पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें
  • Hindi News
  • Local
  • Bihar
  • Muzaffarpur
  • Now Lives Are In Danger Due To Negligence In Investigation, Muzaffarpur Is The Center Of The Whole Of North Bihar, People Move From Here To Many Districts.

हो रही सिर्फ खानापूर्ति:अब जांच में लापरवाही से खतरे में जान, मुजफ्फरपुर पूरे उत्तर बिहार का केंद्र है, यहां से कई जिलों में लोगों का आना-जाना रहता है

मुजफ्फरपुर23 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • हमने यहां के स्टेशन और बस स्टैंडों पर आनेवाले यात्रियों की पड़ताल की

राज्य में लॉकडाउन के 25 दिन हो गए। इस दौरान कोरोना की रफ्तार भले नियंत्रित हुई है, पर खतरा अभी टला नहीं है। मौत लगातार जारी है। लेकिन, बाहर से आनेवालों की जांच नहीं के बराबर हो रही। शहर में यूं तो स्वास्थ्य विभाग ने जंक्शन, इमलीचट्टी, बैरिया बस स्टैंड में जांच टीम बैठा रखी है, लेकिन यात्री बिना जांच कराए निकल जा रहे।

इन जगहों पर ऐसा सिस्टम भी नहीं कि यात्रियों की सही ट्रेसिंग-ट्रैकिंग हाे। मुजफ्फरपुर तिरहुत प्रमंडल का मुख्यालय व उत्तर बिहार का केंद्र है। यहां कई जिलों के यात्री उतरते हैं। ऐसे में यह लापरवाही खतरनाक साबित हो सकती है। कोरोना जांच गंभीरता से न होने पर संक्रमण फिर फैल सकता है।

रेलवे जंक्शन : रोजाना औसतन तीन हजार यात्री उतरते, जांच अधिकतम 500 की हो रही

जंक्शन पर प्रतिदिन करीब 3000 यात्री उतरते, लेकिन जांच अधिकतम 500 की हो पा रही। अन्य, ऐसे ही निकल जा रहे हैं। जबकि, यहां एक काउंटर 24 घंटे कार्यरत है। शनिवार को मात्र 410 की जांच हुई जिनमें 220 आरटीपीसीआर व 190 एंटीजन जांच शामिल हैं।

उनमें 14 लोग पॉजिटिव भी मिले। दिन में 11:45 बजे आनंद विहार से आई सप्तक्रांति से करीब 600 यात्री उतरे। उनमें भी मात्र 100 की जांच हो सकी। संबंधित अधिकारी का कहना है कि रेल पुलिस का सहयोग नहीं मिलने से यात्री निकल जा रहे हैं। वह जांच कराना नहीं चाहते। कर्मचारी जब जांच कराने को बोलते हैं तो वो उलझ जाते हैं।

बैरिया बस स्टैंड आतीं दर्जनों बसें जांच महज 50 की

बैरिया बस स्टैंड प्रशासनिक भवन के समीप एक एंबुलेंस में आवश्यक सामग्री लेकर स्वास्थ्य विभाग के टेक्नीशियन की टीम हर दिन बैठती है। यह टीम जांच करने के लिए सुबह 10 से शाम 5 बजे तक रहती है। इस बस स्टैंड से दिल्ली की दो दर्जन बसें प्रतिदिन खुलती हैं।

साथ ही दिल्ली, पंजाब, राजस्थान, झारखंड और पश्चिम बंगाल आदि राज्यों से दर्जनों बसें आती भी हैं। इन बसों से हजारों यात्री प्रतिदिन जिले में आते हैं। लेकिन, इनकी जांच नहीं हो पा रही है। स्वास्थ्य विभाग की टीम प्रतिदिन औसतन 50 लोगों की ही जांच कर पाती है।

इमलीचट्टी स्टैंड : प्रत्येक दिन सैकड़ों का होता आना-जाना और जांच 10-20 की ही

इमलीचट्टी बस स्टैंड में प्रतिदिन सैकड़ों यात्रियों का आना-जाना होता है। दूसरे राज्यों से आनेवाले यात्री पटना से राज्य पथ परिवहन निगम की बसों से आते हैं। लेकिन, यहां पर प्रतिदिन बमुश्किल 10 यात्रियों की जांच हो पा रही है। शनिवार को दिनभर में मात्र 10 लोगों का कोरोना जांच के लिए सैंपल लिया जा सका।

बस से यात्रा करनेवाले और बाहर से आने वाले अधिकतर लोग अपना सैंपल नहीं दे रहे थे। स्वास्थ्य विभाग द्वारा प्रतिनियुक्त कर्मचारी भी उनसे अनुरोध करने के बजाए चुपचाप बैठकर समय गुजारते दिखे। अन्य कोई भी इसे देखनेवाला नहीं है।

सीधी बात - डाॅ. अमिताभ सिन्हा, नोडल अधिकारी

प्रारंभ में सख्ती से जांच हुई, अब पुलिस से नहीं मिल रहा सहयोग

भास्कर ने जंक्शन व बस स्टैंडों में ढीली पड़ी कोरोना जांच को लेकर इसके नोडल अधिकारी डॉ. अमिताभ सिन्हा से सवाल किया, तो उन्होंने कहा कि शुरुआती दौर में ट्रेन-बस से आनेवाले यात्रियों की जांच सख्ती से हुई। रेल व जिला पुलिस से पूरा सहयोग मिला। अब रेल और जिला पुलिस सहयोग नहीं करती। इससे यात्री बिना सैंपल दिए ही निकल जा रहे हैं।

स्वास्थ्य विभाग के वहां पर तैनात कर्मचारी जब उन्हें रोकते हैं तो वे उलझ जाते हैं। कई बार व्यक्तिगत रूप से मिलकर भी रेल एसपी और एसडीओ को पुलिस बल देने का अनुरोध किया। लेकिन, सहयोग नहीं मिलने के कारण बाहर से आनेवाले यात्री बिना जांच कराए ही चले जाते हैं। सोमवार को फिर इन अधिकारियों को पत्र लिख कर पुलिस बल तैनात करने के लिए अनुरोध करेंगे। ताकि, अधिक से अधिक यात्रियों की जांच कराई जा सके।

खबरें और भी हैं...