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विनाशलीला:मुजफ्फरपुर-पूसा मार्ग का 80 फीसदी हिस्सा बाढ़ में विलीन, अब भी कटाव की गति कम नहीं

मुजफ्फरपुर2 महीने पहले
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शहर के शेखपुर ढाब मंे बाढ़ ने सब कुछ छीन लिया। दर-दर की ठोकर खाने को बाढ़ पीड़ित मजबूर हैं। अब तो केवल नाव ही इनका एकमात्र सहारा है।
  • बाढ़ के पानी ने थामी जिंदगी की रफ्तार, सड़क की भी बिगाड़ी सूरत

सकरा, मुरौल एवं मुशहरी के नए इलाकों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर गया
दर्जनों सड़काें पर दो से तीन फीट बह रहा पानी बचाने में जुटा प्रशासन

तिरहुत नहर का बांध टूटने के बाद सकरा व मुरौल के कई गांव जलमग्न है। अब पानी पिलखी स्थित मुजफ्फरपुर-पूसा मार्ग को भी ध्वस्त कर रहा है।
तिरहुत नहर का बांध टूटने के बाद सकरा व मुरौल के कई गांव जलमग्न है। अब पानी पिलखी स्थित मुजफ्फरपुर-पूसा मार्ग को भी ध्वस्त कर रहा है।

बूढ़ी गंडक नदी में अप्रत्याशित पानी आने के बाद महमदपुर कोठी तीन जगहाें पर बांध टूट गया। दो जगह पिलखी तरफ व एक जगह मुशहरी की ओर। फिलहाल टूटे बांध से तेज पानी की धारा बह रही है। सकरा, मुरौल एवं मुशहरी के नए इलाकों में पानी प्रवेश कर गया। वहीं महमदपुर कोठी स्थित मुजफ्फरपुर-पूसा मुख्य मार्ग पर तेजी से कटाव हो रहा है। लगभग रोड का 80 फीसदी हिस्सा पानी में बह गया है। हालांकि रोड को बचाने के लिए जलसंसाधन विभाग की टीम अथक प्रयास कर रही है, लेकिन पानी की ठोकर से सड़क का बचना मुश्किल लग रहा है। दूसरी ओर महमदपुर कोठी चौक, पिलखी अस्पताल, कोठी-तीतरा रोड, पिलखी सकरा रोड, सीहो दरधा रोड समेत कई दर्जन सड़काें पर दो से तीन फीट पानी बह रहा है।

प्रशासन की मदद नाकाफी, बाढ़ पीड़ितों का बुरा हाल, खाना तो दूर, पीने के पानी पर भी है आफत

मुरौल एवं सकरा में बूढ़ी गंडक की पानी की तबाही से हजारों लोग बेघर हो गए हैं। उनके दर्द आंसू बनकर छलक रहे हैं। बूढ़ी गंडक पर शरण लिए पिलखी गांव के बहादुर साहनी, शिवदयाल पासवान, किरण देवी, राजू पासवान, संजय कुमार, रीतलाल पासवान, आदि ने कहा कि खाना तो दूर की बात है, पानी पीने तक की आफत है। जनरेटर उपलब्ध है, पर तेल के लिए पैसे नहीं है। जिससे हम लोग रात भर सांपों के भय से जग कर रात गुजारने को मजबूर हैं। इधर रूपन पट्टी मथुरापुर पंचायत से सैकड़ों विस्थापित लोग गंडक कर्मशाला के प्रांगण में आश्रय लिए हुए हैं।

जीरा साह, सुरेंद्र राम, मीना देवी, सविता देवी आदि ने कहा कि यहां पर चारों तरफ जंगल ही जंगल है। अंधेरे में सांप के भय से जग कर रात बिताते हैं। पानी के लिए एक 1 किमी दूर भटकना पड़ता है। इधर, रामपुर कृष्ण पंचायत स्थित हरपुर गांव में बूढी गंडक नदी का पानी घुस गया। पंचायत के अधिकांश लोग स्कूल में शरण लिए हुए हैं। गांव में महिंदर महतो, सुनील राम, जुगल राम, नीरज कुमार, शिवचंद्र राम, बिजय ठाकुर समेत कई अन्य लोग सुरक्षित स्थानों पर रह रहे हैं। लोगों ने बताया कि सकरा सीओ ने इधर एक बार भी देखने नहीं आए।

नए क्षेत्र में फिर टूटा कदाने नदी का बांध

बूढ़ी गंडक के जल के भारी दबाव के कारण सकरा के नए क्षेत्र में मंगलवार दोपहर फिर कदाने नदी का बांध टूट गया । जिससे गन्नीपुर बेझा पंचायत एवं सिराजाबाद पंचायत के आधा दर्जन से अधिक गांव में पानी तेजी से फैलने लगा। मंगलवार को पानी की अत्यधिक दबाव के कारण जहांगीरपुर-सबहा मार्ग के ब्लॉक गेट के समीप सड़क पर पानी चढ़ गया। सबहा से बाजी तक गंडक की पानी तेजी से सड़क पार करके कदाने नदी में जाने लगा। पहले से लबालब कदाने नदी में बूढ़ी गंडक के पानी के चले जाने से नदी में अधिक दबाव बन गया, जिससे गन्निपुर बेझा-मेहसी सीमान सोन घाट से दक्षिण 15 फीट में बांध टूट गया। यहां सोमवार सुबह से ही करीब 100 फीट में नदी से पानी ओवर फ्लो हो रहा था। स्थानीय युवा नेता श्रीकांत कुमार ने बताया कि पूर्व मुखिया जय सहनी बांध के कटाव रोकने के लिए बोरी में मिट्टी डलवाकर बांध पर रखवाते रहे तथा मुखिया पति राम नंदन मेहता, अशोक शर्मा, दिनेश राय आदि ने रात भर बांध की निगरानी करते रहे।

मुजफ्फरपुर के मुराैल प्रखंड के पिलखी में बाढ़ से तबाही के बाद बकरियाें काे नाव पर लाद कर सुरक्षित स्थान पर ले जाते पशुपालक।
मुजफ्फरपुर के मुराैल प्रखंड के पिलखी में बाढ़ से तबाही के बाद बकरियाें काे नाव पर लाद कर सुरक्षित स्थान पर ले जाते पशुपालक।

227 पंचायत के 13.84 लाख आबादी बाढ़ प्रभावित

जिले में बाढ़ की स्थिति लगातार भयावह होती जा रही है। मंगलवार को जिले से गुजरने वाली गंडक और बूढ़ी गंडक नदियों के जलस्तर में कमी आने के बाद भी बाढ़ के पानी का फैलना जारी रहा। तिरहुत नहर के टूटे तटबंध से जिले के सकरा और मुरौल प्रखंड में बूढ़ी गंडक नदी का पानी फैलता जा रहा है। यहां पर स्थिति भयावह होती जा रही है। अब तक जिले के 1240 गांव के 2266 वार्ड में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है। घरों में पानी प्रवेश कर जाने से 52948 लोग अपने घरों से विस्थापित हो चुके हैं। बाढ़ के पानी से डूबने से 6 लोगों के साथ ही 12 पशुओं की मौत हो चुकी है। जिला प्रशासन से मिली जानकारी के अनुसार, जिले के 14 प्रखंडों में बाढ़ का पानी प्रवेश कर चुका है।

जिले के 16 में से 14 प्रखंडों में बाढ़ की स्थिति होने से स्थिति भयावह है। इन 14 प्रखंडों के 227 पंचायतों में बाढ़ का पानी फैल गया है। इसमें 136 पंचायत पूर्ण तथा 91 पंचायत आंशिक रूप से बाढ़ की चपेट में है। जिले की 1384199 आबादी तथा 51846 पशु बाढ़ की चपेट में है। प्रशासन द्वारा प्रभावितों को राहत उपलब्ध कराने के लिए 16 मोटर बोट के साथ 28 सरकारी तथा 250 निजी नाव लगाए गए हैं। विस्थापितों को भोजन के लिए जिले के प्रभावित क्षेत्रों में 302 सामुदायिक रसोई चलाए जा रहे हैं। इसमें दिन और रात मिलाकर 195181 लोगों को भोजन उपलब्ध कराया जा रहा है। अब तक प्रभावितों के बीच 30585 ड्राई राशन पैकेट तथा 49125 पॉलिथीन सीट का वितरण किया गया है।

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