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पंचायत चुनाव में भरत काे राम की जरूरत नहींं:राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामसूरत राय के बड़े भाई भरत राय चाैथी बार मुखिया बनने के लिए मैदान में

मुजफ्फरपुर3 महीने पहलेलेखक: दिग्विजय कुमार
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बाेचहां प्रखंड की गड़हां पंचायत स्थित मंत्री रामसूरत का घर, जिसकी दीवार पर टंगा है बड़े भाई का चुनावी बैनर। - Dainik Bhaskar
बाेचहां प्रखंड की गड़हां पंचायत स्थित मंत्री रामसूरत का घर, जिसकी दीवार पर टंगा है बड़े भाई का चुनावी बैनर।

बाेचहां प्रखंड की गरहां पंचायत दाे दशक पहले तक अर्जुन राय (पूर्व मुखिया/ पूर्व प्रमुख) के नाम से जाना जाता था। इस पंचायत में 2001 से अर्जुन राय की विरासत काे उनके बड़े पुत्र भरत राय ने संभाल रखा है। तीन बार मुखिया रह चुके हैं। चाैथी बार मुखिया बनने के लिए चुनावी दंगल में हैं। इस बार मतदाता उन्हें राजस्व एवं भूमि सुधार मंत्री रामसूरत राय के बड़े भाई के नाम से भी जान रहे हैं।

हालांकि, भरत राय इससे इत्तेफाक नहीं रखते। कहते हैं कि मुझे उनके नाम की आवश्यकता नहीं है। पहले हम हैं तब वह मंत्री हैं। रामसूरत राय 2010 में विधायक बने हैं। इससे पहले दाे बार वह मुखिया बन चुके थे।

पहली बार उनके विधायक बनने के बाद 2011 के पंचायत चुनाव में वह अपने निकटतम प्रतिद्वंद्वी बैजू प्रसाद यादव से हार गए थे। रामसूरत राय 2020 के विस चुनाव में दूसरी बार औराई से निर्वाचित हाेकर मंत्री बने हैं। सूबे की राजनीति में भले ही उनका कद बड़ा है, लेकिन पंचायत की राजनीति में भरत राय काे राम सूरत के चेहरे की जरूरत नहीं है।

इस पंचायत में वोट का गणित
गरहां दरभंगा फाेरलेन के किनारे बसा है। पंचायत के बीच से पुराना दरभंगा राेड गुजर रहा है। मुख्य सड़क दुरुस्त है, लेकिन गलियाें की सड़क बहुत अच्छी नहीं है। बाेचहां प्रखंड मुख्यालय से सटा हुआ है। 9 वार्ड के पंचायत में 5200 वाेटर हैं। इसमें यादव के 1600, 500 कुशवाहा, 300 सहनी, 250 वैश्य, 350 स्वर्णकार के अलावा 2000 दलित व महादलित वाेटर हैं।

विरोधी का वोट काटने के लिए पत्नी को भी भराया था पर्चा
मतदाता कहते हैं कि पहली बार ईवीएम से हाे रहे पंचायत चुनाव भरत राय के लिए इतना आसान भी नहीं है। ईवीएम के क्रमांक में अपने नाम काे निकटतम प्रतिद्वंद्वी से ऊपर करने में उनका प्रयास विफल रहा। कहा जाता है कि इसी कारण भरत राय की पत्नी विभा राय ने भी मुखिया पद के लिए नामांकन किया था। पर, क्रमांक में हेरफेर नहीं हाेते देख अंतिम समय में विभा ने नाम वापस ले लिया।

ईवीएम के क्रमांक में निकटतम प्रतिद्वंद्वी बैजू यादव का नाम इनके नाम से ऊपर हाे गया है। 2011 के पंचायत चुनाव में बैजू ने ही भरत काे शिकस्त दी थी। भरत राय कहते हैं कि बैजू प्रसाद यादव तथा दीपक कुमार कभी उनका राजनीतिक समर्थक रहा है।

मुखिया पद के लिए कुंदन कुमार, दीपक कुमार, बैजू प्रसाद यादव, भरत राय, मंधन देवी तथा मुंद्रिका पासवन सहित छह उम्मीदवार गड़हां के चुनावी मैदान में जाेर आजमाइस कर रहे हैं। सरपंच पद के लिए भी आठ उम्मीदवार चुनावी दंगल में हैं।

इसमें वर्तमान सरपंच प्रमाेद राय के साथ-साथ संताेष राय, संजय राय, भाेला राय, अरविंद राय, सुरेश राय, श्रीकांत राय तथा उमेश सिंह शामिल हैं। मुखिया तथा संरपंच पद सामान्य श्रेणी के लिए है। वहीं पंचायत समिति सदस्य का पद अति पिछड़ा के लिए आरक्षित है। पंचायत समिति सदस्य पद के लिए लाल बिहारी सहनी, अनिल भारती, राम कुमार, मनाेज महताे तथा गणेश ठाकुर मैदान में डटे हुए हैं।

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