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  • 8 Issues Of Corruption And Incompetence In The No confidence Motion, No One Has Any Objection To Raising Their Voice On Them

मेयर की कुर्सी का खेल:अविश्वास प्रस्ताव में भ्रष्टाचार और अक्षमता के 8 मुद्दे, इन पर आवाज बुलंद करने पर किसी काे आपत्ति नहीं

मुजफ्फरपुर2 महीने पहलेलेखक: गुलशाद
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  • मामला भ्रष्टाचार का या सियासी हिस्सेदारी का! स्वार्थ के हिसाब से सुर बदल रहे पार्षद
  • उठ रहे सवाल, आराेपाें के बाद भी कैसे चुना मेयर, पार्षद कितने पाक-साफ

नगर निगम की सियासत में फिर भ्रष्टाचार का मुद्दा गर्म है। सियासत के केंद्र में भी पुराने माेहरे हैं। खेल भी मेयर की कुर्सी का है। जब से मुजफ्फरपुर काे स्मार्ट सिटी का दर्जा मिला और संसाधन भी बढ़ने लगे, तभी से एक-दूसरे से प्रतिनिधि भिड़ने लगे। इस सियासी शह-मात के खेल में सबकी अपनी जरूरतें हैं।

अपना स्वार्थ भी। ऐसे में वार्ड पार्षदों के सुर बदलते रहना काेई नया नहीं है। लेकिन, जाे पार्षद कल तक भ्रष्टाचार पर चुप थे और पहले आरोपित मेयर सुरेश कुमार के साथ थे, अब उनके सुर भी बगावती हैं। नए सिरे से मेयर के खिलाफ लाए अविश्वास प्रस्ताव के 8 कारणों में ऑटाे टिपर और डस्टबिन खरीद घोटाले भी हैं।

अविश्वास प्रस्ताव पर दस्तखत करने वाले अधिकतर पार्षदों 2019 में दूसरी बार मेयर बनाने काे सुरेश कुमार काे वाेट दिया था। मेयर द्वारा मनोनीत हाेकर निगम में कैबिनेट की हैसियत रखने वाले सशक्त स्थाई समिति के सदस्य वार्ड पार्षद हाेते हैं। निगम में काेई भी निर्णय सशक्त स्थाई समिति के माध्यम से ही हाेते हैं।

मेयर के कैबिनेट में शामिल पार्षद अर्चना पंडित, रेशमी आरा और पवन राम ने अविश्वास प्रस्ताव पर हस्ताक्षर किया है। सभी पहले मेयर के निर्णय पर साथ थे। हालांकि, वार्ड-28 के राजीव कुमार पंकू समेत डिप्टी मेयर खेमा के अधिकतर पार्षद शुरू से ही सुरेश कुमार के विरोधी रहे हैं। ये इस बार भी अविश्वास प्रस्ताव में अग्रणी भूमिका में हैं।

अविश्वास प्रस्ताव के इन 8 अाराेपाें पर पार्षद कितने पाक साफ

1 डस्टबिन खरीद घाेटाला
2 ऑटाे टिपर खरीद घाेटाला
​​​​​​​3हर माह स्थाई समिति की दाे और बाेर्ड की एक बैठक नहीं करना
4 मेयर की विफलता से स्वच्छता रैंकिंग में मुजफ्फरपुर सबसे नीचे
5 शहरवासियों काे प्रधानमंत्री आवास योजना का लाभ देने में फिसड्डी
6 नाली-गली योजना का काम नहीं हाेने से मुजफ्फरपुर 31वें स्थान पर
7 नगर आयुक्त से छाेटी-छाेटी बाताें पर तकरार से विकास में बाधा डाला
8 नल जल योजना काे धरातल पर उतारने में अक्षम

बोले : राकेश सिन्हा पप्पू, विधायक से गद्दारी हुई, हमने मेयर का छाेड़ा साथ
सुरेश कुमार काे मेयर बनाने में दाे बार बड़ी भूमिका में दिखने वाले राकेश सिन्हा पप्पू अब अविश्वास प्रस्ताव के मुद्दे पर सबसे अधिक मुखर हैं। उन्होंने बताया कि विधायक से गद्दारी के कारण सुरेश कुमार काे मेयर पद से हटाना जरूरी है। आगे वह वार्ड पार्षद भी नहीं बन पाएंगे। हालांकि, विधायक से मेयर ने क्या गद्दारी की इस पर उन्होंने कुछ नहीं कहा।

बोले : केपी पप्पू,विधायक खेमे से अलग हाेने के कारण दे रहा हूं साथ
शुरू से ही मेयर के खिलाफ रहे वार्ड-21 पार्षद केपी पप्पू इस बार अविश्वास प्रस्ताव में सुरेश कुमार के साथ खड़े हैं। उन्होंने कहा कि यह विदित है कि विधायक खेमा मेयर काे अपने गिरफ्त में रखता रहा है। सुरेश कुमार जब तक विधायक खेमे से जुड़े रहे, उनका विरोध करता रहा। अब वह विधायक खेमा से अलग हाे गए, ताे मैं उनका साथ दे रहा हूं।

इधर, अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ हाईकोर्ट जाने की तैयारी में मेयर खेमा, विपक्ष ने कहा-नियमानुकूल है
मेयर सुरेश कुमार खेमा 25 वार्ड पार्षदों द्वारा लाए अविश्वास प्रस्ताव के खिलाफ दुर्गापूजा बाद हाईकोर्ट जाने की तैयारी में है। मेयर समर्थक पार्षदों का कहना है कि एक साल में दाे बार अविश्वास प्रस्ताव नहीं लाया जा सकता। यहां ताे ढाई माह में दूसरी बार नोटिस दिया गया है। पार्षद संजय केजरीवाल के अनुसार प्रस्ताव की अगुआई करने वाले पार्षद राकेश सिन्हा पप्पू नगर विधायक विजेंद्र चौधरी के सबसे करीबी हैं। फिर भी नगर विधायक का अविश्वास प्रस्ताव से कोई मतलब नहीं हाेना पच नहीं रहा। यह केवल उनका राजनीतिक बयान है। डिप्टीमेयर खेमा का तर्क है कि पहले के अविश्वास प्रस्ताव की प्रक्रिया रद्द होने से मेयर की कुर्सी कायम रही। ऐसे में अविश्वास लाना नियमानुकूल है।

74 लाख रुपए का है डस्टबिन घोटाला
नगर निगम में 210 रुपए प्रति डस्टबिन की दर से वर्ष 2017 में 75 हजार डस्टबिन की खरीदारी की गई थी। इससे कम दर पर डस्टबिन देने काे तैयार एजेंसी काे ऑर्डर नहीं मिला। ऑडिट में महालेखाकार की टीम ने 74 लाख रुपए का घोटाला बताया। एजेंसी को इसका भुगतान मेयर की अनुशंसा पर किया गया था।

2.83 कराेड़ का है ऑटाे टिपर घोटाला
नगर निगम में 2.83 कराेड़ रुपए का ऑटाे टिपर घोटाला भी हो चुका है। मामले में मेयर सुरेश कुमार समेत 10 लाेगाें के खिलाफ निगरानी चार्जशीट दायर कर चुका है। जांच में इनकी संलिप्तता काे निगरानी विभाग ने स्पष्ट कर दिया है। अब काेर्ट में मामले की सुनवाई हाे रही है।

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