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एसकेएमसीएच का हाल:पहले काेराेना वार्ड तक मरीज काे पहुंचाने में मशक्कत, फिर इलाज के लिए घंटों इंतजार

मुजफ्फरपुर21 दिन पहले
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  • 12 बजे आए मरीज काे शाम तक डाॅक्टर नहीं देखे ताे घर ले गए परिजन
  • ट्रॉली वाले कई कर्मी भी करते हैं मनमानी, परिजन से पैसे भी मांगते

साेमवार, समय दिन के 11:47 बजे। एक निजी अस्पताल से रेफर होकर शास्त्रीनगर के आरबी द्विवेदी एसकेएमसीएच के कोविड-19 वार्ड के मुख्य द्वार पर एंबुलेंस से पहुंचे। वहां यह काेई नहीं बता रहा था कि मरीज को लेकर कहां जाएं। कोविड वार्ड से बाहर निकलते हुए एक मरीज के परिजन से उनके दामाद पूछे- भइया मरीज है, लेकर कहां जाना होगा। दूसरे मरीज के परिजन बोले- संक्रमित हैं तो गाड़ी में ही इंतजार कीजिए। सुनते ही एंबुलेंस कर्मी कहता है, ज्यादा इंतजार नहीं करेंगे।

जितना लेट हाेगा, भाड़ा बढ़ता जाएगा। देखे नहीं, एक भी एंबुलेंस खाली नहीं था। आपको तो सिर्फ 10 हजार ही बताएं है, जल्दी कीजिए। यह सुनकर वे दौड़े-दौड़े कोविड वार्ड में घुसे। नर्स रजिस्टर में दवा-सुई के बारे में लिख रही थी। दो-तीन बार पूछने पर भी कुछ नहीं बोली। इस पर वे गुस्सा गए। तब उन्हें बताया गया कि बगल में डॉक्टर हैं। डॉक्टर ने कहा- अधीक्षक से ऑर्डर कराना होगा, फिर कुछ हो सकेगा। इमरजेंसी काउंटर पर जाने के दौरान उन्हें रजिस्ट्रेशन पर्ची के लिए आधा घंटा इंतजार करना पड़ा।

मजबूरी बताया, फिर रजिस्ट्रेशन पर्ची मिली। अधीक्षक कक्ष में जाते-जाते बज गए एक। अधीक्षक काे सारी जानकारी दी ताे उन्हाेंने नर्स को फटकार लगाते हुए मरीज को फाैरन भर्ती करने के लिए कहा। नर्स सीसीयू में बेड बताई और मरीज को रखने के लिए कहा। मरीज तो भर्ती हो गया, लेकिन शाम तक कोई दवा-सुई और जांच नहीं हो सकी। द्विवेदी जी डायबिटीज से भी ग्रसित थे। शाम 5 बजे परिजन उन्हें लेकर घर चले गए।

उधर, शाम 5 बजे कोविड वार्ड के बाहर 3 एंबुलेंस में मरीज बेचैनी से छटपटा रहे थे। ट्रॉली कर्मी कोविड मरीजों का सीटी-स्कैन करा रहे थे। वार्ड में डॉक्टर नहीं थे। मरीज के परिजनों को पता नहीं चल पा रहा था कि मरीज को कहां रखा जाए। घंटों प्रतीक्षा के बाद परिजन आक्रोशित हो गए। जैसे-तैसे मरीज को लेकर नर्स टेबल के पास पहुंचे। मरीज की हालत को देखते हुए एक नया वार्ड खोला गया। सबको बेड पर रखा गया। प्राथमिक उपचार शुरू हुअा। 3 घंटे बाद डॉक्टर पहुंचे। फिर सबको भर्ती किया गया।

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