फीस वापसी के लिए लगातार गुहार लगा रहे अभ्यर्थी:डीएलएड एंट्रेंस के नाम पर​​​​​​​ बिहार बोर्ड ने लाखों वसूले, दो वर्ष बाद भी छात्र खाली हाथ

मुजफ्फरपुर20 दिन पहले
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परीक्षा शुल्क वापस करने के लिए आवेदन, पर भुगतान प्रक्रिया पूरी नहीं - Dainik Bhaskar
परीक्षा शुल्क वापस करने के लिए आवेदन, पर भुगतान प्रक्रिया पूरी नहीं

बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने वर्ष 2020 में डीएलएड प्रवेश परीक्षा के नाम पर अभ्यर्थियों से परीक्षा शुल्क के रूप में वसूली लाखों की राशि दो वर्ष बाद भी अब तक स्टूडेंट्स को नहीं लौटाई है। स्टूडेंट्स बोर्ड से लगातार शुल्क वापसी के लिए गुहार लगा रहे हैं, लेकिन उन्हें संतोषजनक जवाब नहीं मिल रहा। बोर्ड पर अब भी छात्र-छात्राओं का लाखों बकाया है।

मुजफ्फरपुर समेत सूबे के अन्य जिलों के हजारों स्टूडेंट्स को इसका खामियाजा भुगतना पड़ रहा। वर्ष 2020 और 2021 में प्रवेश परीक्षा नहीं होने पर मेरिट के आधार पर स्टूडेंट्स का राज्य के सरकारी और निजी डीएलएड संस्थानों में नामांकन की प्रक्रिया पूरी की गई, लेकिन दो वर्ष बाद भी अभ्यर्थियों के हाथ खाली हैं।

राज्य के सरकारी डीएलएड संस्थानों में नामांकन के लिए होने वाली प्रवेश परीक्षा के लिए स्टूडेंट्स से वर्ष 2020 में लाखों की राशि वसूली गई थी। जब परीक्षा नहीं हुई और मेरिट के अंक पर नामांकन हुए तब बोर्ड ने स्टूडेंट्स से वसूले परीक्षा शुल्क को लौटाने की घोषणा की थी। अभी तक इसे लेकर लगातार स्टूडेंट्स मुखर हैं। इधर, मामले को लेकर बोर्ड के अधिकारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि भुगतान की प्रक्रिया शुरू हो गई है।

जिले से 50 हजार आवेदन, प्रति छात्र वसूले गए 960 रुपए
जिले के 15 शैक्षणिक संस्थानों में नामांकन को लेकर 50 हजार स्टूडेंट्स ने आवेदन किए थे। इस क्रम में सामान्य कोटि, अत्यंत पिछड़ा, अति पिछड़ा और आर्थिक रूप से कमजोर वर्ग के छात्र से 960 रुपए वसूले गए थे। वहीं, अनुसूचित जाति, जनजाति और दिव्यांग कोटि के स्टूडेंट्स से 760 रुपए लिए गए थे। छात्र मनीष ने बताया कि पिछले वर्ष आवेदन किया गया। परीक्षा हुई नहीं और शुल्क अब तक वापस नहीं हुआ है। बिहार राज्य प्रशिक्षु शिक्षक संघ के प्रदेश अध्यक्ष ऋषिकेश राज ने कहा, बोर्ड आवेदन लेने के बाद भी शुल्क वापस नहीं करता है। उन्हाेंने कहा, जल्द राशि लाैटाई जाए।

परीक्षा शुल्क वापसी के लिए मांगे आवेदन भी ठंडे बस्ते में
इधर, पिछले वर्ष अभ्यर्थियों की मांग पर बिहार विद्यालय परीक्षा समिति ने शुल्क वापसी के लिए ऑनलाइन आवेदन मंगाए थे। बोर्ड के पोर्टल पर अभ्यर्थियों को आवेदन व क्रमांक संख्या और जन्मतिथि डालकर लॉग इन करना था। जुलाई में ऑनलाइन आवेदन के बाद छात्र राशि के इंतजार में हैं। छात्र आदित्य ने बताया, 6 माह बीतने के बाद भी शुल्क नहीं मिला। उन्हाेंने कहा कि बिहार बोर्ड के सोशल मीडिया अकाउंट से इस मुद्दे पर जानकारी लेते हैं, लेकिन उचित जवाब नहीं मिलता है।

मानसिक उत्पीड़न और संस्थाओं के प्रति बच्चों के मन में अविश्वास होगा
शिक्षाविद प्रो. प्रमोद कुमार ने बताया, इस प्रक्रिया का सबसे बड़ा नुकसान बच्चों का मानसिक उत्पीड़न और संस्थाओं के प्रति अविश्वास पैदा होना है। ऐसा कोई सपना या उम्मीद टूटने या छले जाने से होता है। सरकार भी अब व्यवसायी के रूप में कार्य कर रही है, जो आर्थिक रूप से पिछड़े और विपन्न अभ्यर्थियों से बिना परीक्षा कराए शुल्क लेकर खजाना भर रही है। इससे कम उम्र में असंतोष की भावना जन्म लेती है।

डीएलएड में नामांकन के लिए आवेदन करने वालों में अधिकतर का आर्थिक स्तर पिछड़ा होता है। उन्हें परीक्षा शुल्क भी मुश्किल से मिलता है। कई ऐसे छात्र-छात्राएं हैं, जिनका अगर सरकारी डीएलएड या अन्य कोर्स के संस्थान में चयन नहीं हो पाता है तो वह संबंधित पाठ्यक्रम में नामांकन ही नहीं लेत हैं। इससे उनकी आर्थिक स्थिति का पता लगता है कि उनके पठन-पाठन और आगे बढ़ने की प्रक्रिया में पैसे की अहमियत क्या है और इसके लिए वह कितनी मेहनत करते हैं?

शिक्षाविद प्रो. प्रमोद कुमार
शिक्षाविद प्रो. प्रमोद कुमार
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