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चमकते सितारे:यूपीएससी में दिव्या शक्ति व शंकर का परचम

मुजफ्फरपुर2 महीने पहले
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  • कड़ी मेहनत और लगन से मिली सफलता, लक्ष्य पर फोकस कर शुरू की पढ़ाई, इंटरनेट का लिया भरपूर सहारा

दिव्या ने शहर में रहकर की पढ़ाई, दूसरे प्रयास में 79वीं रैंक प्राप्त की
शहर की दिव्या शक्ति ने यूपीएससी की परीक्षा में 79वीं रैंक हासिल की है। डॉ. धीरेंद्र सिंह की बेटी दिव्या ने कहा, उसने दूसरे प्रयास में सफलता हासिल की है। कंप्यूटर साइंस से बीटेक दिव्या ने बताया,तीन महीने के लिए ऑप्शनल विषय की कोचिंग के लिए दिल्ली गई। उसके बाद लौट कर डेढ़ वर्ष तक जूरन छपरा में किराए के मकान में रहते हुए तैयारी की। पूरी तैयारी सेल्फ स्टडी से ही की। आज इंटरनेट से उन्हें काफी सारे स्टडी मैटेरियल मिल सकते हैं, जो तैयारी के लिए बेहतर होता है।

दिव्या ने बताया, मई 2018 में अमेरिकन इन्वेस्टमेंट कंपनी की नौकरी छोड़ दी। उन्हें लगा कि काम के साथ पढ़ाई पर फोकस नहीं हो पाएगी। कहीं न कहीं कसर रह जाएगी। पहले 2017 में यूं ही फॉर्म भर दिया था। बाद में तैयारी के साथ परीक्षा में शामिल हुई। काफी मेहनत करने के कारण उम्मीद थी कि क्लियर होना चाहिए। पिता से प्रेरणा मिलती है। वहीं मां साथ-साथ नामांकन के वक्त स्कूल से लेकर कॉलेज तक जाती थी। दिव्या ने बताया कि अपनी दिलचस्पी वाले विषय का चयन करना और उसकी पूरी जानकारी जरूरी है।

उन्होंने बताया, 24 जुलाई को दिल्ली में इंटरव्यू के लिए बुलाया गया था। उनसे मधुबनी पेंटिंग और मंजूषा पेंटिंग के बारे में पूछा गया। इस बीच एक्सपर्ट पैनल के एक सदस्य ने पूछा, मंजूषा का मतलब क्या होता है। उन्होंने जवाब दिया, इसका अर्थ आभूषण रखने वाला बक्सा होता है। एक्सपर्ट टीम ने पूछा कि जिले में बाढ़ आ गई है और एक डीएम होने के नाते आप क्या करेंगी। उन्हें इंडियन मेडिकल एसो. के अध्यक्ष डॉ. संजय कुमार ने बधाई दी है।

सुजीत शंकर को 122वीं रैंक, तीसरे प्रयास में सफल

कटरा के यजुआर गांव निवासी सुजीत शंकर को यूपीएससी में 122वींं रैंक मिली है। किसान परिवार में जन्मे सुजीत ने तीसरे प्रयास में सफलता हासिल की। उनका आईएफएस बनना तय है। इसे उन्होंने दूसरे विकल्प के रूप में चुना था। पिता उमेश झा व्यवसायी व मध्य वर्गीय किसान हैं। माता वीणा मिडिल स्कूल में शिक्षिका। सुजीत 3 भाइयों में सबसे छोटे हैं। उन्होंने सीबीएसई से 10वीं पास की। 12वीं के बाद आईआईईएसटी शिवपुर हावड़ा से 8.6 सीजीपीए के साथ बीटेक की डिग्री ली। उन्होंने बीटेक आईटी से हासिल किया। मनोज कर्ण, मदन पाठक, सुधीर झा समेत अन्य ग्रामीणाें ने इन्हें बधाई दी है।

बोले- हर सफलता के लिए लक्ष्य तय करना जरूरी है
सुजीत शंकर ने बताया कि किसी भी क्षेत्र में सफलता के लिए यह जरूरी है कि सबसे पहले लक्ष्य तय हो। पढ़ाई के लिए कभी भी कोई समय तय नहीं होता है। दिन हो या रात जब अच्छा लगे रूटीन बनाकर पढ़ना चाहिए। उन्होंने कहा कि खुद पर भरोसा रखने के साथ-साथ पूरे समर्पण के साथ पढ़ाई करना चाहिए। दिलचस्पी वाले विषय की पढ़ाई जरूरी है। इससे लक्ष्य पर फोकस करने में काफी मदद मिलेगी।

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