या काॅन्सेप्ट:तालाब में एक ही साथ मछली के साथ मखाना और सिंघाड़ा के उत्पादन की शुरुआत, 45 दिन के बाद किया जाएगा विस्तार

बंदरा6 दिन पहले
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प्रखंड के मतलूपुर कोरलाहा चौर में स्थित बाबा हेचरी प्रोजेक्ट पर अब मछली पालन के साथ मखाना व सिंघाड़ा उत्पादन भी किया जाएगा। राजेंद्र कृषि विश्वविद्यालय के पूर्व कुलपति डॉ. गोपाल जी त्रिवेदी ने गुरुवार को मत्स्य प्रोजेक्ट से जुड़े हुए किसानों, अधिकारियों व कर्मियों के साथ प्रोजेक्ट स्थल पर मछली पालन के साथ मखाना व सिंघाड़ा उत्पादन की शुरुआत की। सभी ने बीजों को पोखर में डालकर इसकी शुरुआत कराई। उन्होंने कहा कि पानी हमारे लिए श्राप नहीं, बल्कि वरदान है। मखाना की प्रभेद सबौर मखाना-1 लगाकर इसकी शुरुआत की गई।

उन्होंने कहा कि सरकार का वन डिस्टिक वन प्रोजेक्ट के तहत कार्य योजना चल रही है। उन्होंने बताया कि पहले यहां एक तालाब में सिंगल मखाना की खेती होगी। दूसरे तालाब में सिंगल सिंघाड़ा का उत्पादन होगा। तीसरे में मछली व सिंघाड़ा तथा चौथे में मछली व मखाना का उत्पादन होगा और पांचवें में मछली, मखाना एवं सिंघाड़ा का संयुक्त उत्पादन हाेगा।

45 दिन में इसकी उत्पादकता देखने के बाद इसका विस्तार किया जाएगा। मौके पर प्रोजेक्ट के निदेशक शिवराज सिंह ने बताया कि 45 दिन में इसकी उत्पादकता आने के बाद इसको पूरे 1 हेक्टेयर में लगाया जाएगा। फिलहाल नर्सरी के रूप में बतौर प्रयोग के तौर पर इसकी 5 तरीके से शुरुआत की गई है। मौके रमन त्रिवेदी, रामकुमार त्रिवेदी, गुड्डू झा, बच्चा पाठक, मनोहर राय, शिवचन्द्र पासवान आदि थे।

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