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पक्के आवास योजना के लिए नहीं हाे सका चयन:एईएस मृतक बच्चों के परिजन दाे साल से आश्वासनों के भरोसे, झोपड़ियों में सता रहा संतान खोने का गम

मुजफ्फरपुरएक महीने पहलेलेखक: अरविंद कुमार
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मुख्यमंत्री ने दिया था पक्के आवास का भरोसा, कैबिनेट से भी हुआ था निर्णय, अब तक परिजनों का आवास योजना के लिए नहीं हाे सका चयन। - Dainik Bhaskar
मुख्यमंत्री ने दिया था पक्के आवास का भरोसा, कैबिनेट से भी हुआ था निर्णय, अब तक परिजनों का आवास योजना के लिए नहीं हाे सका चयन।
  • अब एम्स जोधपुर की टीम के शोध में घर बनाने की खामियों को बताया गया है एईएस का प्रमुख कारण

एईएस के कारण जिले में असमय ही काल के गाल में समा गए बच्चों के परिजनों काे पक्का घर मिलने का सपना अब भी अधूरा है। दाे साल बीत जाने के बाद भी ये झोपड़ियों में रहने काे मजबूर हैं। यह हाल तब है जब खुद मुख्यमंत्री ने एईएस से मृत बच्चों के परिजन से मिल कर सरकारी मदद से आवास का आश्वासन दिया। वह जल जीवन हरियाली योजना के शुभारंभ के माैके पर 24 दिसंबर 2019 काे दरियापुर पहुंचे थे।

यहां मृतक बच्चों के परिजन नूनू महताे और सुबोध पासवान काे 25-25 हजार रुपए अनुग्रह राशि भी दी थी। 15 जनवरी 2020 काे राज्य कैबिनेट ने सभी एईएस प्रभावित परिवारों काे पक्का मकान बनवाने की मंजूरी दी। आवास अब भी नहीं बने। एईएस काे लेकर शाेध करने वाली जोधपुर एम्स की टीम की रिपोर्ट के बाद साेमवार काे दैनिक भास्कर प्रतिनिधि ने इन परिवारों का हाल जाना। कांटी प्रखंड में सीएम के दाैरा वाले क्षेत्र तक में मृतक बच्चों के परिवार की स्थिति नहीं बदली है।

इन तीन केस स्टडी से जानिए एईएस से मृत बच्चों के परिवार की वर्तमान स्थिति,

केस वन : सीएम से चेक मिला, पर आवास के लिए चयन ही नहीं
अपने चार साल के बच्चे प्रिंस कुमार की माैत के बाद घर पर मुख्यमंत्री नीतीश कुमार के हाथों 25 हजार का चेक पाने वाले नूनू महताे के कांटी प्रखंड के दरियापुर टाेला स्थित झोपड़ी में ताला लटका मिला। बगल की झोपड़ी में बैठे गुलशन और सन्नी नाम के बच्चों ने दंपती के काम पर जाने की बात कही। काफी देर इंतजार के बाद लाैटे नूनू महताे ने कहा- हमारा ताे आवास निर्माण के लिए चयन भी नहीं हुआ है। मुख्यमंत्री के बाद दाे डीएम भी आए। पर, केवल आश्वासन ही दे रहे हैं।

केस टू : दरियापुर के सुबोध को 25 हजार का चेक, नहीं बना घर
बच्ची निधि कुमारी की माैत के बाद सीएम के हाथों 25 हजार का चेक लेने वाले दरियापुर के सुबोध पासवान अपनी झोपड़ी के सामने खड़े मिले। बताया 2013 में इंदिरा आवास के नाम पर 45 हजार रुपए मिले थे। लेकिन, लिंटर तक ही घर बना। उस अधूरे घर के सामने पुरानी झोपड़ी में ही गुजर-बसर हाे रहा है। कहा जा रहा है कि 2019 में बच्ची की माैत के छह वर्ष पहले ही आवास के लिए चयन हाे गया था। अब एईएस प्रभावित परिवारों की सूची में लाभ नहीं मिलेगा।

केस थ्री : शहबाजपुर के मकसूद ने डीएम को सौंपे थे कागजात
कांटी के शहबाजपुर के माे. मकसूद आलम की साढ़े तीन साल की पुत्री सबाना खातून की एसकेएमसीएच में इलाज के दैारान 10 जून 2019 काे माैत हाे गई। अपनी झोपड़ी के सामने पत्नी शहीदा खातून के साथ खड़े माे. मकसूद ने बताया कि अब तक किसी प्रकार का काेई लाभ नहीं मिला। मुख्यमंत्री के सामने तत्कालीन डीएम आलाेक रंजन घाेष काे सभी कागजात दिए। लेकिन, अब इस कागज काे देख बच्ची की याद आने के कारण फाड़ कर फेंक देने का मन करता है।

मीनापुर में मृत एक बच्चे के परिवार का बन चुका घर, दूसरों काे अब भी इंतजार
मीनापुर प्रखंड की अलीनेउरा पंचायत के नूर छपरा, अलीनेउरा ब्राह्मण टोली और धर्मपुर पंचायत के खानेजादपुर में 2019 में एक-एक बच्चे की मौत चमकी बुखार से हुई थी। सभी मृतक के परिजन के लिए आवास, शौचालय, शुद्ध पेयजल सहित अन्य सुविधाएं देने की घोषणा हुई। नूरछपरा की रानी देवी के पति राजकिशोर महतो ने बताया कि 5 वर्षीय बेटी प्रियंका की मौत के बाद आवास योजना की राशि से घर बन चुका है। लेकिन, खानेजादपुर के मृतक की दादी फूलकुमारी देवी ने आवास नहीं मिलने की बात कही। सुरेश राम काे 50 हजार का चेक मिला। अलीनेउरा ब्राह्मण टोली के अरुण राम काे अब तक काेई सुविधा नहीं मिली। दरवाजे पर नल-जल योजना का नल लगा है। लेकिन, पानी नहीं आता है।

सर्वाधिक एईएस प्रभावित पांच प्रखंडों में बने 25 हजार घर
सर्वाधिक एईएस प्रभावित पांच प्रखंडों बाेचहां, कांटी, मीनापुर, मोतीपुर और मुशहरी में 32433 परिवारों काे आवास देने का लक्ष्य था। इनमें 32014 का चयन हुआ। 910 जमीन विहीन और 15 पलायन करने वालाें काे छाेड़ 31089 परिवारों काे योग्य माना गया। जिला प्रशासन के पास इस साल 6 दिसंबर तक 25241 आवास बनने की रिपोर्ट है। 190 घराें का निर्माण जारी रहने और 5848 घर नहीं बनने की बात कही गई है। वैसे, इसमें एईएस से मृत बच्चों के परिवार का स्पष्ट आंकड़ा नहीं है।

80% घर बने, बाकी जल्द बनेंगे : डीएम

  • सभी पांच प्रखंडों के चयनित परिवारों में 80 फीसदी का आवास निर्माण कराया जा चुका है। केवल मृतक बच्चों के परिवार के बदले संबंधित पंचायत और प्रखंड के बाकी परिवारों के लिए भी आवास बनाने का लक्ष्य है। बचे लाेगाें का आवास भी जल्द ही बनवा दिया जाएगा। - प्रणव कुमार, डीएम
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