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‘एंटी’ जन टेस्ट:गड़बड़ी की जांच का आदेश, डीएम ने मांगी रिपोर्ट,एडीएम के नेतृत्व में 3 सदस्यीय जांच दल गठित

मुजफ्फरपुर21 दिन पहले
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  • नेशनल पाेर्टल पर अपलाेड हुअा 89 हजार से अधिक डाटा

काेराेना जांच में गड़बड़ी के मामले ने तूल पकड़ लिया है। रविवार काे दैनिक भास्कर में प्रमुखता से खबर प्रकाशित हाेने के बाद डीएम प्रणव कुमार ने अपर समाहर्ता राजेश कुमार की अध्यक्षता में तीन सदस्यीय जांच दल गठित कर दिया है। इसमें सीएस एसके चाैधरी के साथ-साथ वरीय उप समाहर्ता सारंग पाणि पांडेय शामिल हैं। डीएम ने दैनिक भास्कर में प्रकाशित खबर के आलाेक में जांच दल से दाे दिनाें में रिपाेर्ट मांगी है।

डीएम की ओर से जारी आदेश में कहा गया है कि दैनिक भास्कर में प्रमुखता से खबर प्रकाशित की गई है कि मुजफ्फरपुर में एंटीजन टेस्ट की रिपाेर्ट ऐसे लाेगाें काे भी मिली, जिन्हाेंने कभी काेराेना की जांच कराई ही नहीं। डीएम ने प्रकाशित खबर की काॅपी के साथ बिन्दुवार रिपाेर्ट मांगी है। इस बीच सीएस डाॅ. एस के चाैधरी ने जिले के सभी पीएचसी प्रभारियाें से रैपिड एंटीजन किट का विस्तृत ब्याैरा मांगा है।

उधर, एक सप्ताह के दाैरान 89 हजार से अधिक एंटीजन की जांच रिपाेर्ट काे नेशनल पाेर्टल पर अपलाेड कर दिया गया है। एंटीजन सैंपल के नाेडल अधिकारी सह जिला यक्ष्मा अधिकारी डाॅ. अमिताभ सिन्हा ने कहा है कि अब महज 672 लाेगाें का डाटा अपलाेड करना शेष रह गया है।

अन्य जिलाें से भी आ रहीं शिकायतें
मुजफ्फरपुर, पटना व भागलपुर के बाद अब दरभंगा, गया, छपरा, पश्चिम चंपारण, सीतामढ़ी सहित अन्य जिलाें से भी रैपिड एंटीजन किट जांच में गड़बड़ी की शिकायत आने लगी है। इन जिलाें के कई लाेगाें ने रविवार काे दैनिक भास्कर काे काॅल कर कहा है कि बगैर जांच के ही उनके माेबाइल पर एंटीजन जांच की निगेटिव रिपाेर्ट का एसएमएस आया है।

पटना बाेरिंग राेड से विशाल सिंह ने एसएमएस की काॅपी भेजते हुए कहा है कि उन्हाेंने कभी काेराेना जांच कराई ही नहीं। इसी तरह पश्चिम चंपारण के रामनगर से जीतेन्द्र मिश्रा, दरभंगा के अविनाश कुमार मंडल, बाेधगया से छाेटेलाल कुमार वर्मा, सीतामढ़ी से पूनम ठाकुर सहित अन्य लाेगाें ने कहा है कि बगैर जांच के ही उनके माेबाइल पर एंटीजन जांच की निगेटिव रिपाेर्ट का मैसेज आया है।

जब्त एंटीजन किट पर बैच नंबर नहीं हाेने से सदर अस्प‍ताल में कालाबाजारी की राह आसान, नामजदगी के बाद भी साक्ष्य नहीं

सकरा पुलिस की ओर से 9 मई काे जब्त 4 हजार से अधिक सरकारी रैपिड एंटीजन किट की कालाबाजारी मामले की जांच में बड़ा खुलासा हुआ है। काेराेना जांच के लिए सदर अस्पताल व अन्य सरकारी संस्थानों में एंटीजन किट पर कंपनी काेई बैच नंबर ही नहीं दे रही थी। एंटीजन किट आने पर सेंट्रल स्टाेर में केवल उसकी संख्या की एंट्री हाेती रही। संख्या के आधार पर ही जांच सेंटरों पर किट भेजा जाता था। किट पर बैच नंबर हाेता, ताे इससे पता चल जाता कि काैन सा किट किस जांच केंद्र के लिए जारी हुआ। जब किट मिले, उस वक्त किसी भी अधिकारी ने बैच नंबर हाेने-न-हाेने की जांच नहीं की।

पुलिस के अनुसार बैच नंबर नहीं हाेने के कारण ही सदर अस्पताल में एंटीजन किट घाेटाले का मार्ग प्रशस्त हाे गया। किट पकड़े जाने पर भी कालाबाजारी में संलिप्त सदर अस्पताल कर्मी काे पकड़े जाने का काेई खतरा नहीं था। पुलिस भी यह पता नहीं लगा पाई है कि एंटीजन किट किस जांच सेंटर से कालाबाजारी हुई।

जांच में वेयर हाउस तक में यह पता नहीं चल पाया कि जब्त एंटीजन किट किस कर्मचारी या स्वास्थ्य कर्मी ने सदर अस्पताल में रिसीव किया था। डीएसपी पूर्वी मनाेज पांडेय ने बताया कि यही वजह है कि केस में नामजद हाेने पर भी सदर अस्पताल के स्वास्थ्य प्रबंधक प्रवीण कुमार के खिलाफ काेई कागजाती साक्ष्य नहीं मिल पा रहे हैं।

25 किट वाला पैकेट निजी लैब काे 3000 रुपए में बेचा
बताया गया है कि एक डब्बा में 25 एंटीजन किट रहता है। यहां का कर्मचारी 3 हजार रुपए प्रति डब्बा निजी लैब वालों काे बेचता था। प्रति किट निजी लैब काे 120 रुपए ही चुकाना हाेता था। जबकि, मुम्बई से मंगाने पर प्रति किट 250 रुपए देना पड़ता है। यानी सीधे-सीधे 130 रुपए प्रति किट की बचत। मरीजों से जांच के नाम पर 1100 से 1500 रुपए तक वसूला जाता था।

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