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चैत्र नवरात्र:दूसरे दिन मां ब्रह्मचारिणी देवी की हुई पूजा श्रद्धालुओं ने की सुख और समृद्धि की कामना

मुजफ्फरपुर/साहेबगंजएक महीने पहले
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  • पुजारियाें ने मंदिर का पट बंद कर दुर्गा सप्तशती का पाठ कर माता काे भोग भी लगाया

चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन मंदिर व घराें में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से मां के दूसरे स्वरूप ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा-अर्चना कर सुख-समृद्धि की कामना की। इस दाैरान पुजारियाें ने मंदिर के पट बंद कर दुर्गा सप्तशती का पाठ कर माता काे भाेग लगाया। राज-राजेश्वरी देवी मंदिर के पुजारी पं. अमित तिवारी ने बताया, मां के दूसरे स्वरूप की पूजा करने से सुख-शांति की प्राप्ति हाेती है। वहीं, गुरुवार काे मां के तीसरे स्वरूप चंद्रघंटा देवी की पूजा की जाएगी। इधर, साहेबगंज नगर पंचायत आढ़त बाजार दुर्गा मंदिर में चैत्र नवरात्र के दूसरे दिन आचार्य निरंजन पाण्डेय ने माता ब्रह्मचारिणी देवी की पूजा कराई।

माता के दूसरे स्वरूप का वर्णन करते हुए आचार्य ने कहा कि शिव जी को पति के रूप में प्राप्त करने के लिए माता जी ने घोर तपस्या की थी। इसके कारण इन्हें तपश्चारिणी भी कहा जाता है। देवी का यह रूप पूर्ण ज्योतिर्मय और अत्यंत भव्य है। मौके पर यजमान कन्हाई प्रसाद, विनय कुमार, अशोक कुमार, दीनानाथ प्रसाद, सोहन दास, शिव जी प्रसाद, निशांत अग्रहरी, कृष्ण कुमार, प्रदीप कुमार आदि थे। वहीं शक्ति पीठ के रूप में मान्यता प्राप्त ‘मां मनसा देवी शक्तिपीठ माई स्थान मंदिर में भी पूजा-अर्चना की गई। मौके पर आचार्य संजय दुबे, पं अनिकेत दूबे, विनय तिवारी, अनुपम दूबे, प्रमोद कुमार, जालंधर सिंह आदि थे।

नवरात्र पर अघोर आश्रम में बरसती है माता की कृपा

श्रीसिद्धपीठ अघोर आश्रम डकरामा में साल के चारों नवरात्र पर शक्ति की भक्ति का नजारा दिखता है। यहां के पुजारी स्वामी शिवजी सिंह बगैर अन्न-जल के साल के सभी चार नवरात्र करते हैं। एनएच-77 खनुआ घाट से सटे पूरब डकरामा गांव स्थित श्री सिद्धपीठ अघोर आश्रम डकरामा स्थित माता दुर्गा, दक्षिण काली और बगलामुखी आस्था और भक्ति के केंद्र बन गए है। यहां मत्था टेकने मात्र से हर एक मुराद पूरी होती है। ऐसी मान्यता है कि यहां हर वक्त माता उपस्थित रहती है और भक्तों का कष्ट दूर कर उनकी मुराद को पूरा करती है।

सात्विक पद्धति, बगलामुखी, आराधना व अघोरपंथ इस चमत्कारी सिद्धपीठ की पहचान है। डकरामा स्थित बंगलामुखी साधना केंद्र देश स्तर की शक्तिपीठ है। यहां आकर सच्चे मन से जिसने भी झोली फैलाई वह खाली नहीं गया। यहां पिछले पांच दशक से शक्ति की भक्ति और आस्था का दीप जल रहा है। बैंककर्मी रहे शिवजी सिंह को संसारिक विरक्ति ने इस कदर व्याकुल कर दिया कि नौकरी छोड़ दी। बाबा अघोरेश्वर स्वामी नारायण से दीक्षा ली और कठिन तप की बदौलत सिद्धियां प्राप्त कर जल कल्याण में जुट गए। वहीं कोरोना के कारण मंदिर में प्रवेश पर फिलहाल रोक है।

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