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मुजफ्फरपुर:आपस का विवाद इस तरह भड़का कि धारदार हथियार से नशेड़ी ने ली बेटे की जान

मुजफ्फरपुर10 महीने पहले
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थाना क्षेत्र अंतर्गत वीरपुर स्थित बस्ती में पारिवारिक विवाद में नशेड़ी पिता जीतू राम ने धारदार हथियार से पुत्र सुनील राम की हत्या कर दी। बताया गया कि पिता और पुत्र में अक्सर विवाद हाेता रहता था। साेमवार की सुबह में दाेनाें के बीच विवाद हुआ। दाेपहर में पिता जीतू राम नशे में धुत हाेकर घर आया। पुत्र सुनील राम काे देख कर आगबबूला हाे गया। उससे गाली-गलाैज करने लगा।

पुत्र ने इसका विराेध किया ताे पिता ने घर में रखा धारदार हथियार निकाल लिया और उसके सीना में कई वार किया। पुत्र लहूलुहान हाेकर जमीन पर गिर पड़ा। परिजन दाैड़े आए, तभी आराेपित पिता फरार हाे गया। जख्मी पुत्र का इलाज शहर के निजी अस्पताल में चल रहा था, जहां बुधवार को इलाज के क्रम में उसकी मौत हो गई। इसके बाद शव गांव पहुंचा, जहां इसकी सूचना पुलिस को मिली।

पुलिस ने शव को कब्जे में लेकर पोस्टमार्टम के लिए भेज दिया है। मामले में सुनील के ससुर ने पुलिस के समक्ष पिता जीतू राम पर हत्या का आरोप लगाया है। एएसपी सैयद इमरान मसूद ने बताया कि पिता पर हत्या का आरोप लगाया गया है। घटना की तहकीकात की जा रही है। हालांकि घटना को पारिवारिक कलह से जोड़ कर देखा जा रहा है। पुलिस सभी बिंदुओं पर जांच कर रही है। आराेपी पिता काे जल्द ही गिरफ्तार कर लिया जाएगा।

इधर, नशे में माता-पिता के साथ बेटे ने की मारपीट

सिकंदरपुर कुंडल में शराब के नशे में एक बेटे ने बुजुर्ग माता-पिता के साथ गाली-गलौज व मारपीट की। मौके पर जुटे माेहल्ले के लाेगों ने बुजुर्ग दंपती को बेटे से बचाया। इसके बाद पिता रामचरण सहनी ने पुलिस काे बुलाकर आरोपित पुत्र प्रियरंजन को गिरफ्तार करवा दिया। थाने पर ब्रेथ एनेलाइजर जांच में आरोपी के शराब पीने की पुष्टि हुई है। जिसके बाद मामले में उत्पाद अधिनियम और मारपीट करने के आराेप में एफआईआर दर्ज की गई।

बुधवार काे पुलिस ने आरोपी काे न्यायिक हिरासत में जेल भेज दिया। रामचरण सहनी ने पुलिस को बताया कि वे बालूघाट स्थित एक कॉलेज में परीक्षा विभाग में कार्यरत हैं। उन्होंने अपने पुत्र प्रियरंजन को उच्च शिक्षा दिलाई। उसे बिजनेस मैनेजमेंट कॉलेज में पढ़ाया। उसका चयन पटना की एक निजी कंपनी में हो गया। इसी बीच उसे नशे की लत लग गई। नशा छुड़ाने के लिए शहर से लेकर कोलकाता के नशा मुक्ति केंद्र में भर्ती कराया गया। लेकिन, सुधार नहीं आया।

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