पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

इसके पहले हड़ताल के कारण आई थी बाधा:सहायकों को कोरोना ड्यूटी में लगाया, आयुष्मान कार्ड बनाने पर ब्रेक

मुजफ्फरपुर5 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • 23,13, 351 परिवाराें काे जिले में अायुष्मान कार्ड से जाेड़ने का रखा गया है लक्ष्य

कार्यपालक सहायकाें को कोरोना ड्यूटी में लगाने से जिले में करीब 20 लाख परिवाराें का स्वास्थ्य बीमा फंस गया है। स्वास्थ्य विभाग ने पंचायतों में आयुष्मान कार्ड बनाने वाले सभी 385 कार्यपालक सहायकों को कोरोना सैंपल जांच व वैक्सीनेशन में लगाने से एेसी स्थिति बनी है। इससे पहले मार्च में हड़ताल के कारण कार्ड बनाने का कार्य प्रभावित हुआ था।

हड़ताल खत्म होने के बाद अब इन्हें कोरोना ड्यूटी में लगाया गया है। स्वास्थ्य विभाग के अनुसार, जिले में 23 लाख 13 हजार 351 परिवाराें का कार्ड बनाने का लक्ष्य था। जिले की सभी 385 पंचायताें में कार्ड बनाने के लिए कार्यपालक सहायक की नियुक्ति की गई, लेकिन मात्र 3 लाख 4 हजार 644 परिवाराें के ही अायुष्मान कार्ड बनाए गए। यह लक्ष्य का 13 प्रतिशत है। आयुष्मान भारत के जिला समन्वयक विद्या सागर ने बताया, 17 फरवरी से 31 मार्च तक पंचायताें में कार्ड बनाने का अभियान शुरू हुआ था, लेकिन हड़ताल के कारण कुछ कार्ड बनाने के बाद काम ठप हाे गया।

इसके बाद जिले में कोरोना का प्रकोप होने से इन्हें सैंपलिंग जांच और वैक्सिनेशन में लगाया गया है। उन्हाेंने कहा, लाेग वसुधा केंद्रों पर जाकर कार्ड बनवा सकते हैं। पहले यहां रुपए लगते थे। अब नि: शुल्क व्यवस्था है। कोरोना ड्यूटी खत्म होने के बाद फिर से पंचायतों में आयुष्मान कार्ड बनेंगे।

जिनका नाम पाेर्टल पर, उन्हीं का बनेगा गोल्डन कार्ड
जिला समन्वयक ने बताया, जिनका नाम आयुष्मान भारत याेजना के पाेर्टल पर दर्ज है, उन्हीं राशन कार्डधारियाें का नया कार्ड बनाया जाएगा। जिन लाेगाें का नाम पोर्टल पर नहीं है, उनका कार्ड नहीं बनेगा। उन्हाेंने बताया, लाभार्थी परिवाराें का चयन सामाजिक, आर्थिक एवं जातिगत जनगणना 2011 में निर्धारित पात्रता के आधार पर किया गया है। लाभार्थियाें की सूची सभी पंचायताें काे भेजी गई है। परिवार के सभी लाेगाें काे मिलाकर अधिकतम पांच लाख रुपए तक चयनित सरकारी व निजी अस्पतालाें में इलाज की नि: शुल्क सुविधा मिलेगी।

इस कार्डधारियों को मिलती हैं ये सुविधाएं

प्रति वर्ष 5 लाख रुपए तक का नि:शुल्क इलाज होता है। कार्ड बनने के 24 घंटे के अंदर याेजना का लाभ मिलने लगता है। अस्पताल में भर्ती हाेने से पहले और डिस्चार्ज हाेने के 15 दिन बाद तक दवा व इलाज पर हाेने वाला खर्च भी मिलता है। याेजना के तहत चयनित अस्पतालाें में देश में कहीं भी कैशलेस इलाज कराने की सुविधा। अब तक जिले में मात्र 24541 कार्ड धारी ही गोल्डन कार्ड का उपयोग कर सके हैं।

खबरें और भी हैं...