मुजफ्फरपुर 'अंखफोड़वा कांड' में खुलासा:बिना एग्रीमेंट के चल रहा था आई हॉस्पिटल, 31 मार्च को ही समाप्त हो गया था करार

मुजफ्फरपुर8 महीने पहले
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इसी जगह हुआ था मरीजों का ऑपेरशन। बेड और रूम का वीडियो-फोटो बनाते अधिकारी। - Dainik Bhaskar
इसी जगह हुआ था मरीजों का ऑपेरशन। बेड और रूम का वीडियो-फोटो बनाते अधिकारी।

मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल की मुश्किलें दिन-प्रतिदिन बढ़ती जा रही है। फिलहाल उसे कहीं से राहत मिलता नहीं दिख रहा है। इसी बीच हॉस्पिटल के बारे में एक और चौंकाने वाली बात सामने आई है। बताया जा रहा है कि यह अस्पताल बिना एग्रीमेंट के ही चल रहा था। इसी साल 31 मार्च को जिला स्वास्थ्य समिति से इसका एग्रीमेंट समाप्त हो चुका था। इसके बाद अबतक दोबारा एग्रीमेंट नहीं कराया गया।

एग्रीमेंट समाप्त होने की जानकारी सिविल सर्जन को भी नहीं दी गई थी। और बिना एग्रीमेंट के ही अस्पताल में ऑपेरशन किया जा रहा था। इस संबंध में CS डॉ. विनय शर्मा ने कहा- "बिना एग्रीमेंट के भी कैंप लग सकता है। लेकिन, इसकी जानकारी देना आवश्यक है। उन्होंने कहा कि जितने भी आंख के आपरेशन करने वाली संस्था है, उनकी जांच होगी। टीम जाकर वहां पर जांच करेगी।"

अन्य मरीजों को भी आ रही समस्या
शुक्रवार को ऑपरेशन के बाद आंख की समस्या के 4 मामले सिविल सर्जन के पास आए। इन मरीजों ने CS को कहा कि उनका ऑपरेशन 22 नवबंर से पहले हुआ था। अब तक आंखों की रोशनी नहीं आई है। पकड़ीदयाल मोतिहारी से आए राम अवतार शर्मा ने कहा कि उसका ऑपरेशन 22 नवबंर को हुआ था। अब आंख में जलन हो रही है। पानी भी निकल रहा है और दिखायी देना बंद हो गया है।

सीएस ने सदर अस्पताल में आंख की सर्जन डॉ. नीतू कुमारी को दिखाया तो उन्होंने पटना भेजने की सलाह दी। इसके बाद उसे सदर अस्पताल के एक वार्ड में भर्ती किया गया। उन्हें शनिवार यानी आज पटना भेजा जायेगा। इधर, सुमेरा कुढ़नी के अकलू राम ने कहा कि 23 नवबंर को उसका ऑपरेशन हुआ था। अब आंख से दिखायी देना बंद हो गया है। वह निजी अस्पताल में इलाज करा रहा है। कांटी कोठिया के पुदेनी पासवान को भी आंख से दिखना बंद हो गया हैं। उसका 8 अक्टूबर को मोतियाबिंद का ऑपरेशन हुआ था। इन मरीजों को शनिवार को SKMCH में भेजकर इलाज किया जाएगा।

चौतरफा घिरा आई अस्पताल
मुजफ्फरपुर आई हॉस्पिटल चौतरफा घिर चुका है। जांच के हर पहलू पर प्रबंधक की लापरवाही सामने आई है। चाहे वह वार्ड की स्थिति हो या किचेन की। राज्य स्तरीय टीम भी जब वहां पहुंची थी तो हालात देखकर दंग रह गई। राज्यस्तरीय टीम ने कहा था कि ऐसे तो जानवरों को भी नहीं रखा जाता। जैसे यहां पर मरीजों को रखा गया है। इससे साफ है कि राज्य स्तरीय टीम की रिपोर्ट के आधार पर सरकार बड़ी कार्रवाई कर सकती है।

16 लोगों का निकाला जा चुका आंख
बता दें कि CS ने अब तक 16 लोगों की आंखें निकालने की पुष्टि की है। वहीं चार पीड़ितों को गंभीर होने पर भर्ती किया गया है। जबकि, 4 की आंख का ऑपरेशन गुरुवार को किया गया। वहीं आंख की रोशनी चले जाने की समस्या को लेकर 4 नए मरीज शुक्रवार को सदर अस्पताल पहुंचे।

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