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  • In Every Rainy Season, The Entrepreneurs Of Biada Would Have Suffered A Loss Of 20 To 25 Crores, Now Preparing To Install CEPT From 33 Crores

4 दिनों से उत्पादन प्रभावित:हर बरसात में बियाडा के उद्यमियों को 20 से 25 करोड़ का होता नुकसान, अब 33 करोड़ से सीईपीटी लगाने की तैयारी

मुजफ्फरपुर25 दिन पहले
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  • मेन रोड से पानी उतरा, पर मिठनपुरा, गांधीनगर, बालूघाट समेत कई इलाकों में अब भी जलजमाव

दो दिनों की आंधी-बारिश से ही इस बार बियाडा का बेला औद्योगिक क्षेत्र जलमग्न है। 136 उद्योगों में से करीब 100 में 4 दिनों से उत्पादन बाधित है। उधर, बियाडा में एक फिर वाटर ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की तैयारी शुरू हो गई है। 33 करोड़ की लागत से फेज-2 में कॉमन एफ्लुएंट ट्रीटमेंट प्लांट (सीईपीटी) लगेगा। इससे बियाडा का दूषित पानी साफ कर नहर में बहाया जाएगा। बियाडा के डीओ अजय कुमार के अनुसार, टेंडर हो गया है। निर्माण शीघ्र शुरू होगा। हालांकि, उद्यमियों का कहना है कि इससे सिर्फ उद्योगों से निकलनेवाले गंदे पानी को साफ किया जा सकेगा। जबकि, प्रमुख समस्या जलजमाव है।

उत्तर बिहार उद्यमी संघ के अध्यक्ष शिवनाथ गुप्ता ने कहा कि इस प्लांट से उद्यमियों को कोई फायदा नहीं होगा। बियाडा में जब तक शहर के पानी का बहाव नहीं रोका जाएगा, जलजमाव खत्म नहीं हो सकता। लघु उद्योग भारती ने विभाग को भेजी रिपोर्ट में कहा है कि हर साल बरसात से उद्यमियों को 20-25 करोड़ का नुकसान होता है।

लघु उद्योग भारती के पूर्व प्रदेश अध्यक्ष श्यामसुंदर भीमसेरिया ने कहा, फेज-1 व 2 के बीच स्थान का चयन कर एसटीपी या संप हाउस लगा पानी की निकासी और शहर से पानी के बहाव को बियाडा में रोकने से स्थाई समाधान निकलेगा, लेकिन बियाडा पिछले 10 साल से स्थायी समाधान के लिए केवल प्रोजेक्ट ही बना रहा है।

उधर, अब भी मिठनपुरा, बालूघाट, गांधीनगर,जयप्रभा नगर समेत कई इलाकों में जलजमाव है। रविवार की वजह से पंपिंग सेट लगाकर पानी भी नहीं खींचा जा सका। सोमवार को मिठनपुरा व बीबीगंज गांधीनगर समेत कई स्थानों पर मोटर पंप लगाकर पानी खींचा जाएगा।

गायघाट के बलौर गांव में कटाव से निकट के घराें पर धारा में विलीन हाेने का खतरा मंडराया

बागमती नदी के जलस्तर में रविवार काे 2 फीट की कमी आने के बाद दहशतजदा कटरा व औराई वासियाें ने राहत की सांस ली है, लेकिन संकट अभी भी बरकरार है। नदी में उफान से कटरा में ध्वस्त बकुची पीपा पुल के दाेनाें छाेर पर पानी का दबाव बना हुआ है। दूसरे दिन पीपा पुल संचालकाें ने दर्जनाें मजदूराें की सहायता से पीपा पुल के दाेनाेंं छाेर पर चचरी डाल कर आवागमन बहाल किया।

हालांकि चारपहिया का परिचालन बंद है। औराई में रविवार की देर रात मधुबन प्रताप में भी चचरी पुल बह गया। परियोजना बांध से अंदर के गांव सहित प्रखंड मुख्यालय जाने के लिए अब केवल नाव का ही सहारा है। गायघाट के बलौर निधि पंचायत के बलौर गांव के समीप ग्राम सुरक्षा बांध में कटाव शुरू हो गया। वहीं पारू के उस्ती गांव में नदी में कटाव से पास में स्थित घराें के धारा में विलीन हाेने का खतरा मंडराने लगा है।

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