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समाधान की तरफ बढ़े कदम:फ्लड फाइटिंग के तर्ज पर रेलवे कल्वर्ट की हाेगी सफाई; भास्कर पैनल में शामिल विशेषज्ञों की टीम ने जैसा उपाय सुझाया, उसी पर अमल शुरू

मुजफ्फरपुरएक महीने पहले
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रेलवे कल्वर्ट का जायजा लेते विशेषज्ञ, जिन्होंने सुझाए थे समाधान के तरीके। - Dainik Bhaskar
रेलवे कल्वर्ट का जायजा लेते विशेषज्ञ, जिन्होंने सुझाए थे समाधान के तरीके।

शहरी क्षेत्र में जलजमाव की समस्या से निजात के लिए निगम प्रशासन ने रेलवे कल्वर्ट की सफाई के लिए टेंडर निकाला है। सफाई बाढ़ राहत यानी फ्लड फाइटिंग के तर्ज पर हाेगी। इस पर 18.56 लाख रुपए खर्च हाेंगे। 23 से दिसंबर से टेंडर प्रक्रिया शुरू हाेगी। नए साल में काम शुरू हाेगा और करीब दाे माह सफाई में लगेंगे।

उल्लेखनीय है कि जलजमाव के समाधान को लेकर अभियंत्रण सेवा समन्वय समिति (तिरहुत परिक्षेत्र) ने रेलवे कल्वर्ट की सफाई की पहल की है। समिति के संयोजक ई. रामस्वार्थ साह, सचिव ई. एलके ठाकुर, ई. मिथिलेश कुमार शाही और बाढ़ नियंत्रण के कार्यपालक अभियंता बबन पांडेय ने 30 सितंबर काे पांडेय गली रेलवे कल्वर्ट की पड़ताल की थी।

समिति ने 9 अक्टूबर को इसकी सफाई को लेकर रिपोर्ट सौंपी। बताया कि किस तरह मुख्य नाला कल्याणी चौक से लगभग 8 किलोमीटर की दूरी पर खबड़ा गांव के पास फरदो नाले में मिलता है। इसकी सफाई के उपाय के साथ समिति ने एस्टिमेट भी दी थी। अब निगम 5 जनवरी को तकनीकी बिड खाेलेगा। फिर एजेंसी चयन कर काम शुरू हाेगा।

वेंट में जहरीली गैस की आशंका, बचाव को पुख्ता सुरक्षा इंतजाम
आजादी के पहले बने 15 मीटर के दोनों वेंट में भरी है गाद

पांडेय गली रेलवे कल्वर्ट की लंबाई 15 मीटर है। इसके ऊपर से तीन रेलवे ट्रैक गुजरती है। नीचे दाेनाें वेंट की वर्षों से सफाई नहीं हाेने के कारण 3 से 4 फीट गाद भरी है। एक वेंट पूरी तरह बंद है। ऐसे में हल्की बारिश होने पर भी शहर के मुख्य बाजार मोतीझील, कल्याणी और आसपास के इलाकों में जलजमाव हाेता है।

भास्कर एक्सपर्ट बता रहे ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ कैसे हाेगी कल्वर्ट सफाई
ई. मिथिलेश कुमार शाही और ई. एलके ठाकुर के अनुसार लंबे समय से रेलवे कल्वर्ट की सफाई नहीं हुई। ऐसे में जहरीली गैस भरी हाेगी। इसलिए सफाई के दौरान विशेष एहतियात जरूरी है। सफाई कर्मियों के के साथ ऑक्सीजन सिलेंडर रहेगा। बांस की पाइलिंग कर सीमेंट के खाली बोरे में रेत भर नायलॉन क्रेट से पैक किया जाएगा।

इससे कल्वर्ट में पानी का प्रवाह बंद हाेगा। पूरी तरह पानी निकालने के बाद सफाई हाेगी। इसी तरह बारी-बारी से दाेनाें वेंट की गाद निकाली जाएगी। सफाईकर्मियाें काे ऑक्सीजन सिलेंडर के साथ बूट और रबर के दस्ताने दिए जाएंगे, ताकि किसी भी तरह जान के लिए जोखिम न हाे।

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