जेल प्रशासन और सदर अस्पताल के डॉक्टर आमने-सामने:मुजफ्फरपुर में एक कैदी को डिस्चार्ज करने का मामला फंसा, 25 दिन से सदर अस्पताल में पड़ा है कैदी

मुजफ्फरपुर5 महीने पहले
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मुजफ्फरपुर में एक कैदी को डिस्चार्ज करने का मामला फंसा। - Dainik Bhaskar
मुजफ्फरपुर में एक कैदी को डिस्चार्ज करने का मामला फंसा।

मुजफ्फरपुर जेल प्रशासन और सदर अस्पताल के डॉक्टर आमने-सामने हो गए हैं। दरअसल मामला एक कैदी भोला मंडल का है। उसे पेशाब के रास्ते से खून आने पर गत साल नवंबर में सेंट्रल जेल से सदर अस्पताल में भर्ती कराया गया था। 30 दिसम्बर को उसे सदर अस्पताल से SKMCH रेफर कर दिया गया। उसकी सुरक्षा में तैनात जिला पुलिस बल के हवलदार पप्पू कुमार ने जेल प्रशासन को इससे अवगत कराया। रेफर वाला कागज़ात भी सौंप दिया गया। इसके बाद जेल प्रशासन ने SSP को पत्र लिखकर फोर्स की मांग की। ताकि उस कैदी को SKMCH रेफर किया जा सके।

इसके ठीक अगले दिन सदर अस्पताल के एक डॉक्टर ने गार्ड को कहा कि उसे रेफर करने की ज़रूरत नहीं है। वह स्वस्थ्य है। रिपोर्ट भी सब ठीक है। उसे जेल दोबारा भेज दें। लेकिन, ये जानकारी जेल प्रशासन तक नहीं पहुंची। अब पिछले 25 दिन से वह कैदी ऑन रिकॉर्ड कहीं नहीं है। न तो उसका जेल की डायरी में मेंटेन है और न सदर अस्पताल की डायरी में। यानी कहें तो वह ट्रेसलेस है। अब दो दिन पूर्व इसका पता जेल प्रशासन को चला।

उन्होंने अस्पताल प्रबन्धन से बात की। कहा कि सेम डेट में डिस्चार्ज का कागज़ बनाकर दें। तब उसे लेकर जाएंगे। अस्पताल प्रबंधन अड़ गया कि सेम डेट में नहीं देंगे। अब आलम ये है कक आज 25 दिन बितने के बाद वह सदर अस्पताल के कैदी वार्ड में पड़ा हुआ है। उसकी सुरक्षा में 24 घन्टे जिला पुलिस बल के चार जवान मुस्तैद हैं। वहीं हवलदार पप्पू कुमार ने कहा कि डिस्चार्ज की जानकारी नही है। रेफर की सूचना और कागज़ जेल प्रशासन को दे दिया गया था।

FIR दर्ज कराने की कही बात

इस मामले पर भास्कर से बात करते हुए जेल उपाधीक्षक सुनिल कुमार मौर्य ने कहा कि इसमें पूरी तरह से सिपाहियों की लापरवाही है। जब डॉक्टर ने उसे बताया दिया था तो फिर उसने क्यों नही सूचना दी। उन्होंने कहा कि कैदी से मिलकर ये लोग ऐसा करते हैं। जेल प्रशासन उन सिपाही या हवलदार पर FIR भी दर्ज करा सकती है। अब जबतक उन्हें सेम डेट में डिस्चार्ज के कागजात नहीं मिलेंगे। वह उस कैदी को कैसे ले जा सकते हैं।

सिविल सर्जन ने मांगी रिपोर्ट

मामले को सिविल सर्जन डॉ. विनय शर्मा के भास्कर को बताया कि मामले मेरे संज्ञान में नहीं है। लेकिन अस्पताल उपाधीक्षक से रिपोर्ट लेते हैं कि क्या मामला है। अक्सर ऐसे मामले में सिपाही और कैदी मिल जाते हैं। फिर जानबूझकर अस्पताल में पड़े रहते हैं। इसकी शिकायत भी पुलिस अधिकारी से की जाएगी। कागजात की बात है तो इसे देखते हैं। कौन डॉक्टर इलाज़ में थे उसकी भी जानकारी ले रहे हैं।

सात साल की सजा काट रहा भोला

भोला मंडल मूल रूप से सीतामढ़ी जिले के सुरसंड थानां के मतौना का रहने वाला है। पांच साल पूर्व उसकी बहु की मौत हुई थी। उसका लाश फंदे से झुलता हुआ मिला था। बहु के मायके वाले ने दहेज हत्या का केस करा दिया। पिछले दो साल से जेल में बंद हैं। सात साल की सजा उन्हें कोर्ट ने सुनाई थी। इधर तबियत खराब होने पर अस्पताल में भर्ती हुए थे।

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