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मुजफ्फरपुर में हाईवे पर जिंदगी...:पांच हजार से अधिक घरों में बाढ़ का पानी घुस गया, हाईवे पर टेंट लगाकर रह रहे लोग; सीएम बोले-आपदा पीड़ितों को तुरंत सहायता दी जाए

मुजफ्फरपुर19 दिन पहले
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घरों में पानी घुसने की वजह से प्रभावित लोग हाईवे में टेंट लगाकर रहने को मजबूर हैं। - Dainik Bhaskar
घरों में पानी घुसने की वजह से प्रभावित लोग हाईवे में टेंट लगाकर रहने को मजबूर हैं।

खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद बुधवार को दूसरे दिन भी बूढ़ी गंडक के जलस्तर में लगातार वृद्धि हाे रही है। बुधवार को 47 सेमी वृद्धि के साथ ही बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर शहर के सिकंदरपुर में खतरे के निशान से 64 सेमी ऊपर चला गया। लकड़ीढाई से सिकंदरपुर, जीरोमाइल तथा कांटी प्रखंड के मिठनसराय तक पांच हजार से अधिक घरों में पानी घुस गया है। वहीं, मुजफ्फरपुर-सीतामढ़ी एनएच 122 बाढ़ पीड़ित अब तक करीब 2 किलाेमीटर की दूरी में तंबू लगा चुके हैं।

सूबे में अब 9 नदियां लाल निशान के पार

नेपाल में बारिश के कारण सूबे की प्रमुख नदियों के जलस्तर में वृद्धि जारी है। लखनदेई नदी भी लाल निशान को पार कर गई। सूबे की 9 नदियों का जलस्तर खतरे के निशान से ऊपर है। गंगा बक्सर और पटना में नीचे जा रही है लेकिन मुंगेर, भागलपुर व साहेबगंज में बढ़ रही है।

सीएम नीतीश ने फिर बाढ़ग्रस्त क्षेत्रों का किया हवाई सर्वेक्षण

सीएम ने हायाघाट, बहादुरपुर, हनुमान नगर, घनश्यामपुर, मधवापुर, खजौली, फुलपरास, घोघरडीहा, बिथान, सिंघिया, बरियाही एवं कल्याणपुर का जायजा लिया।

नीतीश बोले- आपदा पीड़ितों को तुरंत सहायता दी जाए

मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने अफसरों से कहा- बाढ़ पीड़ित लोगों को तुरंत सहायता उपलब्ध कराएं। एक-एक चीज का सही से आकलन हो। इससे राहत का काम और बेहतर होगा। मुख्यमंत्री, बुधवार को दरभंगा, मधुबनी एवं समस्तीपुर जिले के बाढ़ पीड़ित इलाकों का हवाई सर्वेक्षण करने के बाद उच्चस्तरीय बैठक को संबोधित कर रहे थे। मुख्यमंत्री ने कहा कि जिलाधिकारी अपने जिले के सभी बाढ़ग्रस्त इलाकों का ठीक ढंग से जानकारी लें और उसके आधार पर आकलन करें। हमें पीड़ित लोगों की हर प्रकार से मदद करनी है। हमने शुरु से कहा है कि सरकार के खजाने पर पहला अधिकार आपदा पीड़ितों का है।

इसके लिये शुरू से काम किया गया है। 2007 में लगभग ढाई करोड़ लोग बाढ़ से प्रभावित हुये थे और उन्हें सभी प्रकार की सहायता उपलब्ध करायी गयी थी। किसानों को कृषि कार्य में हुए नुकसान का आकलन कर उन्हें सहायता उपलब्ध कराई जाए। राहत कैंप में कोरोना की जांच और टीकाकरण जरूर हो। जो कोरोना पॉजिटिव पाए जाते हैं उनके रहने एवं देखभाल की अलग से व्यवस्था हो।

बैठक में जल संसाधन मंत्री संजय कुमार झा, मुख्यमंत्री के प्रधान सचिव दीपक कुमार व चंचल कुमार, आपदा प्रबंधन विभाग के ओएसडी संजय कुमार अग्रवाल, मुख्यमंत्री के सचिव अनुपम कुमार, ओएसडी गोपाल सिंह मौजूद थे, जबकि वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के माध्यम से मुख्य सचिव त्रिपुरारी शरण, विकास आयुक्त आमिर सुबहानी तथा दरभंगा, समस्तीपुर एवं मधुबनी जिला के डीएम जुड़े हुए थे।

अफसरों ने सीएम को दी हालात की जानकारी
बैठक में जल संसाधन विभाग के सचिव संजीव हंस ने बाढ़, नदियों की स्थिति व बचाव कार्यों की जानकारी दी। आपदा प्रबंधन विभाग के अपर मुख्य सचिव प्रत्यय अमृत ने आपदा राहत कार्यों के बारे में बताया।

खतरे के निशान से 64 सेमी ऊपर गई बूढ़ी गंडक, बगहा, रामनगर, मझौलिया और चनपटिया में बाढ़

खतरे के निशान से ऊपर पहुंचने के बाद बुधवार को दूसरे दिन भी बूढ़ी गंडक के जलस्तर में लगातार वृद्धि हाे रही है। इससे मुजफ्फरपुर शहर के निचले इलाकाें में बाढ़ की स्थिति गंभीर हाे गई है। बुधवार को 47 सेंटीमीटर वृद्धि के साथ ही बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर शहर के सिकंदरपुर में खतरे के निशान से 64 सेंटीमीटर ऊपर पहुंच जाने से लाेगाें में दहशत है।

लकड़ीढाई से सिकंदरपुर, जीरोमाइल तथा कांटी प्रखंड के मिठनसराय तक पांच हजार से अधिक घरों में पानी घुस गया है। घरों में पानी घुसने से प्रभावित लाेग अपने आवश्यक सामान के साथ फोरलेन, एनएच 77 और बूढ़ी गंडक बांध पर शरण ले रहे हैं।

वहीं, जल संसाधन विभाग से मिली सूचना के अनुसार बागमती नदी का जलस्तर कटौझा में खतरे के निशान 55.23 मीटर से ऊपर 55.95 मीटर पर है। गंडक नदी का जलस्तर रेवा घाट में खतरे के निशान 54.41 से ऊपर 54.50 तथा बूढ़ी गंडक नदी का जलस्तर सिकंदरपुर में खतरे के निशान 52.53 के ऊपर 53.17 मीटर है। फसलें डूबी हुई हैं। गंडक नदी के कटाव के कारण कई लोग घरविहीन हो चुके हैं और ऊंचे स्थानों पर

शरण लिए हुए हैं। गंडक पार के चार प्रखंड की कई पंचायतें बाढ़ प्रभावित हैं। है। मोतिहारी शहर के करीब 10 से अधिक वार्ड आंशिक या पूर्णरूपेण बाढ़ प्रभावित हो गए हैं। जबकि सुगौली में बाढ़ के हालात जस के तस हैं। बंजरिया, केसरिया, अरेराज, संग्रामपुर, रामगढ़वा, चिरैया, पकड़ीदयाल में लोग ऊंचे स्थान पर शरण लिए हुए हैं। कई जगहों प्रशासन ने कम्युनिटी किचेन शुरू किया है।

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