गंदे पानी से बजबजा रहा शहर:तीन एसटीपी-ड्रेनेज के लिए 183 कराेड़ रुपए, दो साल में काम के नाम पर महज एक गड्‌ढा खोद पाया बुडको

मुजफ्फरपुर3 महीने पहलेलेखक: शैलेश कुमार
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इकलौते ड्रेन का काम मिठनपुरा मेें शुरू हुआ, लेकिन अब ठप है। यह गड्‌ढा हादसे का कारण बन रहा है। - Dainik Bhaskar
इकलौते ड्रेन का काम मिठनपुरा मेें शुरू हुआ, लेकिन अब ठप है। यह गड्‌ढा हादसे का कारण बन रहा है।
  • एक भी एसटीपी का निर्माण नहीं हुआ शुरू, डेढ़ साल से मिठनपुरा तिरहुत नहर तक काम अधूरा
  • जानिए स्मार्ट सिटी में जलजमाव के लिए किन वजहों से गुनाहगार है बुडकाे

शहर को जलजमाव से निजात के लिए चार साल से स्टॉर्म वाटर ट्रीटमेंट प्लांट और नाला निर्माण कागजों में ही सिमटा है। बुडको, मेसर्स खिलाड़ी इंफ्रास्ट्रक्चर प्राइवेट लिमिटेड और अन्नू इंफ्रास्ट्रक्चर कंस्ट्रक्शन इंडिया प्राइवेट लिमिटेड से 31 मई 2019 को एग्रीमेंट हुआ। अटल नवीकरण और शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत) योजना के तहत इसके लिए 183.40 करोड़ रुपए आवंटित है।

लेकिन, बुडकाे एक भी एसटीपी या नाले का काम पूरा नहीं कर सकी। नतीजा हुआ कि इस साल भी शहर चार माह लगभग डूबा रहा। मिठनपुरा और बेला इलाके में ताे अब भी सड़े पानी से कई गलियां बजबजा रहीं हैं। दास कॉलोनी समेत कई इलाकों में जलजमाव अब तक है।

उधर, मोतीझील में चार दिनों की मशक्कत के बावजूद निगम प्रशासन फ्लाईओवर के नीचे से पानी नहीं निकाल सका है। मोतीझील बाटा गली से स्टॉर्म वाटर ट्रीटमेंट प्लांट तक के लिए मास्टर नाला गुजरना है। यह काम भी बुडको के ही जिम्मे है। लेकिन, काम एक इंच भी तब होगा, जब शुरू हो। अब तक शहरवासियों को शुरुआत की ही प्रतीक्षा है।

काेराेना और बारिश के कारण हुई देर : बुडकाे
^बारिश की वजह से मिठनपुरा तिरहुत कैनाल ड्रेनेज का काम बीच में ही रोक देना पड़ा। इससे पहले काेराेना संकट से भी काम प्रभावित रहा। अब फिर काम में तेजी आई है। जमीन की वजह से दोनों ड्रेनेज का काम नहीं शुरू हाे सका है। बुडकाे ने सभी जगह आउटलेट खोल दिया है। कच्ची पक्की में नाला बना। - अरुण कुमार, एक्जीक्यूटिव इंजीनियर, बुडको

1. मिठनपुरा-तिरहुत कैनाल नाला बन गया होता तो नहीं डूबता शहर का बड़ा इलाका
मिठनपुरा चौक से तिरहुत नहर तक ड्रेनेज की सवा दाे साल से कवायद ही चल रही है। तिरहुत नहर में सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट लगाने की प्रक्रिया तक शुरू नहीं हो सकी। एजेंसी के अनुसार मिट्टी जांच की प्रक्रिया जारी है। बारिश की वजह से ड्रेनेज निर्माण के रुके काम में फिर तेजी आई है। तिरहुत कैनाल के पास बनने वाले प्लांट की क्षमता राेज 25 लाख लीटर पानी साफ करने की हाेगी।

2. सिकंदरपुर-मणिका नाले पर विशेषज्ञ असहमत
सिकंदरपुर से मणिका मन तक बुडकाे को 9.15 किलोमीटर ड्रेनेज बनाना है। सिकंदरपुर स्लुइस गेट, लकड़ीढाई चौक, मारवाड़ी स्कूल, नवाब रोड, जेल चौक, लेप्रोसी मिशन हॉस्पिटल से मुशहरी मणिका तक काम पर पूणे की एक्सपर्ट टीम ने आपत्ति जताई है। वजह सिकंदरपुर व मणिका मन का लेवल है। अब बुडकाे काे विकल्प की तलाश है। एसटीपी के लिए प्रशासन से चिह्नित जमीन पर लाेगाें ने विराेध जताया। आठ माह से काम बंद है।

3. खबड़ा में भी अब तक जमीन की तलाश
मोतीझील व कल्याणी समेत कई बड़े इलाके से पानी निकालने काे खबड़ा फरदो नाला तक 5.92 किलोमीटर ड्रेनेज बनाने की योजना है। कल्याणी बाटा चौक से अयोध्या साह लेन, बाटा के पीछे से रेलवे क्रॉसिंग, कलमबाग चौक, स्पीकर चौक, छाता चौक, दामू चौक, एनएच 28 खबड़ा से फरदो तक एक इंच ड्रेनेज नहीं बन सका है।

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