झाेले में अस्पताल:डिग्री-लाइसेंस नहीं, लेकिन डाॅक्टर साहब बनकर सर्जरी तक कर रहे

मुजफ्फरपुर6 दिन पहले
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केरमा स्थित सेवा सदन। - Dainik Bhaskar
केरमा स्थित सेवा सदन।

सकरा में इलाज के नाम पर महिला की दाेनाें किडनी निकालने की घटना के बाद स्वास्थ्य सिस्टम पर बड़ा सवाल खड़ा हाे गया है। स्वास्थ्य विभाग ने कार्रवाई के नाम पर पड़ताल ताे शुरू की है, लेकिन अब तक जिंदगी से खिलवाड़ काे राेक नहीं पाया है। जिले में काेई बीमार पड़े ताे उसकी जान बच जाए बड़ी बात है। खासकर ग्रामीण इलाकाें में ताे हर बीमार की जान खतरे में है।

कारण, न काेई डिग्री और न ही लाइसेंस; फिर भी बड़ी संख्या में डाॅक्टर साहेब बन कर फर्जी लाेग इलाज की दुकान खाेले बैठे हैं। ये दवा और सूई ही नहीं देते, सर्जरी तक कर डालते हैं। सकरा में सुनीता नामक मरीज की दाेनाें किडनी निकालने की घटना के बाद दैनिक भास्कर की टीम ने जब पड़ताल की ताे पता चला कि ग्रामीण क्षेत्राें ताे अब भी झाेले में ही अस्पताल चल रहे हैं। मरीज चाहे उल्टी, दस्त, सिरदर्द, बुखार या फिर किसी गंभीर बीमारी का हाे, झाेले में रखी दवाइयाें से ही उनका इलाज कर दिया जाता है। जाे लाेग बाजाप्ता बाेर्ड लगाकर क्लीनिक या नर्सिंग हाेम चला रहे हैं उनमें भी अधिकतर बिना डिग्री वाले हैं। .

..और ये भी बेराेक-टाेक मरीजाें का इलाज कर रहे हैं। इतना ही नहीं, इनके हाैसले इतने बुलंद हैं कि खुलेआम कहते- ग्रामीण क्षेत्राें में जब लाेग बीमार हाेते हैं ताे मानवता के नाते इलाज करना पड़ता है। एक्सपीरियंस है, अनुभव के आधार पर दवा-गाेली देते हैं, पानी भी चढ़ाते हैं। अधिकतर ताे ठीक हाे ही जाते, नहीं हाेने पर फर्स्ट एड कर अस्पताल रेफर कर देते हैं। जिले के सकरा, माधाेपुर सुस्ता, केरमा, कांटी, बाेचहां, मड़वन हाे या दूर-दराज इलाके के पारू, साहेबगंज में ऐसे फर्जी डाॅक्टराें का संजाल है।

फर्स्ट एड के नाम पर झोला छाप कर रहे इलाज, 80% अस्पतालाें में नहीं मिले डाॅक्टर

फीजियाेथेरेपिस्ट की डिग्री, जेल जाने के बाद भी फर्स्ट एड के नाम पर इलाज, कहा- यह मानवता है

केरमा में सेवा सदन खाेले सनत कुमार के पास फीजियाेथेरेपिस्ट की डिग्री है। हाइड्राेसिल के ऑपरेशन के एक मामले में केस खराब हाेने पर जेल भी जा चुके हैं। लेकिन, फर्स्ट एड के नाम पर मरीजाें का इलाज करते हैं। कहा- यह ताे मानवता है। इसके लिए पहले लंबी लड़ाई लड़ी थी। डाॅक्टर के साथ लंबे समय तक काम करने के कारण अनुभव है। गांव-घर में किसी की तबीयत बिगड़ती है ताे दिन-रात प्राथमिक इलाज करते हैं। इसमें गलती क्या है? केरमा में ही एक हाेम्याेपैथ दवा दुकान में डाॅक्टर भी बैठते हैं।

बाेर्ड पर डाॅक्टर के नाम के नीचे इंटर पास व उनके असिस्टेंट राकेश कुमार गुप्ता का नाम भी लिखा है। पूछने पर बताया कि डाॅक्टर साहब नहीं हैं। हम लंबे समय से उनके साथ हैं। फाेड़ा-फुंसी, सिरदर्द आदि के मरीज आने पर थाेड़ी-बहुत दवा दे देते हैं। फिर कहा-हम न एलाेपैथ दवा रखते हैं और न गलत काम करते हैं। उधर, आयुष हाॅस्पिटल भिखनपुर के सभी कमराें में बेड लगे हैं। पेशेंट एक भी नहीं है। छाेटे से ऑपरेशन थिएटर में हरा पर्दा लटक रहा है। आवाज देने पर संचालिका पूजा सिंह निकलती है। तेज पेट दर्द बताने पर बाेलती है- थाेड़ी देर रुकना हाेगा। काॅल करने पर आशुताेष सर एसकेएमसीएच से आ जाएंगे....।

यूट्रस निकालने के 24 हजार लगेंगे, इस ओटी पर मत जाइए, यहां आंख छाेड़ सब ऑपरेशन होता है​​​​​​​

माैर्या हाॅस्पिटल, स्थान- एसकेएमसीएच ओवरब्रिज के पास।

दवाखाना में एक स्टाफ है। उससे हुई बातचीत के प्रमुख अंश :

स्टाफ : क्या परेशानी हो रही है आपकाे?

भास्कर प्रतिनिधि- पेट में दर्द है, स्टाफ : डाॅ. पवन सर काे बुलाते हैं

भास्कर : आपसे नहीं हाेगा...?, स्टाफ : लेटिए। पेट छूकर, गैस नहीं न है?] भास्कर : नहीं ताे...

स्टाफ : तब पेट में पत्थर है, ऑपरेशन करना हाेगा...,

भास्कर : ऑपरेशन कर दीजिए

स्टाफ : मुस्कराते हुए, ऑपरेशन तो मणिशंकर सर करेंगे।

स्टाफ : 18 हजार रुपए लगेंगे, एक अल्ट्रासाउंड भी कराना होगा

भास्कर : यहां ऑपरेशन हाेता है?

स्टाफ : आंख छाेड़ सब कुछ का।

फिर ओटी दिखाती है, जहां पर बेड और कुछ उपकरण हैं

भास्कर : यहीं ऑपरेशन करेंगे...

स्टाफ : आपकाे इस इलाके में तो इससे भी छाेटे-छोटे ओटी मिलेंगे

भास्कर प्रतिनिधि : आप कितना पढ़े-लिखे हैं

स्टाफ : हिंदी से बीए कर रहे हैं, इंटर में ताे बाॅयाेलाॅजी ही था...। देखिए, यहां पर यूट्रस का भी ऑपरेशन हाेता है

भास्कर प्रतिनिधि : इसमें कितने रुपए खर्च आएंगे?

स्टाफ : 24 हजार रुपए, जान-पहचान के हैं ताे कुछ कम हाे जाएगा। आप अपना माेबाइल नंबर दे दीजिए...।

जिले में 267 रजिस्टर्ड पर एसकेएमसीएच के पास ही है 169 नर्सिंग हाेम और अस्पताल​​​​​​​

जिले में कुल 267 नर्सिंग हाेम और अस्पताल रजिस्टर्ड हैं। जबकि, सिर्फ जूरन छपरा में इससे अधिक संचालित हैं। एसकेएमसीएच के पास भी 169 निजी नर्सिंग हाेम-क्लीनिक चल रहे। ज्यादातर में आईसीयू व 24X7 इमरजेंसी सेवा के बाेर्ड लगे हैं। पर, ज्यादातर में डाॅक्टर नहीं मिले। 3 अस्पताल बंद थे। जीराेमाइल से लेकर एसकेएमसीएच तक जाे फर्जी अस्पताल चल रहे वे मरीज बुलवाने के लिए दलाल रखे हुए हैं। कभी-कभी ताे एसकेएमसीएच से

भी बरगला कर ले जाते हैं। इनमें से अधिकतर अस्पताल ताे मात्र दाे-तीन कमरे में दुकान के ऊपर-नीचे चल रहे हैं।

इधर, आईजीआईएमएस ने भी दी सुनीता की रिपाेर्ट उसकी दाेनाें किडनी नहीं

मुजफ्फरपुर| सकरा के एक झोला छाप डाॅक्टर की शिकार हुई सुनीता की दाेनाें किडनी नहीं हाेने की रिपाेर्ट आईजीआईएमएस प्रशासन ने सरकार काे भेजने के लिए तैयार कर ली है। उसे अब भी डायलिसिस के सहारे ही जीवित रखा जा रहा है। इससे क्रिएटिनी लेबल घटकर 7 पर आ गई है। ऐसे में अधिक दिन जिंदा रहना संभव नहीं है।

आईजीआईएमएस के अधीक्षक डाॅ. मनीष मंडल ने रविवार शाम में बताया कि आईसीयू में भर्ती करने के बाद चिकित्सकाें की टीम लगातार उसकी माॅनिटरिंग कर रही है। अल्ट्रासाउंड और सिटी स्कैन में सुनीता की दाेनाें किडनी नहीं है। लिखा है कि यहां भर्ती हाेने से पहले किडनी थी या नहीं, यह नहीं बता सकते है। साेमवार काे रिपाेर्ट सरकार काे भेज दी जाएगी। अधीक्षक ने बताया कि काेई भी व्यक्ति बिना किडनी जिंदा नहीं रह सकता। उसे पेशाब नहीं हाे रहा है। इससे कई तरह के संक्रमण की आशंका रहती है। किडनी ट्रांसप्लांट हाेने पर ही जिंदगी बच सकती है।

अनाधिकृत रूप से संचालित अस्पताल, क्लीनिक व जांच घराें पर कार्रवाई के लिए पड़ताल की जा रही है। जिला स्तर पर जांच टीम छापेमारी कर रही है। पीएचसी प्रभारी काे कार्रवाई करने का आदेश दिया गया है। साेमवार काे सभी प्रभारियाें की बैठक बुलाई गई है। इसमें कार्रवाई के लिए समीक्षा की जाएगी।
-डाॅ. यूसी शर्मा, सिविल सर्जन​​​​​​​

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