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कैंसर रोगी मानकर इलाज, मिला बुखार:चार माह तक निजी अस्पतालाें में हाेता रहा इलाज, 2.5 लाख खर्च; निकला कालाजार

मुजफ्फरपुरएक महीने पहले
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कालाजार उन्मूलन काे लेकर जांच के लिए आई सेंट्रल टीम काे इसकी जानकारी मिली ताे जांच के आदेश दिए गए हैं। - Dainik Bhaskar
कालाजार उन्मूलन काे लेकर जांच के लिए आई सेंट्रल टीम काे इसकी जानकारी मिली ताे जांच के आदेश दिए गए हैं।
  • शहर से पटना तक परेशान रहा परिवार, एक सुई के बाद मरीज पूरी तरह स्वस्थ

चार माह तक बंदरा की एक महिला बुखार आने पर शहर से पटना व काेलकाता के निजी अस्पतालाें में इलाज कराती रही। उसे कैंसर राेगी मानकर भी इलाज हुआ। पर, 2.5 लाख खर्च रुपए हाेने के बाद अंतिम जांच में उसमें कालाजार की पुष्टि हुई। फिर, रामबाग स्थित कालाजार अस्पताल में इलाज कराया और सुई ली। अब वह स्वस्थ है।

वहीं, मामला सेंट्रल टीम के संज्ञान में आने के इसकी जांच की जा रही है। आखिर, खाेजी जांच अभियान में कालाजार का केस पकड़ में क्याें नहीं आया। बताया जाता है, महिला काे बुखार था। ऐसे में परिजनाें ने शहर व पटना के निजी अस्पताल में इलाज कराया, लेकिन कहीं भी कालाजार की पुष्टि नहीं हुई। अंत में महावीर कैंसर अस्पताल में भर्ती हाेकर जांच के दाैरान कालाजार की पुष्टि हुई।

इसके बाद उसे पीएमसीएच रेफर किया गया। वहां 14 दिन भर्ती हाेने की बात कही गई, परिजनाें ने इससे इनकार किया। इसके बाद रामबाग स्थित कालाजार रिसर्च सेंटर पहुंची महिला काे एक सुई लगाई गई। इसके बाद वह स्वस्थ है। परिजनाें के अनुसार, इस दाैरान तीन माह का समय लगा। इसमें उनके करीब 2.5 लाख रुपए खर्च हुए। इधर, कालाजार उन्मूलन काे लेकर जांच के लिए आई सेंट्रल टीम काे इसकी जानकारी मिली ताे जांच के आदेश दिए गए हैं।
कालाजार मरीज खाेजी अभियान पर सवाल
जिले में कालाजार मरीजाें की खाेज के लिए हर वर्ष दाे बार घर-घर खाेजी अभियान चलता है। आशा, एएनएम और मलेरिया विभाग की ओर से तीन दिनाें से अधिक जिन लाेगाें काे बुखार हाेता है, उनकी पहचान कर कालाजार की जांच की जाती है। रिपाेर्ट पाॅजिटिव हाेने पर इलाज शुरू हाेता है। इससे बचाव के लिए हर साल दाे बार दवा का छिड़काव भी हाेता है। इसकी माॅनिटरिंग राज्य व केंद्रीय स्वास्थ्य मंत्रालय करता है।

पीएमसीएच में हुई कालाजार की पुष्टि
पीड़ित मरीज ने मुजफ्फरपुर और पटना के एक बड़े निजी अस्पताल में अपना इलाज कराया। लेकिन दोनों जगहों पर कालाजार डिटेक्ट नहीं हुआ। स्थिति गंभीर हाेते जाने पर परिजन पीएमसीएच ले गए। वहां पर जांच में कालाजार की पुष्टि हुई। उसके बाद उक्त मरीज का इलाज मुजफ्फरपुर के ही रामबाग रिसर्च सेंटर में किया गया, मरीज पूरी तरह स्वस्थ है। मामले की जांच की जा रही है। -डाॅ. सतीश कुमार, जिला मलेरिया अधिकारी।

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