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  • But The Irony Is That The Solution Entangled In Politics, Even After The Passing Of Bhado, Life In The City Is Still On The Boat; MLA's Road Made Of 2.58 Crores, No Water Logging Here

शहर की सबसे बड़ी समस्या- जलजमाव:लेकिन विडंबना ये कि सियासत में उलझा समाधान, भादो बीतने के बाद भी शहर में जिंदगी अब भी नाव के सहारे; 2.58 करोड़ से बनी विधायक की सड़क, यहां कोई जलजमाव नहीं

मुजफ्फरपुर2 महीने पहलेलेखक: शैलेश कुमार
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दृश्य-1, स्थान : वार्ड 49 स्थित लक्ष्मी काॅलाेनी
हेलो मैम... आपका कूरियर है। हम रोड पर खड़े हैं... सॉरी मैम इतने ज्यादा पानी में नहीं आ सकते। हम 20 मिनट यहीं रुकते हैं। 1:15 बजे नाव से बीकॉम फर्स्ट ईयर की छात्रा श्वेता कूरियर लेने पहुंचीं और नाव से ही घर लौट गई।
दृश्य-2, स्थान : लक्ष्मी कॉलोनी के सामने रोहुआ रोड
मेन रोड स्थित फैक्टरी पर बाइक लगा आचार्य दिवाकर झा धोती-कुर्ता खोल झोला में डालते हैं। कंधे का गमछा कमर में लपेट कर एक हाथ में धोती-कुर्ता वाला झोला व दूसरे हाथ में हेलमेट लेकर जांघ तक पानी में उतरते हैं।

यही विडंबना है। भादो बाद भी शहर के कई मोहल्लों में आवागमन के लिए नाव ही सहारा है। वार्ड 49 के 50 से ज्यादा परिवार अब भी जलजमाव झेल रहे हैं। प्रशासन ने ये रहम किया कि 15 अगस्त से यहां नाव चलवा दी। देवी मंदिर रोड के पास रज्जू साह लेन, क्लब रोड के वीसी लेन समेत कई मोहल्लों में जलजमाव से मुक्ति नहीं मिली है।

शहर के सबसे प्रमुख मोतीझील का कारोबार इस कारण ठप रहा है। सबसे ज्यादा जलजमाव की समस्या इस साल मिठनपुरा इलाके के लोगों को झेलनी पड़ी है। माड़ीपुर चित्रगुप्त पुरी, गन्नीपुर, ब्रह्मपुरा संजय सिनेमा रोड, राहुल नगर, आनंदपुरी व बीबीगंज के लोग भी तीन से चार महीना तक जलजमाव से जूझते रहे हैं।

वहीं 2.58 करोड़ रुपए से बनी विधायक विजेंद्र चौधरी की गली वाली सड़क पर कहीं पानी नहीं है। वैसे इसके निदान के लिए नगर विधायक कहते हैं कि जल्द ही वे नगर निगम, पथ निर्माण, बुडको व बाकी विभाग के अधिकारियों के साथ बैठक करेंगे। दूसरी तरफ पूर्व मंत्री सुरेश शर्मा कहते हैं कि 183 करोड़ रुपए की लागत से जो तीनों स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज बनने हैं, उसे किसी भी कीमत पर बनाना ही होगा।

आईना हैं ये तस्वीरें, ये दो तस्वीरें हैं। सड़कें बनती तो हमारे-आपके टैक्स के पैसे से ही हैं लेकिन हकीकत ‘आम’ और ‘खास’ के फर्क से पर्दा हटा ही देती है

लक्ष्मी कॉलोनी साउथ से नाव पर आते-जाते लोग।
लक्ष्मी कॉलोनी साउथ से नाव पर आते-जाते लोग।
जलजमाव से मुक्त ये सड़क नगर विधायक आवास के सामने की है।
जलजमाव से मुक्त ये सड़क नगर विधायक आवास के सामने की है।

शहर में लगातार हो रहे जलजमाव के पांच सबसे प्रमुख कारण

  • अधिकारी से लेकर उप मुख्यमंत्री के साथ बैठक दर बैठक के बावजूद रेलवे कल्वर्ट की नहीं हो सकी सफाई
  • नाले की सफाई में शिथिलता, 4 माह तक जलजमाव में डूबे रहने के बाद मोतीझील के नाले की हुई सफाई
  • रु. 183 करोड़ खजाने में रहने के बावजूद स्टार्म वाटर ड्रेनेज का अब तक नहीं बन पाना
  • रेलवे की ओर से सहयोग न मिलना और विभिन्न विभागों के अफसरों के बीच आपसी तालमेल की कमी
  • वर्ष 2007 के बाद अत्यधिक बारिश होना और शहर में जलनिकासी की कोई प्रभावी योजना नहीं

जलजमाव पर जुबानी जंग

जलजमाव का संकट तो मुझे विरासत में मिला, 10 वर्षों में कुछ हुआ ही नहीं
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सवाल : जलजमाव चुनाव में आपका प्रमुख मुद्दा था। आप जीते भी। फिर पिछले साल से ज्यादा दुर्दशा लोगों को क्यों झेलनी पड़ रही है।
जवाब : पिछले 10 वर्षाें का गैप (सुरेश शर्मा का कार्यकाल) ही इसकी प्रमुख वजह है। 2 साल में स्थिति बिगड़ी है। यह स्थिति नहीं बनती, यदि 10 वर्षाें में काम हुआ होता।

सवाल : वार्ड 49 स्थित लक्ष्मी कॉलोनी में अब भी नाव ही लोगों की जिंदगी का सहारा है। क्या वहां के लोग आपके वोटर नहीं हैं?
जवाब : पूरा शहर मेरा है। पर, जलजमाव मुझे विरासत में मिला है। इसके निदान के लिए लगातार प्रयास में जुटे हुए हैं।

सवाल : आप विधायक हैं। निगम राजनीति में भी मजबूत दखल रखते हैं। आपके घर के सामने की सड़क पर एक इंच पानी नहीं लगा और पूरा शहर 4 माह तक नाले के पानी की सड़ांध झेलता रहा। आप क्या कहना चाहेंगे?
जवाब : पहले टालने की कोशिश... फिर कहा- पिछले साल तो मेरे दरवाजे तक भी पानी था। अभी केवल सड़क बनी है। नाला का स्लैब भी नहीं बना है।

10 साल पहले तक सड़कें चलने लायक थीं क्या? सच तो सब जानते हैं
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सवाल : अब भी लक्ष्मी कॉलोनी साउथ के लोगों के लिए नाव ही आवागमन सहारा है। इसके लिए आप किसे गुनाहगार मानते हैं?
जवाब : जलजमाव के लिए निगम, बुडको व जिला प्रशासन भी गुनाहगार है। हमने स्टॉर्म वॉटर ड्रेनेज बनाने को 183 करोड़ दिए। ड्रेनेज बन गया होता तो पानी निकल जाता।

सवाल : विधायक कह रहे 10 वर्षाें में कोई काम नहीं हुआ। उसी का खामियाजा है यह
जवाब : 10 साल पहले जब विजेंद्र चौधरी विधायक थे ताे कोई रोड चलने लायक थे क्या? शहर को किसने बर्बाद किया, सब जानते हैं। बटलर-दिघड़ा, हॉस्पिटल रोड, इस्लामपुर रोड किसने बनवाए? जवाहरलाल रोड, क्लब रोड, भामाशाह द्वार-ब्रह्मपुरा रोड भी हमने स्वीकृत कराया।

सवाल : विजेंद्र चौधरी के घर के सामने 2. 58 करोड़ रुपए से किस तरह की सड़क बनी कि उस पर एक इंच भी पानी नहीं लगा। जवाब : हंसते हुए। उनके घर के सामने सड़क तो बन गई पर नाला नहीं बना। इस वजह से उससे आगे बढ़ने पर लोगों को इस बार भी परेशानी हुई। समय पर काम हो इसके लिए अधिकारियों को सख्त होना होगा।

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