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इकलाैते बेटे ने कर ली आत्महत्या:लंबे बाल कटाने को कहा ताे इकलाैते बेटे ने फंदा लगा कर ली आत्महत्या

मुजफ्फरपुर10 दिन पहले
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  • बिलखती हुई मां बोली- इतनी सी बात पर ऐसा कर लेगा, विश्वास नहीं हाेता
  • ​​​​विप्रो में इंजीनियर था शशांक

मां ने जब लंबे बाल काे छाेटा कराने के लिए बाेला ताे इकलाैते 22 वर्षीय पुत्र शशांक शेखर उर्फ रंजन ने जंपिंग राेप से पंखे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। खबरा राेड स्थित रामपुरहरि निवास में रविवार की शाम सवा पांच बजे यह घटना हुई। घटना के वक्त मां महाश्वेता घाेष व बहन स्कूटी की सर्विसिंग कराने गई थी।

घर लाैटने पर गेट खाेलते ही बेटे काे फंदे से लटकते हुए देखा। फंदे से उतारकर उसे लेकर सदर अस्पताल पहुंची। जहां चिकित्सकाें ने उसे मृत बता दिया। मां ने बिलखते हुए कहा- अाजकल के बच्चे इस तरह छाेटी बाताें पर भी एेसा कर लेंगे? शशांक हमें तड़पता हुआ छाेड़ गया। शशांक बेंगलुरू में विप्राे कंपनी में इंजीनियर था।

इन दिनाें वर्क फ्राॅम हाेम में घर पर ही रह रहा था। महाश्वेता घाेष ग्रेजुएट इंस्ट्रक्टर हैं। मूल रूप से भागलपुर शहर के नयाटाेला माेहल्ला की निवासी हैं। उसके पति स्व. प्रदीप घाेष सरकारी नाैकरी में थे। पति की माैत के बाद बेटे व बेटी के साथ वह खबरा राेड में आकर रहने लगीं। नगर थाने के दाराेगा सुनील पंडित ने दुखियारी मां का बयान दर्ज किया है।

जिसके आधार पर काजी माेहम्मदपुर थाने में यूडी केस दर्ज किया जाएगा। मां ने राेते हुए बताया कि शशांक करीब एक हाथ लंबा बाल रखता था। जिसे घर के लाेग पसंद नहीं करते थे। इसलिए उसे अक्सर बाल छाेटा कराने के लिए कहते थे। काफी कहने पर गुस्से में एक इंच ही बाल कटवाता था। वह डिप्रेशन में आ गया था।

रविवार शाम में जंपिंग राेप से पंखे में फंदा लगाकर आत्महत्या कर ली। मां ने कई बार उससे कहा- विवाह कर लाे लेकिन वह तैयार नहीं था। नगर थानेदार ओम प्रकाश ने बताया कि शव काे पाेस्टमार्टम के लिए एसकेएमसीएच भेजा गया है। मां का बयान काजी माेहम्मदपुर थाने भेजा जाएगा।

मां ने कहा- दिन में खाना खाने वक्त काफी खुश दिख रहा था
मां ने कहा दिन में चिकेन बनाया था। उस समय शशांक काफी खुश था। शाम को दुनिया ही उजड़ चुकी थी। मुझे बेटी के लिए जिंदा रहना है। डाॅक्टर ने जब कहा, ही इज नाे माेर ताे मुझे विश्वास नहीं हुआ। वह हमें छाेड़कर कैसे मर सकता है।

आठ वर्ष का था शशांक तब पिता की हो गई थी मौत
मुशहरी में पोस्टेड महाश्वेता घोष ने बताया कि शशांक जब आठ साल का था तब उसके पिता प्रदीप घोष वर्ष 2007 में हमें छोड़ दुनिया से चले गए। मैंने हिम्मत नहीं हारी। बड़े नाज व लाड़ से बेटा व बेटी को पाला। शशांक को यादवपुर स्थित काॅलेज से सिविल इंजीनियरिंग की पढ़ाई कराई। उसे विप्रो कंपनी में जाॅब लगा। वह बहुत खुश रहता था।

यकीन नहीं होता है कि अब वह नहीं रहा। मुझे यह दिन देखना होगा, कभी सोचा नहीं था। बाल कटाने के लिए कहने पर नाराज होकर कहता कि मैं वर्क प्लेस पर चला जाऊंगा। कभी परेशानी की कोई बात नहीं बताई। फिर भी मैं कहती थी साइकेट्रिस्ट से दिखवा लो तो वह मना कर देता था।

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