पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

2 वर्ष में 3200 की गई जान:मुजफ्फरपुर-पटना रेल जिले में हर दिन औसतन 9 लाेगों की ट्रेन से गिरने-कटने से होती माैत

मुजफ्फरपुर12 दिन पहलेलेखक: धनंजय मिश्र
  • कॉपी लिंक
  • हादसे रोकने को रेल एसपी ने रेलवे बोर्ड को सुझावों संग भेजा प्रस्ताव, कोच में अनाउंसमेंट सिस्टम लगा गेट पर नहीं बैठने व चलती ट्रेन में नहीं चढ़ने-उतरने काे किया जाएगा जागरूक

मुजफ्फरपुर व पटना रेल जिले में दाे वर्षाें के दाैरान 3200 लोगों की मौत ट्रेन से गिरने या कटने से हाे गई। यानी, हर दिन औसतन 9 लाेगों की मौत इससे हुई। इनमें 1400 लोगों की मौत मुजफ्फरपुर रेल जिले और 1800 की पटना रेल जिले में हाे गई। इन हादसों को रोकने के लिए रेल पुलिस ने एडीजी के माध्यम से रेलवे बोर्ड को कई सुझावों के साथ प्रस्ताव भेजा है।

रेल एसपी अशोक सिंह ने चलती ट्रेनों में लोगों को जागरूक करने के लिए सेंट्रलाइज अनाउंसमेंट सिस्टम लगाने का अनुरोध किया है। इसके तहत कोच में बार-बार उद्घोषणा कर यात्रियों को गेट पर नहीं बैठने व चलती ट्रेन में नहीं चढ़ने-उतरने को लेकर जागरूक किया जाएगा। पिछले दिनों गोरखपुर जोन के आरपीएफ आईजी के साथ हुई कोऑर्डिनेशन मीटिंग के बाद यह प्रस्ताव रेलवे बोर्ड को भेजा गया है।

इको साउंड सिस्टम से रुकेगी ऐसी मौत : रेल एसपी
रेल एसपी ने कहा- अभी पर्चे बांट, सघन एस्कॉर्ट समेत कई तरह से यात्रियों को जागरूक किया जा रहा। पर ऐसी मौत बढ़ ही रही। कई यात्री ट्रेन के गेट पर बैठ सफर करते हैं। 24 कोच की ट्रेन में मात्र 4-5 जवान ही एस्कॉर्ट करते हैं। ऐसे में एक साथ सभी बोगियों को टच करना काफी मुश्किल होता है।

वहीं, दिन में चलनेवाली ट्रेनों में एस्कॉर्ट पार्टी नहीं चलती है। ऐसे में कोच में इको साउंड सिस्टम लगा बार-बार उद्घोषणा कर यात्रियों को जागरूक किया जाए तो संभव है कि यात्रियों की मनोस्थिति पर इसका गहरा असर पड़े। वे सुरक्षित रहने के लिए अपनी सीट पर बैठ कर यात्रा करेंगे। इसके अलावा सुरक्षा के लिए अन्य तरीकाें काे लेकर भी सुझाव दिए गए हैं।

डेंजर जोन
इन रेल खंडों पर हुई सबसे ज्यादा मौत

  • मुजफ्फरपुर-हाजीपुर-सिवान रेलखंड
  • दरभंगा-सीतामढ़ी-रक्सौल रेलखंड
  • सुगौली-रक्सौल रेलखंड
  • नरकटियागंज से होते हुए पनियहवा और गोरखपुर
  • हाजीपुर स्टेशन से थावे होते हुए सिवान तक।

यह सेंट्रलाइज अनाउंसमेंट सिस्टम ऐसे करेगा काम
उद्घोषणा के लिए कोच में लगे साउंड सिस्टम का कंट्रोल गार्ड के पास रहेगा। सिस्टम में इलेक्ट्रॉनिक चिप लगा रहेगा, जिससे कोच में बार-बार उद्घोषणा होती रहेगी। इस सिस्टम को लगाने का खर्च भी प्रति ट्रेन मात्र एक से डेढ़ लाख रुपए आने की संभावना है।

रेलवे बोर्ड को भेजे गए प्रस्ताव की प्रमुख बातें

  • सेंट्रलाइज अनाउंसमेंट सिस्टम के जरिए हर कोच में बार-बार की जाएगी उद्घोषणा
  • आबादी वाले इलाकों, ट्रैक से 200 मीटर की दूरी तक वाले छठ घाट, हाट, मेला स्थलों के आसपास बैरिकेडिंग कराने के साथ-साथ जागरूकता अभियान चलाने
  • रेल ब्रिज के बीच-बीच में इमरजेंसी स्पेस देना व शहरी-ग्रामीण क्षेत्रों में रेल लाइन के ऊपर से गुजरने वाले ओवरब्रिज की बैरिकेडिंग

ट्रेन से गिरने या कटने से मौत की वजहें

  • कान में ईयर फोन लगा कर गेट पर बैठना या फिर खड़े होकर यात्रा करना
  • गेट पर बैठ कर सफर करने के दौरान नींद आ जाना
  • अगल-बगल देखे बिना ही रेलवे ट्रैक को पार करना
  • मानवरहित रेल गुमटी पर ट्रेन को देखे बिना पार करना
  • गुमटी पार करते समय ट्रेन की दूरी का अंदाजा न होना
खबरें और भी हैं...