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जेल में कोरोना वैक्सीनेशन:बंदियों के टीकाकरण में बाधा, मोबाइल-आधार न होने से नहीं मिल रही इजाजत

मुजफ्फरपुरएक महीने पहलेलेखक: शैलेश कुमार
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  • मुजफ्फरपुर जेल के 800 बंदी 45 वर्ष से अधिक उम्र के : जेलर ने नंबर देने में जताई असमर्थता ताे सदर अस्पताल प्रबंधन ने कहा- तब ताे एंट्री ही नहीं लेगा कंप्यूटर
  • जेल महकमा व स्वास्थ्य विभाग ने मुख्यालय के निर्णय पर छाेड़ा बंदियाें के वैक्सीनेशन का मामला

बिहार के विभिन्न केंद्रीय व मंडल कारा के बंदियों का काेराेना वैक्सीनेशन मोबाइल नंबर व आधार कार्ड नहीं हाेने की वजह से फंस रहा है। वैक्सीन लेने के लिए इन नंबराें की कंप्यूटर में एंट्री अनिवार्य है, जबकि जेल में मोबाइल रखना प्रतिबंधित। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि 45 वर्ष से ज्यादा उम्र वाले बिहार की विभिन्न जेलाें में बंद 25 हजार बंदियों को आखिर कैसे लगेगा काेराेना टीका? इस बाबत जेल आईजी मिथिलेश मिश्र का कहना है कि मामला गंभीर है। संज्ञान में भी बात आई है। स्वास्थ्य विभाग काे पत्र लिख रहे हैं। 45 साल से ज्यादा उम्र के बंदियों को टीका लगना अनिवार्य है।

यह समस्या तब सामने आई जब शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा मुजफ्फरपुर के जेल अधीक्षक राजीव कुमार ने बंदियों के टीकाकरण की पहल की। जेलर सुनील मौर्य ने सदर अस्पताल के प्रबंधक से कहा कि यहां सेंट्रल जेल के 1700 बंदियों में 800 से ज्यादा की उम्र 45 वर्ष से अधिक है। ऐसे में उनका टीकाकरण करा दिया जाए। अस्पताल प्रबंधन ने सभी बंदियों के नाम, मोबाइल नंबर व आधार नंबर मांगे।

जेलर ने बताया कि बंदियाें के पास ताे मोबाइल होता ही नहीं। गिरफ्तारी के समय आधार कार्ड लेकर भी कोई बंदी जेल नहीं आता। ऐसे में ये दाेनाें देना संभव नहीं है। विकल्प के ताैर पर बंदियाें के वारंट की सर्टिफाइड कॉपी दी जा सकती है। जबकि, अस्पताल प्रबंधन का कहना है कि कंप्यूटर में बगैर मोबाइल व आधार नंबर के एंट्री ही नहीं लेगा‌। ऐसे में स्वास्थ्य विभाग व जेल महकमा दोनों ने अपने -अपने हेडक्वार्टर पर बंदियों के वैक्सीनेशन का मामला छोड़ दिया है।

पूरे सूबे में मुलाकाती पर है प्रतिबंध
वैश्विक महामारी कोरोना की वजह से पिछले एक साल से पूरे बिहार में मुलाकाती पर प्रतिबंध है। जेल को कोरोना संक्रमण से बचाने के लिए एहतियातन कई कदम उठाए गए हैं। गिरफ्तारी के बाद अब सीधे कोई भी शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा समेत अन्य जेल में नहीं भेजा जाता। उन सबके लिए अलग-अलग कैंप जेल में बना हुआ है। 14 दिन की अवधि कैंप जेल में पूरा करने के बाद ही संबंधित वार्ड में ट्रांसफर किया जा रहा है।

और बंदियों को टीका इसलिए भी जरूरी

  • शहीद खुदीराम बोस केंद्रीय कारा, मुजफ्फरपुर के 200 मीटर के इर्द-गिर्द आधा दर्जन संक्रमित हैं, एक महिला की मौत भी हो चुकी है
  • इस सेंट्रल जेल में 1700 बंदी हैं और सभी एक ही अहाते में रहते हैं। एक बंदी के पॉजिटिव होने पर स्थिति संभालनी मुश्किल होगी।
  • 55 हजार से ज्यादा बंदी राज्य की विभिन्न जेलाें में हैं। एक वार्ड में 40-50 बंदी रहते हैं। यहां सोशल डिस्टेंसिंग की बात बेमानी है।
  • जेल में सुरक्षाकर्मी, ठेकेदार व स्टाफ भी जाते हैं। इनका बाजार व अपने घर भी आना-जाना रहता है। इससे संक्रमण फैल सकता है।

इधर, गिरफ्तारी के बाद पॉजिटिव निकल रहे आरोपित पुलिस के लिए सिरदर्द

3 दिन पहले करजा थाने की पुलिस ने 3 मोटरसाइकिल चोर को गिरफ्तार किया था। जेल भेजने के पहले तीनों की सदर अस्पताल में जांच कराई गई। तीनों कोरोना पॉजिटिव निकले। आखिरकार उन्हें जेल की जगह एसकेएमसीएच में रखा गया। तीनों पर निगरानी के लिए थाने से 4 चौकीदाराें की तैनाती की गई है। थाना हाजत को सैनिटाइज कराया गया। इसी तरह बुधवार को पकड़ा गया दुष्कर्म का आरोपी भी सदर अस्पताल में हुई जांच में काेराेना पॉजिटिव निकला। एसकेएमसीएच प्रशासन ने कहा कि गंभीर स्थिति नहीं होने के कारण हम अपने यहां भर्ती नहीं कर सकते। देर शाम तक पुलिस व अस्पताल प्रबंधन में इसे लेकर विवाद चलता रहा।

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