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नाला नहीं, खजाना हुआ साफ:पानी निकासी को बने 8 में 7 आउटलेट जाम, यानी इस बार भी शहर डूबना तय

मुजफ्फरपुर8 दिन पहलेलेखक: शिशिर कुमार/गुलशाद
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इस तरह घर बना लिए जाने व कचरे-जलकुंभी के कारण कमरा मोहल्ला स्लुइस गेट के पास जाम है नाला। - Dainik Bhaskar
इस तरह घर बना लिए जाने व कचरे-जलकुंभी के कारण कमरा मोहल्ला स्लुइस गेट के पास जाम है नाला।

बरसात से पहले शहर के नालों की सफाई के नाम पर एक बार फिर सरकारी खजाने की सफाई शुरू हाे गई है। हर वर्ष पानी निकासी के नाम पर नालाें के स्लैब ताेड़ने व कच्चा नाला बनाने के नाम पर लाखाें-कराेड़ाें रुपए खर्च हाे जाते हैं। लेकिन, बारिश हाेने पर पूरा शहर जलमग्न हाे जाता है। दरअसल, पानी निकासी के लिए बने 8 में से 7 आउटलेट अब भी नाकाम हैं। मानसून सिर पर है लेकिन इनमें से कई आउटलेट से निकासी बंद है, ताे कुछ से अत्यंत धीमी गति से पानी िनकलता है। ये नाले कहीं गाद, जलकुंभी व प्लास्टिक कचरे से पटे हैं तो कहीं लोगों ने अतिक्रमण कर इन्हें अपने कैंपस में कर लिया है।

नगर निगम शहर में ही नालों के पानी काे इधर-उधर घुमाकर निकासी में जुटा रहता है। ऐसे में इस बरसात भी शहर का डूबना तय है। हाल में यास चक्रवात के दाैरान व अन्य दिन की छिटपुट बारिश में मिठनपुरा, बीबीगंज, माेतीझील समेत शहर के कई इलाकाें के लाेग इसे झेल चुके हैं। यूं तो बरसात में शहर के 49 में से तकरीबन 40 वार्डाें के मोहल्लाें में और सड़काें पर जलजमाव होगा ही; ब्रह्मपुरा, बीबीगंज, मिठनपुरा, बेला बियाडा इलाके के लाेगाें काे पिछले वर्ष की तरह इस बार भी दुर्दशा झेलनी पड़ सकती है। इन इलाकाें से पानी निकलना मुश्किल होगा।

क्योंकि, बेला-मिठनपुरा इलाके से जिस बेला औद्योगिक क्षेत्र के मन से पानी निकलता है वह पूरी तरह भर चुका है। आधे मन में प्लॉटिंग कर घर बनाए जाने से दीघरा नहर के आउटलेट तक पानी पहुंचना बंद हो चुका है। इसी तरह दामोदरपुर में फरदो नहर तक नाला निर्माण अधूरा होने व सर गणेशदत्त नगर से फरदो नहर तक जगह–जगह अवरोध होने से ब्रह्मपुरा, बीबीगंज के 10 वार्डों में जलजमाव होना तय है।

कुछ फीट बनकर रुका है ब्रह्मपुरा में नाला

इस इलाके के 2,3,5,6 वार्डाें का पानी संजय सिनेमा रोड से दामोदरपुर होते हुए फरदो नहर तक जाता है। बरसात में दामोदरपुर में विवाद हाेने से यहां फरदो नहर तक नाला कुछ फीट बन कर रुका है।

साइफन जाम, मिठनपुरा से कैसे निकलेगा पानी

नारायणपुर स्टेशन से आगे बेला मन व दीघरा नहर के नीचे साइफन से पानी खेताें में जाता था। मन में घर बन जाने से पानी निकासी बंद है। ऐसे में मिठनपुरा, बेला, बियाडा औद्योगिक क्षेत्र का डूबना तय है।

माेतीझील से फरदो तक गाद से नाला जाम

माेतीझील से छाता चौक, खबड़ा हाेकर फरदो नहर तक नाला गाद से भरा है। पांडेय गली के पास रेल ट्रैक के पास पानी का बहाव काफी कम है। इस वजह से मोतीझील-कल्याणी में जलजमाव हो जा रहा है।

कमरा मोहल्ले में स्लुइस गेट के आगे बाधा

गरीबनाथ मंदिर समेत कई इलाकों का पानी चार स्लुइस गेट से नदी में जाता है। सिकंदरपुर मन लबालब है। यहां के 4 शंप हाउस में एक भी चालू नहीं है। कमरा मोहल्ला स्लुइस गेट से नदी तक नाले पर घर बन जाने से निकासी नहीं हाे पाती है।

सिकंदरपुर स्लुइस गेट से बहाव काफी कम

सिकंदरपुर स्लुइस गेट फिलहाल तो खुला है। लेकिन, इस गेट से पहले सिकंदरपुर क्षेत्र में अंडरग्राउंड नाले की सफाई नहीं कराए जाने के कारण यहां पानी का बहाव काफी कम है। बरसात में हर साल इस जगह पर पंप लगा कर पानी निकालना पड़ता है।

आरएस कॉलेज स्लुइस गेट पर भी परेशानी तय

ब्रह्मपुरा मन से पानी अभी आरएस कॉलेज स्लुइस गेट से होकर बूढ़ी गंडक नदी में गिर रहा है। लेकिन 15 जून के बाद इसे बंद कर दिया जाता है। मन में पानी भर जाने पर यहां भी समस्या होनी तय है।

नगर आयुक्त से सीधी बात : कैसे निकलेगा निदान?

Q. इस बरसात भी जलजमाव से शहर को निजात मिलेगी या फिर शहर डूबेगा?
A. इस साल अप्रैल से ही नालों की उड़ाही कराई जा रही है। शहर के अधिकतर नाले साफ हो चुके हैं। विश्वास है, पिछले साल जैसी स्थिति नहीं होगी।
Q. अंदरूनी नाले साफ भी हो जाएं तो क्या, 7 आउटलेट नाले तो बंद हैं?
A. जानकारी में है कि बीबीगंज-भगवानपुर में 6 जगह अतिक्रमण है। राहुल नगर-ब्रह्मपुरा और बियाडा इलाके के बाहर आउटलेट नाले बंद कर दिए गए हैं। पर, ये सभी इलाके नगर निगम क्षेत्र के बाहर हैं। डीएम साहब से बात हुई है। उनके नेतृत्व में शीघ्र बैठक होगी। एसडीओ पूर्वी के साथ टीम गठित कर सभी आउटलेट चालू कराएंगे। दामोदरपुर में फरदो तक कच्चा नाला बन सकता है। कमरा मोहल्ला स्लुइस गेट से पहले बालूघाट में नाला से अतिक्रमण हटाया जा रहा है। कच्ची पक्की से रामदयालु होकर मधौल तक नया आउटलेट नाला बन रहा है जिसका प्रभाव दिखेगा।
Q. बूढ़ी गंडक नदी के सभी 4 स्लुइस गेट हर साल 16 जून से बंद कर दिए जाते, तब पानी कैसे निकालेंगे?
A. स्लुइस गेट तब तक खोले रखा जाएगा जब तक नदी में पानी नहीं भर जाएगा। जब स्लुइस गेट बंद करने की नौबत आएगी तब हेवी पंपसेट लगाकर पानी की निकासी कराई जाएगी। जून के अंत तक 14 नए हेवी पंपसेट खरीदे जाएंगे। पहले से 6 पंपसेट चालू हालत में हैं।

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