खुदीराम की थी अंतिम इच्छा:फांसी की सजा के पहले कहा था- घर के सामने स्थित मां सिद्धेश्वरी मंदिर का प्रसाद चाहिए

मुजफ्फरपुरएक महीने पहले
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खुदीराम बोस का शहादत दिवस मनाने के लिए बंगाल से पहुंचे उनके गांव के लोग। - Dainik Bhaskar
खुदीराम बोस का शहादत दिवस मनाने के लिए बंगाल से पहुंचे उनके गांव के लोग।

30 अप्रैल 1908 को जज डगलस किंग्स फोर्ड की बग्घी को बम से उड़ाने के बाद गिरफ्तार पश्चिम बंगाल के खुदीराम बाेस काे महज तीन माह की सुनवाई में अंग्रेज जज ने फांसी की सजा सुनाई। 11 अगस्त 1908 काे हंसते-हंसते बहुत कम उम्र में खुदीराम बाेस फांसी के फंदे काे चूमते हुए देश के लिए अपनी शहादत दी। 11 अगस्त की सुबह चार बजे सेल में माल्यार्पण करने के साथ फांसी स्थल पर श्रद्धासुमन अर्पित करने के लिए खुदीराम बाेस के गांव से प्रकाश हलधर समेत आठ लाेगाें का जत्था मंगलवार की रात शहर पहुंचा।

यह जत्था इस बार खुदीराम बाेस की अंतिम इच्छा पूरी करने के लिए मां सिद्धेश्वरी स्थान का पेड़ा व खुदीराम बाेस की जन्मस्थली से मिट्टी लेकर पहुंचा है। श्रद्धांजलि के दाैरान इन दाेनाें काे खुदीराम बाेस काे अर्पित किया जाएगा।

खुदीराम के घर के ठीक सामने है सिद्धेश्वरी काली मंदिर
पश्चिम बंगाल के मिदनापुर से पहुंचे प्रकाश हलधर ने बताया कि जज ने जब खुदीराम बाेस काे फांसी की सुनाई। उसके पहले उससे अंतिम इच्छा पूछा। खुदीराम बाेस ने पश्चिम बंगाल के मिदनापुर के हबीबपुर स्थित अपने घर के सामने मां काली स्थान का प्रसाद,जन्मस्थली की मिट्टी व अपने बहन से मिलने की इच्छा जतायी। अंग्रेज हुकूमत इन तीनाें में किसी भी इच्छा काे पूरा नहीं कर सका।

मिदनापुर के हबीबपुर में हुआ था जन्म
प. बंगाल के मिदनापुर के हबीबपुर गांव में 3 दिसंबर 1889 को खुदीराम बाेस का जन्म हुआ था। आचार्य चंद्र किशाेर पराशर बताते है कि 1906 में अंग्रेजों ने खुदीराम बाेस काे बंगाल विभाजन के खिलाफ हुई रैली से गिरफ्तार किया। पिटाई कर उन्हें छाेड़ दिया। फिर उन्हाेंने बम बनाना सीखा और अगले ही साल 1907 में बंगाल के गवर्नर पर बम से हमला किया। जनवरी 1908 में दो अंग्रेज अधकिारियों पर बम फेंक कर फरार हो गए। इसके कुछ ही महीनों बाद कंपनीबाग में 30 अप्रैल 1908 को जज डगलस किंग्सफोर्ड की बग्घी को बम से उड़ाने के बाद शहीद खुदीराम बाेस की गिरफ्तारी हुई।

हालांकि बम फेंकने के बाद खुदीराम बोस और प्रफुल्ल को लगा था कि उन्होंने किंग्सफोर्ड को मार दिया है, लेकिन बाद में पता चला कि इस बग्घी में उनकी जगह ब्रिटेन के एक बैरिस्टर प्रिंगल केनेडी की पत्नी और बेटी बैठी थीं। इस हमले में दोनों की मौत हो गई थी। बम हमला में साइस व घाेड़ा भी दम ताेड़ दिया। 3 महीने बाद 11 अगस्त को महज 18 साल की उम्र में मुस्कुराते हुए उनकाे फांसी पर चढ़ा दिया गया।

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