अधूरी तैयारी:खतरनाक नदी घाटों पर अबतक न बैरिकेडिंग हुई, न ही सफाई; जहां-तहां बिखर रही विसर्जित पूजन सामग्री

मुजफ्फरपुरएक महीने पहले
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सीढ़ी घाट : दीपावली के बाद पूजन सामग्री नदी में विसर्जित करने से घाट किनारे बिखरी हुई। - Dainik Bhaskar
सीढ़ी घाट : दीपावली के बाद पूजन सामग्री नदी में विसर्जित करने से घाट किनारे बिखरी हुई।

महज 5 दिनों के बाद छठ महापर्व का पहला अर्घ्य दिया जाएगा। ऐसे में निगम प्रशासन के पास घाट तैयार करने, साफ-सफाई व बैरिकेडिंग के लिए महज चार दिन ही बचा है। लेकिन, शहर के किसी भी घाट पर तैयारी ऐसी नहीं है कि लोग बेफिक्र हो कर छठ पर्व कर सकें।

पिछले दिनों डीएम ने दीपावली के पहले सभी छठ घाट को तैयार करने का आदेश दिया था। लेकिन, आदेश कागज से आगे नहीं बढ़ सका। शुक्रवार को दैनिक भास्कर टीम ने शहर के प्रमुख छठ घाटों सिकंदरपुर सीढ़ी घाट, अखाड़ाघाट व आश्रमघाट का जायजा लिया। तीनों में से किसी भी घाट पर छठ पर्व की तैयारी को लेकर गंभीरता नहीं दिखीं।

आश्रम घाट : पिछले वर्ष नदी किनारे खोदे गड्ढे को अबतक नहीं भरा गया
आश्रमघाट में नमामि गंगे प्रोजेक्ट के तहत घाट बनाने के लिए पिछले साल खोदा गया गड्ढा अबतक नहीं भरा गया है। 2 दिनों से आश्रमघाट पर कोई काम नहीं हो रहा। अब तक बांस-बल्ले भी नहीं लगे। गोताखोर मुन्ना सहनी ने बताया कि घाट की स्थिति बहुत खतरनाक है। नदी किनारे 10 फीट गहरा गड्ढा है। कार्तिक माह में रोज सुबह महिलाएं स्नान करने आती हैं।

अखाड़ाघाट : कचरा से पटा है घाट 3 दिनों से घाट बनाने का काम बंद
अखाड़ाघाट फिर कचरे से पट गया है। शुक्रवार को दिनभर लोग दीपावली की पूजन सामग्री का नदी में विसर्जन करने पहुंचते रहे। यहां फिर से साफ-सफाई करने की जरूरत है। तीन दिनों से छठ घाट बनाने का कोई काम नहीं हो रहा है। सोमवार से छठ व्रत शुरू हो जाएगा। लेकिन, प्रशासन की तरफ से अब तक घाट की बैरिकेडिंग भी नहीं शुरू की गई है।

सीढ़ी घाट : फिर करनी होगी सफाई अभी बैरिकेडिंग की चल रही तैयारी
दीपावली की पूजन सामग्री के नदी में विसर्जन के कारण यहां भी सफाई की जरूरत है। खतरनाक घाट होने के बावजूद अब तक बैरिकेडिंग का काम नहीं शुरू हो सका है। शुक्रवार को बांस-बल्ला ही गिराया गया है। स्थानीय लोगों का कहना है कि महज अब चार दिन बचे हैं। इसके बावजूद अब तक घाट तैयार हुआ नहीं हुआ। जबकि शहर में सबसे ज्यादा भीड़ इसी घाट पर जुटती है।

लबालब भरे पानी और दलदल से खतरा

शहरी क्षेत्र के 32 समेत जिले के 216 छठ घाट खतरनाक घोषित
जिले के 216 नदी घाट व तालाबों के किनारे इस बार छठ महापर्व मनाना मुश्किल है। इसमें 32 घाट शहरी क्षेत्र के हैं। सीओ की रिपोर्ट पर डीएम प्रणव कुमार ने इन सभी घाटाें काे खतरनाक घाेषित करते हुए इन घाटों पर निजी नावाें के परिचालन पर राेक लगाने और सरकारी स्तर पर नाव, नाविक व गोताखोर की व्यवस्था करने को कहा है।

अपर समाहर्ता आपदा प्रबंधन डा. अजय कुमार काे संवेदनशील घोषित छठ घाटाें की माॅनिटरिंग का टास्क सौंपा गया है। शहरी क्षेत्र के 32 छठ घाट, सकरा के 73, कुढ़नी के 14, सरैया के 9, मीनापुर के 8, कटरा के 11, औराई के 18, बंदरा के 14, गायघाट के 12, कांटी के 5, साहेबगंज के 1, माेतीपुर के 2, बाेचहां के 1 तथा पारू के 2 घाटाें काे सीओ ने खतरनाक घाट के रूप में चिह्नित किया है। इस साल हुई अत्यधिक बारिश के कारण नदी-तालाब किनारे के अधिकतर घाट लबालब हैं अथवा दलदल है।

2 साल पहले तक तालाब में भरना पड़ता था पानी, इस बार निकालने की नौबत
दो साल पहले तक छठ मनाने के लिए अधिकतर तालाब-पोखरों में पंप से पानी डालना पड़ता था। इस साल अत्यधिक बारिश के कारण स्थितियां बदली हुई हैं। वर्ष 2019 तक जिले में सामान्य से काफी कम बारिश हाेने तथा अंतिम समय में कम बारिश हाेने से अधिकतर तालाबों में पानी काफी कम रहता था।

इसकाे देखते हुए छठ से पूर्व माेटर से पानी भरा जाता था। पिछले वर्ष भी सामान्य बारिश 1200 मिमी के मुकाबले 1695 मिमी बारिश हाेने के कारण वर्षाें से सूखे तालाब-पोखरों में पानी भरा था। इस वर्ष भी अबतक 1701 मिमी बारिश हाे चुकी है। जिसे कारण अधिकतर तालाब पानी से लबालब हैं।

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