पाएं अपने शहर की ताज़ा ख़बरें और फ्री ई-पेपर

डाउनलोड करें

कटरा में उपेक्षा:27 वर्षाें में 8 विधायक व 3 सांसद देखे, लेकिन चचरी-पीपा पुल से नहीं मिला छुटकारा

मुजफ्फरपुर7 दिन पहले
  • कॉपी लिंक
  • बकुची में बागमती नदी पर लोहे का पुल वर्ष 1994 में ध्वस्त होने के बाद पुल निर्माण की जगी थी आस, लेकिन अब भी चचरी व पीपा पुल के सहारे सरक रही जिंदगी

बाढ़ की दस्तक के दाैरान ही कटरा का लाइफलाइन बकुची स्थित पीपा पुल पर वाहनों का परिचालन बंद है। हालांकि बाढ़ के दाैरान यह पहली बार नहीं है। बाढ़ के दिनाें में यह पुल महीने-दाे महीने बंद हाे जाता है। 27 वर्षाें से चचरी व पीपा पुल का दंश झेल रहे कटरावासियाें काे अाज तक इससे निजात नहीं मिली। इन दाैरान यहां के लाेगाें ने 8 विधायक व 3 सांसद चुने, लेकिन बकुची में पुल नहीं बन सका। बकुची स्थित बागमती नदी पर अंग्रेजाें के जमाने का बना लोहे का पुल वर्ष 1994 में बाढ़ के दौरान ध्वस्त हो गया। लाेहे का पुल ध्वस्त होने के बाद यहां कि जनता काे जनप्रतिनिधियाें से नए पुल की आस जगी।

अब तक यहां का प्रतिनिधित्व करने वाले 8 विधायक व 3 सांसद में से गणेश प्रसाद यादव, अर्जुन राय व रामसूरत राय विधायक बनने के बाद सरकार में मंत्री भी बने। कैप्टन जयनारायण निषाद तीन बार व उनके पुत्र अजय निषाद दो बार व एक बार जार्ज फर्नांडिस सांसद चुने गए। औराई विस से सुरेंद्र राय ने दाे बार, गायघाट विधानसभा से महेश्वर प्रसाद यादव चार बार, वीरेंद्र कुमार एक बार व वीणा देवी ने एक बार इस क्षेत्र का प्रतिनिधित्व किया। गायघाट से वर्तमान में निरंजन राय विधायक है, लेकिन लाेगाें की समस्या जस की तस बनी हुई है।

करीब 10 लाख आबादी काे जाेड़ता है यह पुल
मुजफ्फरपुर, दरभंगा व सीतामढ़ी के एक दर्जन से ऊपर प्रखंड की करीब 10 लाख की आबादी काे पीपा पुल जाेड़ता है। पुल बंद हाेने से कटरा के उत्तर पूर्वी भाग की करीब एक लाख की आबादी दरभंगा के रास्ते मुजफ्फरपुर शहर पहुंचती है। वहीं कटरा के उत्तर पश्चिम भाग की करीब एक लाख की आबादी सैदपुर सीतामढ़ी के रास्ते मुजफ्फरपुर शहर पहुंचती है। इसके लिए 60 से 70 किमी अतिरिक्त दूरी तय करनी पड़ती है। कई बार गंभीर मरीज रास्ते में दम ताेड़ देते हैं।

चचरी पर वर्चस्व की लड़ाई के बाद बनाया गया था पीपा पुल
लोहे का पुल के ध्वस्त के बाद कुछ दिनों तक यहां पर नाव चली, लेकिन नाव हादसे में तीन की मौत के बाद धनौर निवासी चैतु सिंह ने बागमती नदी पर पहला चचरी पुल बनाया। फिर कटरा के नागेन्द्र सिंह व बकुची के राजकुमार भगत उर्फ पितरिया के द्वारा चचरी पुल का निर्माण कराया गया। बाद में चचरी पुल पर हो रहे अवैध कमाई को लेकर वर्चस्व की जंग छिड़ी।

इस दौरान चचरी पुल संचालक कटरा निवासी नागेन्द्र सिंह की हत्या वर्ष 2008 में होली से एक दिन पूर्व चचरी पुल घाट पर ही कर दी गई। बाद में बकुची निवासी राजकुमार भगत उर्फ पितरिया की हत्या वर्ष 2013 में नव वर्ष के दूसरे दिन कर दी गई। इसके बाद ग्रामीणाें के सहयाेग से चचरी पुल की जगह करीब 20 लाख की लागत से पीपा पुल बनाया गया, जिसके सहारे वाहनाें का अावागमन हाेता है।

खबरें और भी हैं...