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लापरवाही:जलजमाव के बीच सड़कों के बड़े-बड़े और बेतरतीब बने गड्‌ढे हो गए हैं जानलेवा

मुजफ्फरपुर11 दिन पहले
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फाइल फोटो

शहर में नाला सफाई व पानी की निकासी के नाम पर कराेड़ाें रुपए खर्च किए गए। नगर निगम ने अनेक जगहाें पर नालाें के स्लैब काे ताेड़ दिया। लेकिन, जब कभी बारिश हाेती है ताे शहरवासियाें काे दुर्दशा झेलनी ही पड़ती है। मंगलवार की शाम महज एक घंटे की बारिश में मुजफ्फरपुर स्मार्ट सिटी बारिश व नाले के गंदे पानी का तालाब बन गई। दुकानाें समेत घराें में पानी घुस गया।

कई दुकानदार शटर गिराकर भागे, ताे कई सामान काे सुरक्षित करने में जुटे रहे। शहर के मोतीझील, कल्याणी, केदारनाथ रोड, धर्मशाला चौक, स्टेशन रोड, तिलक मैदान रोड, बनारस बैंक चाैक-पक्कीसराय रोड, पानी टंकी चौक-मिठनपुरा (क्लब) रोड, पंकज मार्केट, बालूघाट, सिकंदरपुर, बीबीगंज अादि इलाकाें में सड़काें पर घुटनाभर ताे गलियाें व घर-दुकानाें में भी पानी घुस गया।

जलजमाव के बीच क्लब राेड व जवाहरलाल राेड समेत कई जगह बेतरतीब बने गड्ढे जानलेवा हो गए हैं। शहर की यह स्थिति तब है जबकि नगर विकास मंत्री ने नगर निगम काे बार-बार चेताया है। यहां तक कि पूर्व नगर आयुक्त मनेष मीणा का यहां से तबादला हाे गया। पिछले माह नए नगर आयुक्त विवेक रंजन मैत्रेय को कमान साैंपी गई। लेकिन, शहरवासियाें काे जलजमाव से निजात नहीं मिल सकी है।

आज नगर निगम बोर्ड की बैठक फिर जाेर-शाेर से उठेगा यह मुद्दा

नगर निगम बोर्ड की बुधवार काे बैठक होनी है। मेयर सुरेश कुमार ने कहा किंजलजमाव का मुद्दा फिर उठेगा। निगम के अधिकारियों को जवाब देना होगा कि यह स्थिति क्यों बनी हुई है। सफाई में लापरवाही हुई है। डिप्टी मेयर मानमर्दन शुक्ला ने कहा कि बोर्ड में जो निर्णय लिया जाता, उस पर अमल नहीं होता। जनप्रतिनिधियों की राय से काम हाेता तो शहर में ऐसी स्थिति नहीं बनती।

वार्ड पार्षद राकेश सिन्हा पप्पू ने कहा कि सर्वाधिक दुर्गति मोतीझील में है। जबकि, यहां नाले की उड़ाही पर काफी राशि खर्च हो चुकी है। वार्ड पार्षद अजय ओझा, संजय केजरीवाल समेत कई अन्य पार्षदाें ने कहा कि जलजमाव काे लेकर पार्षदों को जिल्लत झेलनी पड़ रही है। इसका स्थाई समाधान होना चाहिए।

बाेले नगर आयुक्त- नालों की बनावट में गड़बड़ी से ये स्थिति

हाल में कमान संभाले नगर आयुक्त विवेक रंजन मैत्रेय का कहना है कि नालाें की जो बनावट यहां है, उससे यह स्थिति है। नालाें की आपस में कनेक्टिविटी नहीं है। इनके क्षमता से काफी छोटे होने से पानी नहीं निकल रहा। तोड़फोड़ से बहुत काम नहीं होगा। जब तक शहर को जल निकासी के लिए बड़ा प्रोजेक्ट नहीं मिलेगा, परेशानी बनी रहेगी।

वैसे अमृत योजना के तहत स्टाॅर्म वाटर ड्रेनेज के लिए 30 करोड़ रुपए मिले हैं। इसका आज ही मुझे पत्र मिला है। इससे ड्रेनेज के काम में तेजी लाई जाएगी। वैसे तेजी से पानी निकालने का प्रयास किया जा रहा है। कम समय में ही बहुत ज्यादा बारिश होने से भी इतना जलजमाव हुआ है।

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