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निगम बोर्ड की बैठक में हंगामा:चुनावी माहौल के बीच ढाई-ढाई करोड़ रुपए से सभी वार्ड में निर्माण का फैसला, यूजर चार्ज लेने का विरोध

मुजफ्फरपुरएक महीने पहले
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सोमवार को निगम बोर्ड की बैठक में धरने पर बैठे पार्षद संजय केजरीवाल, अजय ओझा, नंद कुमार प्रसाद साह, केपी पप्पू व अन्य। - Dainik Bhaskar
सोमवार को निगम बोर्ड की बैठक में धरने पर बैठे पार्षद संजय केजरीवाल, अजय ओझा, नंद कुमार प्रसाद साह, केपी पप्पू व अन्य।

शहर की सरकार की आखिरी बोर्ड की बैठक का आगाज सोमवार को हंगामा के साथ शुरू हुआ। सोशल मीडिया पर कुछ पार्षद को नगर आयुक्त का दलाल कहने पर बवाल की आशंका पर मेयर काे खेद प्रकट करना पड़ा। फिर पेयजल आपूर्ति की व्यवस्था को दुरुस्त करने के लिए पूरे शहर में पाइप लाइन विस्तार का नगर निगम बोर्ड ने फैसला भी लिया।

चुनावी आहट के बीच सौगात की बौछार करते हुए नगर निगम बोर्ड ने शहर के सभी वार्ड में ढाई-ढाई करोड़ रुपए से कच्ची गली-नाली, कंक्रीट की सड़क व नाला बनाने का एजेंडा पास किया। नगर निगम बोर्ड की बैठक में उप नगर आयुक्त के अलावा किसी पदाधिकारी के नहीं रहने पर मेयर ने आपत्ति जताई। मेयर ने नगर निगम बोर्ड की बैठक में प्रत्येक वार्ड में 2-2 करोड़ से 3-3 योजना का एजेंडा लाया।

उप नगर आयुक्त ने बताया कि इतनी राशि निगम के फंड में नहीं है। वार्ड-6 के पार्षद जावेद अख्तर गुड्डू ने यह तरकीब निकाली कि चुनाव में अभी तीन-चार माह का समय लगेगा। दो-दो करोड़ से योजना की स्वीकृति रहने पर आगे किसी तरह की परेशानी नहीं होगी। स्टैंडिंग के मेंबर राजीव कुमार पंकू व जावेद अख्तर ने निगम मद से प्रत्येक वार्ड में 25-25 लाख से कंक्रीट सड़क व नाला बनाने के एजेंडे को 50 लाख करने का प्रस्ताव दिया।

वार्ड-29 की पार्षद रंजू सिन्हा, वार्ड-13 की पार्षद सुनीता भारती समेत कई पार्षदों ने पानी की समस्या उठाई। कर्मचारियों को अंतर वेतनमान देने के लिए सहमति। मेयर द्वारा निगम कर्मचारियों को समान काम समान वेतन देने का प्रस्ताव लाया गया।

इस प्रस्ताव पर उप नगर आयुक्त ने न्यायालय के निर्णय के अनुसार बोर्ड को निर्णय लेने का सुझाव दिया। वार्ड-14 के पार्षद रतन ने कहा कि 3 घंटे से ज्यादा कोई सफाईकर्मी काम नहीं करता। वार्ड-23 के पार्षद राकेश सिंह पप्पू ने पटना की तरह दोनों पालियों में सफाई कर्मचारी रखने का सुझाव दिया।

कार्यकाल की अंतिम निगम बोर्ड की बैठक में दलाल लिखा शर्ट पहन कर पहुंचे केजरीवाल

9 जून को सभी पार्षदों, डिप्टी मेयर व मेयर का कार्यकाल समाप्त हो रहा है। वार्ड पार्षद संजय केजरीवाल शर्ट के आगे पीछे दलाल लिखवाकर पहुंचे। वार्ड-30 की पार्षद सुरभि शिखा ने वेल में जाकर आरोप लगाया कि सोशल मीडिया पर मेयर ने पार्षदों को नगर आयुक्त का दलाल कहा। शिखा के धरना पर बैठते ही पार्षद संजय केजरीवाल, अजय ओझा, नंद कुमार प्रसाद साह, केपी पप्पू समेत 8 पार्षद धरने पर बैठ गए। मेयर ने माफी मांगी, तब मामला शांत हुआ।

मीडिया को संजय केजरीवाल ने बताया कि 19 को बोर्ड की बैठक के बाद एक पोस्ट मेयर के फेसबुक अकाउंट पर आया। इसमें उन्होंने अंतिम लाइन में कुछ पार्षदों को नगर आयुक्त का दलाल कहा। मैंने खुद दलाल लिखा कपड़ा पहन कर विराेध जताया।

तीन पार्षदों को छोड़कर सभी ने यूजर चार्ज का किया विरोध

निगम प्रशासन की ओर से प्रत्येक हाउस होल्डर से 30 रुपए महीना यूजर चार्ज की वसूली शुरू की गई है। मेयर ने इसका विरोध करते हुए कहा कि जो भी इस टैक्स के समर्थन में हैं, वह अपनी बात रखें। पार्षद केपी पप्पू ने कहा कि यूजर चार्ज निदान के समय भी लिया जाता था। यूजर चार्ज लगना चाहिए। पार्षद संतोष महाराज और पार्षद अजय ओझा ने भी समर्थन किया। पार्षद राकेश सिन्हा पप्पू ने कहा कि जिन पार्षदों ने यूजर चार्ज व पानी शुल्क लगाने की बात कही है, चुनाव में जनता उनको जवाब देगी।

पिछली बोर्ड की बैठक को मेयर ने अवैध ठहराया, फिर प्रोसीडिंग का मामला फंसेगा

5 मई की बैठक को मेयर ने अवैध करार देते हुए केवल बजट की संपुष्टि की। इस फैसले से 5 मई की बैठक के दौरान जो कुछ भी स्वीकृत हुआ, वह तकनीकी रूप से आगे फंसेगा। मेयर की नाराजगी 5 मई को बोर्ड की बैठक समाप्त करने के बाद पार्षद नंदकुमार साह की अध्यक्षता में बैठक करने को लेकर है। 5 मई की बैठक की संपुष्टि नहीं होने से निगम प्रशासन व मेयर में आगे भी तकरार जारी रहेगा।

भले ही बोर्ड की बैठक में नगर आयुक्त शामिल नहीं हुए, लेकिन, बोर्ड की बैठक कर निगम में लौटने के बाद नगर आयुक्त विवेक रंजन मैत्रेय ने मेयर कक्ष में काफी देर तक बात की। मेयर व नगर आयुक्त के बीच क्या कुछ बात हुई, इस पर सस्पेंस अभी कायम है। लेकिन, निगम के जानकारों का कहना है कि 5 मई की बैठक की संपुष्टि नहीं होने से सोमवार को जो निगम बोर्ड की बैठक हुई, उसकी भी प्रोसीडिंग आगे जल्दी नहीं निकल सकेगी।

'पिछले 5 साल के कार्यकाल की संभवत: यह आखिरी निगम बोर्ड की बैठक थी। पार्षदों को अगले दो-चार माह में चुनाव में जनता के बीच जाना है। चंद पार्षद की मंशा कुछ अलग थी। मैंने किसी पार्षद को दलाल नहीं बोला। बैठक में जो हंगामा कराना चाहते थे, उनके मंसूबों को शहर समझ रहा है। मेरे खेद जताने से शहर का डेवलपमेंट नहीं रुके, तो मुझे इसमें कोई आपत्ति नहीं।'

-राकेश कुमार पिंटू, मेयर

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