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किल्लत:कोरोना के गंभीर मरीजों को दिया जाने वाला रेमडेसिविर इंजेक्शन आउट फ स्टॉक, स्टॉकिस्ट के पास भी पड़े कम, भेजी 600 वाइल की डिमांड

मुजफ्फरपुरएक दिन पहले
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  • इंजेक्शन उपलब्ध कराने को लेकर एसकेएमसीएच ने सरकार को लिखा पत्र, कोरोना के मामले बढ़ने से बढ़ी रेमडेसिविर की मांग

कोरोना की दूसरी लहर पहले से ज्यादा खतरनाक होती जा रही है। संक्रमण तेजी से बढ़ रहा है। लेकिन, गंभीर मरीजों को दिया जाने वाला रेमडेसिविर इंजेक्शन जिले में आउट ऑफ स्टॉक है। एसकेएमसीएच प्रशासन ने इंजेक्शन उपलब्ध कराने को लेकर सरकार को पत्र लिखा है।

एसकेएमसीएच में इंजेक्शन उपलब्ध नहीं है। वहीं, जिले के स्टॉकिस्टों के पास भी रेमडेसिविर गिनती के ही बचे हैं। संक्रमण बढ़ने के साथ ही मरीजों के परिजन मेडिकल स्टोर में पहुंचने लगे हैं। लेकिन, अभी से इसकी भारी किल्लत सामने आने लगी है। डिमांड बढ़ते देख स्टॉकिस्ट ने कंपनी को 600 वाइल की डिमांड भेजी है। केमिस्ट एंड ड्रग एसोसिएशन के अनुसार, पिछले 3 दिनों से मरीजों के परिजन रेमडेसिविर के लिए मेडिकल स्टोर पहुंचने लगे हैं।

जिले में 4 स्टॉकिस्ट हैं, जो इस इंजेक्शन को बेचते हैं। किसी के पास 4 वाइल तो किसी के पास आधा दर्जन वाइल बचा है। जिला केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अध्यक्ष रंजन कुमार साहू ने कहा कि फिलहाल ऐसी नौबत नहीं आई है कि जरूरतें पूरी नहीं की जा सके। चूंकि, संक्रमण काफी तेजी से बढ़ रहा है। ऐसे में इंजेक्शन की मांग भी तेजी से बढ़ेगी। इसी के मद्देनजर कंपनी को डिमांड भेजी गई है। डॉक्टरों की रिपोर्ट, आधार कार्ड, मोबाइल नंबर आदि लेने के बाद ही यह इंजेक्शन दिया जाता है।

रेमडेसिविर काफी महंगा इंजेक्शन, एक्सपायरी डेट भी तीन माह में खत्म हो जाता है, इसलिए ज्यादा स्टॉक नहीं करते केमिस्ट एंड ड्रगिस्ट एसोसिएशन के अनुसार, रेमडेसिविर इंजेक्शन काफी महंगा होता है। एक्सपायरी डेट भी तीन माह में ही खत्म हो जाता है। इसलिए स्टॉकिस्ट भी ज्यादा स्टॉक नहीं करते हैं। पिछले साल संक्रमण बढ़ने पर इंजेक्शन मंगाया गया था। लेकिन, बाद में इसमें कमी आने पर डिमांड नहीं हुई और कई वाइल एक्सपायर हो गए। यह इंजेक्शन 4000 रुपये प्रति वाइल बिका था।

इस इंजेक्शन का इस्तेमाल गंभीर मरीजों पर चिकित्सकों की अनुशंसा पर होती है। फिलहाल एसकेएमसीएच में ऐसे मरीज नहीं आए हैं। आगे जरूरत पड़ सकती है। इसी के मद्देनजर सरकार को पत्र लिखकर यह दवा उपलब्ध कराने का अनुरोध किया गया है। - डॉ. बीएस झा, अधीक्षक, एसकेएमसीएच

एजिथ्राेमाइसिन की कमी हुई दूर, सदर अस्पताल और पीएचसी को भेजी गई दवा

कोरोना के इलाज में सबसे अधिक इस्तेमाल होने वाली एजिथ्रोमाइसिन दवा सभी पीएचसी और सदर अस्पताल को उपलब्ध करा दी गई है। सिविल सर्जन ने बताया कि शहरी क्षेत्र में एजिथ्रोमाइसिन की कमी हो गई थी। गुरुवार को स्टॉक में दवा आ गई। एजिथ्रोमाइसिन की कमी कारण सदर अस्पताल में आने वाले कोरोना के लक्षण वाले मरीजों को यह दवा नहीं मिल पा रही थी। साथ पॉजिटिव मरीजों को घर पर पहुंचाई जाने वाली पांच प्रकार की दवा का वितरण एजिथ्रोमाइसिन की कमी होने के कारण शहरी क्षेत्र में नहीं हो रहा था।

एसकेएमसीएच के क्लीनिकल पैथोलॉजी लैब में टेक्नीशियन की कमी से परेशानी

एसकेएमसीएच में आउटसोर्सिंग के तहत बहाल लैब टेक्नीशियन व ओटी असिस्टेंट का कार्य अस्पताल प्रशासन ने समाप्त कर दिया है। इससे मदर चाइल्ड हॉस्पिटल और पीआईसीयू वार्ड में टेक्नीशियन की कमी हो गई। हाल यह है कि अस्पताल की क्लीनिकल पैथोलॉजी में मरीजों का सैंपल भेज कर जांच कराई जा रही है।

जानकारी के बाद अस्पताल अधीक्षक डॉ. बाबू साहेब झा ने क्लीनिकल पैथोलॉजी लैब का जायजा लिया। कर्मियों ने बताया कि क्लीनिकल पैथोलॉजी में महज चार टेक्नीशियन हैं। ओपीडी शिफ्ट में दो और इमरजेंसी शिफ्ट में एक-एक की ड्यूटी लगी है। ओपीडी शिफ्ट में 150-200 मरीजों की जांच होती है। जिसमें बायोकेमिकल व अन्य जांच शामिल होती है।

टेक्नीशियन की संख्या बढ़ाने की मांग की। इस पर अधीक्षक ने डॉ. मनीष और इंचार्ज से बातचीत की और मदर चाइल्ड हॉस्पिटल और पीआईसीयू में 24 घंटे टेक्नीशियन की तैनाती करने को कहा। निरीक्षण के दौरान डॉ. दिलीप कुमार ड्यूटी से नदारद थे।

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