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डीटीओ में अव्यवस्था:लर्निंग हाे या स्थाई लाइसेंस यहां ताे सारे स्लाॅट दलालों के लिए बुक; एडमिनिस्ट्रेटर चाहे जिसकाे एक्सेस दे दे, जिसे मर्जी नहीं दे

मुजफ्फरपुर2 महीने पहले
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डीटीओ में सप्ताह में दो ही दिन ड्राइविंग टेस्ट हाेता है, इसलिए 8000 से अधिक आवेदन अटके, ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग में 30 से 45 दिन की वेटिंग है। - Dainik Bhaskar
डीटीओ में सप्ताह में दो ही दिन ड्राइविंग टेस्ट हाेता है, इसलिए 8000 से अधिक आवेदन अटके, ऑनलाइन स्लॉट बुकिंग में 30 से 45 दिन की वेटिंग है।

दोपहिया और चारपहिया वाहनों के परमानेंट या लर्निंग ड्राइविंग लाइसेंस के लिए आम लोगों को मशक्कत करनी पड़ रही है। हर दिन दर्जनों लोग लाइसेंस के लिए विभाग का चक्कर लगाते दिख जाएंगे। परिवहन विभाग ने पारदर्शिता के लिए एम परिवहन एप के जरिए सभी प्रक्रिया ऑनलाइन कर दी है। लेकिन, इसकी खामियों के कारण दलाल और साइबर कैफे संचालकों के पाै बारह हैं। सुबह 7 से रात 10 बजे तक आम आदमी अपने मोबाइल, डेस्कटॉप या लैपटॉप से स्लॉट बुक नहीं कर पाता।

एरर बता स्लॉट बुकिंग अन-सक्सेसफुल हो जाता है। दूसरी ओर, दलाल और साइबर कैफे संचालक मोटी रकम लेकर कुछ ही घंटों बाद का स्लॉट बुक कर आवेदक को दे देते हैं। ज्ञात हाे कि जिले में परमानेंट लाइसेंस के लिए सप्ताह में 2 दिन ही ड्राइविंग टेस्ट हाेता है। पुलिस लाइन मैदान पर एमवीआई दोनों दिन में अधिकतम 100 टेस्ट ले पाते हैं।

राेजाना एम परिवहन पर 144 स्लाॅट बुकिंग तय है। यानी हर सप्ताह 864 आवेदन हाेते हैं। पेंडिंग बढ़ कर 8000 से अधिक हो चुका है। एम परिवहन पोर्टल पर अगले साल 2 जनवरी तक स्लाॅट बुक है। रात दाे बजे या किसी भी समय कुछ देर के लिए साइट खुलती भी है, ताे जिले भर में मुश्किल से एक या दाे लाेग स्लाॅट बुक कर पाते हैं।

लक्ष्य पारदर्शिता, पर हो रहा फर्जीवाड़ा

केस-1 : कैफे से स्लॉट बुक, दिलाएगा टेस्ट
बृजबिहारी गली के पेशे से एमआर रमेश कुमार लाइसेंस के लिए 10 दिनाें तक एम परिवहन साइट से स्लाॅट बुक नहीं करा सके। साइबर कैफे वाले काे 300 रु. दिए। 3 जनवरी 2022 के लिए स्लाॅट बुक हाे गई। एमवीआई से पासिंग के लिए 2000 रु. दलाल ने ले लिया।

केस-2 : थक कर दलाल को दिए 2000 रु.
मेहंदी हसन चौक के रहने वाले असगर अली 8 दिनों से लर्निंग लाइसेंस के लिए स्लॉट बुक कराने काे सभी जतन किए। लेकिन, स्लॉट बुक नहीं हुआ। सोमवार को अंतत: उन्होंने एक दलाल काे 2000 रुपए दिए और साेमवार की शाम काे ही स्लॉट बुकिंग हाे गई।

भास्कर एक्सपर्ट : क्यों दलाल के चंगुल में फंस रहे लोग
किसी वेबसाइट या पोर्टल को तैयार करने में आमतौर पर इस्तेमाल होने वाले सॉफ्टवेयर (पीएचपी, पाइथॉन से कोडिंग की जाती है) में ऐसी व्यवस्था होती है कि जैसे ही कोई यूजर पेज खोलने के लिए रिक्वेस्ट भेजता है, तो इसमें लॉगइन और पासवर्ड भी शामिल हाेता है। पोर्टल के किसी भी यूजर के लॉगइन और पासवर्ड पर पाबंदी (रिस्ट्रिक्शन) लगा कर रखी जा सकती है।
​इसमें आंशिक या काफी स्लो पेज खुलना शामिल है। संभव है कि नॉर्मल यूजर के लिए संबंधित पोर्टल किसी खास समय में खुले ही नहीं। किसी खास समय में उसकी स्पीड नियंत्रित कर दी। वहीं, एजेंट के लॉगइन को विशेष तरजीह दी जा सकती है। साइट या एप एडमिनिस्ट्रेटर चाहे, ताे उसके रिक्वेस्ट को निर्बाध तरीके से एक्सेस दे सकता है। ऐसी सेटिंग यूजर वाइज संभव है।

ऑनलाइन प्रक्रिया पारदर्शिता काे लेकर अपनाई गई है। इसमें स्थानीय स्तर पर कुछ नहीं किया जा सकता। कोरोना संक्रमण काल में काफी बड़ी संख्या में लोगों ने स्लॉट बुक कराए। लेकिन, सभी कामकाज बाधित थे। उन लोगों का ड्राइविंग टेस्ट नहीं हो पाया था। इसलिए स्लॉट पेंडिंग हैं। अब 450 का चालान कटा आवेदक ड्राइविंग टेस्ट दे सकते हैं।
- रणजीत कुमार, एमवीआई, मुजफ्फरपुर

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