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बच्चों के लिए इम्युनिटी की अलग से दवा नहीं:स्वस्थ-संतुलित भोजन दें, बातचीत के जरिए तनाव मुक्त रख कर स्क्रीन टाइम कम करें और फिजिकल एक्टीविटीज बढ़ाएं

मुजफ्फरपुर8 दिन पहले
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कोरोना की तीसरी लहर बच्चों पर काफी निगेटिव असर डालेगी, इसे लेकर परिजन खासे चिंतित हैं। बच्चों को कोरोना से कैसे बचाया जा सकता है? इनकी इम्युनिटी कैसे बढ़ाई जा सकती है और माता-पिता ऐसा क्या करें कि बच्चों को बीमारी से दूर रखा जा सके। इसे लेकर भास्कर ने शिशु रोग विशेषज्ञों से बात की। सामने आया कि न केवल बच्चे, बल्कि घर के वो सदस्य भी विशेष ध्यान रखें जो बाहर आते-जाते रहते हैं। क्योंेकि, बच्चे घर में ही रहते हैं और उन्हें बाहर से आने वाले सदस्य ही संक्रमित कर सकते हैं। बच्चों को कोरोना से कैसे दूर रखें, क्या सावधानियां बरतें और कब-क्या करना है, जानिए एक्सपर्ट की राय।

‘जंक फूड अवॉइड करें, घर के सभी वयस्क टीका लगवा लें तो बच्चे आधे सुरक्षित’

मुजफ्फरपुर के वरीय शिशु रोग विशेषज्ञ भारतीय बाल अकादमी के पूर्व अध्यक्ष डॉ. अरुण शाह के अनुसार बच्चों में इम्युनिटी बढ़ाने के लिए अलग से कोई दवा नहीं आती है। लोगों को पैनिक नहीं होना चाहिए, क्योंकि बच्चों में अब तक कोरोना इन्फेक्शन के माइल्ड यानी हल्के-फुल्के मामले मिले हैं। इसका लक्षण के आधार पर इलाज संभव है। अपने मन से एंटीबायोटिक आदि न दें।

बच्चों में रिकवरी रेट भी ज्यादा है। वैसे घर के सभी वयस्क टीका लगवा लें, तो बच्चे खुद आधे सुरक्षित हो जाएंगे। फिजिकल एक्टीविटी बहुत जरूरी है, पर सरकार के गाइडलाइन के बिना अपने अहाते के बाहर खुले में नहीं घूमने दें। बच्चों का टीवी या मोबाइल आदि पर स्क्रीन टाइम कम करें। जंक फूड नहीं दें। अधिक से अधिक फल और प्रोटीन युक्त भोजन दें। बच्चों में पूरी नींद बहुत जरूरी है। उन्हें समय पर सुलाने-जगाने की आदत डालें। हल्दी-दूध भी फायदेमंद रहेगा।

यह करें और यह नहीं
शांति चाइल्ड क्लीनिक हॉस्पिटल के शिशु रोग विशेषज्ञ डॉ राजेश कुमार बताते हैं- लॉकडाउन में बच्चों की जीवनशैली पूरी तरह बदल गई है। वे देर तक सोते हैं। इससे खाने-पीने का सिस्टम भी गड़बड़ा जाता है। दिनचर्या नियमित रखें और यदि खानपान का सिस्टम सही नहीं है तो इम्युनिटी प्रभावित होती है। पूरी नींद, हरी सब्जियां-फल लेना बहुत जरूरी है।

यह विशेष ध्यान रखना है जरूरी
एसकेएमसीएच के उपाध्यक्ष शिशु रोग विशेषज्ञ गोपाल शंकर सहनी बताते हैं- कोरोना की पहली लहर में संपर्क से संक्रमण होता था। दूसरी लहर में हवा से संक्रमण हो रहा है। तीसरी लहर कैसी आएगी यह कहना मुश्किल है। इससे बचने को जागरूकता जरूरी है। बच्चों के माता-पिता या अन्य परिजन जो बाहर आते-जाते हों, वे लौट कर किसी चीज को ना छुएं। बच्चों से दूर रहें।

डॉ. अमर कुमार झा, मनोरोग विशेषज्ञ, सदर हॉस्पिटल बताते हैं- किसी भी महामारी में कई लहरें आती हैं। इसके साथ महामारी यानी पैनेडेमिक धीरे-धीरे इनडेमिक होती जाती है। इसका प्रभाव कम होता जाता है। इसलिए लोगों को घबराना नहीं चाहिए। इलाज-उपचार कहां उपलब्ध है यह जानकारी रखनी चाहिए। इससे आत्मविश्वास बढ़ता है। मनाेरंजन करें। आपस में भावनाएं शेयर करें। अनावश्यक जानकारियों पर बातें न करें। योगा करें। बच्चों को अकेले नहीं छोड़ना चाहिए। सर्वाधिक जरूरी आपसी संवाद करना है। इसमें बच्चों की भागीदारी अहम है।

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