल बंद होने के कारण हमलोग अपने घर के लिए बस से आए।  जबकि रक्सौल अनुमंडल के भेलाही गाद गम्हरिया गांंव निवासी फिरोज अंसारी सलाउद्दीन अंसारी और मंजूर अंसारी ने बताया कि हमलोग दिल्ली के किशनगढ़ गांंव में टेलरिंग का काम करते थे। ईद पर्व पर श्रमिक स्पेशल ट्रेन से मुजफ्फरपुर पहुंचे और वहा से सरकारी बस से रक्सौल आये है। हम लोगों की जांच भी हो चुकी है।
रेड जाने वाले शहरों से आने वाले लोग रहेंगे क्वारेंटाइन सेंटर में
रामगढ़वा| 
जिला में देश के विभिन्न हिस्से से आए रेड जाेन वाले शहरों से आने वाले लोगों के लिए ही सरकारी क्वारेंटाइन सेंटर में रहने की व्यवस्था होगी। इसके लिए बिहार सरकार के मुख्य सचिव ने निर्देश जारी किया है। रेड स्पॉट में देश के मुंबई, पुणे, दिल्ली समेत एनसीआर, अहमदाबाद ,सूरत और बेंगलुरु शहरों को रखा गया है। इन्हीं शहरों से आने वाले प्रवासी श्रमिकों को क्वारेंटाइन कैंप में स्थानीय प्रशासन रखेगा। अन्य शहरों से वापस लौट रहे लोगों के लिए होम क्वारेंटाइन की व्यवस्था होगी। इस बात की जानकारी देते हुए कोरोना के नोडल पदाधिकारी डॉ. प्रहस्त कुमार ने बताया कि बिहार सरकार के मुख्य सचिव के द्वारा जारी निर्देश के अनुसार शुक्रवार से इन चिन्हित रेड स्पॉट शहरों से लौटे वैसे श्रमिक जो केवल श्रमिक स्पेशल ट्रेन से वापस घर लौटे रहे हैं, उनको सरकारी क्वारेंटाइन कैंप में रखा जाएगा। इसके अतिरिक्त इस कैम्प में उनको भी रखा जाएगा जो बस या ट्रक या अन्य साधन से वापस लौटे हैं और उनके पास उपरोक्त आठ शहरों में से किसी भी शहर से आने का टिकट होगा। नए जारी गाइडलाइन के बाद शुक्रवार से उपरोक्त आठ शहरों से आने वाले लोगो के अलावे अन्य जगहों से आने वालों के लिए कोई नया कैंप नहीं बनेगा। रेड स्पॉट शहर से घर वापस आने वाले लोगों का निबंधन प्रखंड कार्यालय में किया जाएगा और इसके बाद उनको क्वारेंटाइन कैंप में शिफ्ट किया जाएगा। अन्य शहरों से आये लोगों का भी निबंधन होगा और उनको भोजन देकर अधिकारी होम क्वारेंटाइन के लिए उनको घर भेज देंगे। यह नया नियम शुक्रवार से घर वापस लौट रहे प्रवासियों के लिए है। गुरुवार तक किसी भी शहर से घर वापस लौट रहे क्वारेंटाइन कैम्प में भर्ती श्रमिक को 14 दिन पूरा होने तक उनको क्वारेंटाइन कैंप में ही रहना होगा।

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