11 सदस्यीय टीम पहुंची शहर:राज्य में ध्वनि प्रदूषण का स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव और बढ़ रहे बहरेपन पर एनआईटी पटना ने शुरू किया शाेध

मुजफ्फरपुर16 दिन पहले
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ध्वनि प्रदूषण पर शोध करने इमलीचट्टी स्टैंड पहुंची पटना एनआईटी की टीम। - Dainik Bhaskar
ध्वनि प्रदूषण पर शोध करने इमलीचट्टी स्टैंड पहुंची पटना एनआईटी की टीम।

राज्य में ध्वनि प्रदूषण का लाेगाें के स्वास्थ्य पर पड़ रहे प्रतिकूल प्रभाव व बढ़ रहे बहरापन पर राष्ट्रीय प्राैद्याेगिकी संस्थान (एनआईटी) पटना की टीम ने शाेध शुरू किया है। संस्थान के वास्तुकलाऔर याेजना विभाग की टीम पहले फेज में पटना, मुजफ्फरपुर व गया के बस अड्डाें पर सर्वे करेगी। इसे लेकर 11 सदस्यीय टीम शनिवार काे मुजफ्फरपुर पहुंच इमलीचट्टी बस स्टैंड से इसकी शुरुआत की।

टीम ने स्टैंड व उसके आसपास रह रहे लाेगाें, ठेला-खाेमचा वालाें, बस स्टाफ समेत स्टैंड में काम करनेवाले अन्य कर्मियाें से पूछताछ कर डेटा संग्रह शुरू किया है। इन सबसे यह जानने का प्रयास कर रही है कि सुबह से शाम तक तेज आवाज, हाॅर्न आदि से उनके कान कितने प्रभावित हाे रहे हैं। टीम अलग-अलग 10 जगह जाएगीऔर सर्वे कर पूरी रिपाेर्ट एनआईटी-पटना के वास्तुकला व याेजना विभाग काे साैंपेगी।

हर घंटे ध्वनि प्रदूषण का डाटा जुटा रही टीम

टीम यह जानने का प्रयास कर रही कि ऐसे इलाकाें में हर घंटे कितने डिसेबल ध्वनि प्रदूषित हाे रही। सुप्रिया कुमारी के नेतृत्व में पहुंचे टीम के सदस्याें राहुल बाडेकर, ऋषिकेश आनंद, शाेमित वैद्य, शुभराज शर्मा, आकाश मित्रा, रुपेश, शशांक, रुचि रश्मि, अलका साेमी, प्रतीक कुमार ने शनिवार सुबह 6 बजे से शाम 5 बजे तक सर्वे किया। सुबह 7 से 8 बजे 92, दाेपहर 3 से 4 बजे 76 डिसेबल ध्वनि प्रदूषण मिला। जबकि, विश्वकर्मा पूजा हाेने के कारण आधे से भी कम वाहन चले। सुप्रिया कुमारी ने बताया कि दाे दिनाें तक सर्वे करना है।

100 से अधिक डेसेबल की साउंड से होता है बहरापन

गाड़ियाें के तेज हाॅर्न, पटाखे या अन्य तेज आवाज से कान के पर्दे के पीछे की चेन डैमेज हाे जाती हैं। इससे बहरेपन की समस्या हाेती है। आवाज हवा के कंपन से हाेकर कान तक पहुंचता है। यदि यह निर्धारित डेसेबल से अधिक हाेता है ताे जिनकी चेन पहले से कमजाेर हाेती है वे शीघ्र बहरेपन के शिकार हाेते हैं। लेकिन, जिनके कान मजबूत हाेते हैं उन्हें धीरे-धीरे प्रभाव पड़ता है। लेकिन, हर दिन तेज ध्वनि सुनने से दाे साल में काेई भी पूरी तरह बहरेपन का शिकार हाे सकता है। सबसे अधिक डीजे बजने व बिजली गिरने से बहरापन की समस्या आती है। इसका डेसेबल 100 से अधिक हाेता है। 100 से अधिक डेसेबल का हाई पिक साउंड सुनने से ग्रेजुअल डीफनेस हाेता है। इसका पता एक साल बाद चलता है।

-डाॅ. बीएल सिंधानिया, कान-नाक व गला राेग विशेषज्ञ।

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