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तीन माह की बच्ची की कोरोना से मौत:काश! किशनगंज सदर अस्पताल में एनआईसीयू रहता ताे बच सकती थी मासूम; अब देरी की तो आपराधिक लापरवाही

किशनगंज10 दिन पहले
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किशनगंज में तीन महीने की बच्ची में कोरोना वायरस मिलने और इससे मौत होने का यह पहला मामला है। - Dainik Bhaskar
किशनगंज में तीन महीने की बच्ची में कोरोना वायरस मिलने और इससे मौत होने का यह पहला मामला है।
  • तीसरी लहर के लिए हम कितने तैयार..यह सदमा इसका गवाह...
  • डॉक्टरों ने मधेपुरा रेफर किया, लेकिन परिवार ले जाने में सक्षम नहींं था

काेराेना की तीसरी लहर का खतरा सामने है। लेकिन, हमारी लचर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर जानलेवा साबित हाेने लगी है। अगर हम अब भी नहीं चेते और समय रहते पूरी तैयारी नहीं की ताे स्थिति हमारे हाथ से निकल जाएगी। दरअसल, काेराेना वायरस ने अब बच्चों को भी चपेट में लेना शुरू कर दिया है।

शुक्रवार की शाम किशनगंज गलगलिया की रहने वाली तीन महीने की बच्ची की कोरोना से मौत हो गई। हालांकि, बच्ची की मां और पिता कोरोना से संक्रमित नही हैं। जिले में तीन महीने की बच्ची में कोरोना वायरस मिलने और इससे मौत होने का यह पहला मामला है। अस्पताल उपाधीक्षक डॉ. अनवार आलम ने कोरोना से बच्ची की मौत की पुष्टि की है। उन्हाेंने बताया कि मृतक बच्ची की बड़ी बहन भी पॉजिटिव है, लेकिन अभी तक उसकी रिपोर्ट हम लोगों तक नहीं आई है।

बच्ची की न मां संक्रमित थी न ही पिता
गलगलिया के भाड़ा गोला निवासी फिरोज आलम की तीन महीने की बच्ची को सांस लेने में दिक्कत होने के बाद उसे पहले चाइल्ड स्पेशलिस्ट के पास प्राइवेट में दिखाया गया। प्राइवेट चिकित्सक ने बच्ची को सदर अस्पताल भेज दिया। सदर अस्पताल में तीन जून को पहले बच्ची की रैपिड एंटीजन किट से जांच की गई। जांच में बच्ची कोविड संक्रमित पाई गई। यहां पर ऑक्सीजन लगाने के बाद बच्ची का ऑक्सीजन लेवल 70 ही रह रहा था। उसे एनआईसीयू में रखने के लिए जन नायक कर्पूरी चिकित्सा महाविद्यालय मधेपुरा रेफर कर दिया गया, लेकिन बच्ची के पिता ने मधेपुरा जाने में असमर्थता व्यक्त करते हुए सदर अस्पताल में ही इलाज करने की गुहार लगाई, जहां शुक्रवार की शाम बच्ची ने दम तोड़ दिया।

ये 2 हालात हमें डराते हैं...
1-लचर हेल्थ इंफ्रास्ट्रक्चर: अस्पतालों में पर्याप्त बेड-वेंटीलेटर नहीं। बच्चों के लिए तो सिर्फ 143 वेंटीलेटर।
2-कमजोर माली हालत: अधिकतर लोगों की आर्थिक स्थिति कमजोर, मनचाही जगह पर इलाज कराने में अक्षम।

तैयारी कैसी?

1. बिहार में बच्चों के लिए 33 जिलों में वेंटिलेटर ही नहीं, यानी सिर्फ पांच में। 2. अभी कुल 143 वेंटिलेटर, चाहिए 1000, 816 बेड, जरूरत 10000 की। 3. पूरे राज्य में 184 नीकू, 175 पीकू और 6 ही आईसीयू उपलब्ध।

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