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किसानों को बताए उन्नत तरीके से खेती करने के तरीके:किसान जीरो टिलेज से करें खेती, इस तकनीक में जुताई नहीं करनी पड़ती है, उत्पादन भी 25% बढ़ेगा

पुपरी15 दिन पहले
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  • कृषि विज्ञान केन्द्र में कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का किया गया आयोजन

कृषि विज्ञान केन्द्र सीतामढ़ी, बल्हा के प्रशिक्षण सभागार में शुक्रवार को कृषक प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। कार्यक्रम का उद्घाटन मुख्य अतिथि इफको सीतामढ़ी के क्षेत्रीय प्रबंधक शांतनु कुमार ने दीप प्रज्वलित कर किया। मुख्य अतिथि श्री कुमार ने कहा कि किसान तकनीकी ज्ञान के अभाव में वैज्ञानिक तरीका से बेहतर खेती नहीं कर पाते हैं। जिससे लागत या खर्च अधिक एवं उत्पादन कम होता है। परिणामस्वरूप किसानों को शुद्ध लाभ नहीं हो पाता है। बताया कि बेहतर उत्पादन के लिए अच्छे बीज का चुनाव, बीज उपचार, संतुलित खाद एवं उर्वरक का प्रयोग, समेकित कीट एवं रोग नियंत्रण आदि की जानकारी आवश्यक है।
जीरो टिलेज को सरकार कर रही प्रोत्साहित, उठाएं लाभ
वही केन्द्र के वरीय वैज्ञानिक एवं प्रधान डॉ. राम ईश्वर प्रसाद ने बताया कि आज जलवायु अनुकूल खेती करने की जरूरत है। ताकि किसानों को बेहतर आय प्राप्त हो सके। इसके अंतर्गत जीरो टिलेज से गेहूं, दलहन, तिलहन, मक्का आदि की खेती काफी सरलता से की जा सकती है। इस तकनीक से खेती करने पर समय पर खेती हो जाती है। क्योंकि इस तकनीक में खेतों की जुताई नहीं होती है। जिस कारण जुताई खर्च भी कम हो जाती है। साथ ही उर्वरक, सिंचाई एवं मजदूरी खर्च की काफी बचत होती है। साथ ही उत्पादन में 20 से 25 प्रतिशत की वृद्धि होती है। इसलिए जीरो टिलेज से खेती को बढ़ावा देने की जरूरत है। इस तकनीक में सरकार के द्वारा भी विभिन्न योजनाएं चलाई जा रही है, जिसका किसान लाभ ले सकते हैं।

मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर विभिन्न फसलों की खेती करना चाहिए
कार्यक्रम में उद्यान वैज्ञानिक मनोहर पंजीकार, सस्य वैज्ञानिक सच्चिदानंद प्रसाद, मौसम वैज्ञानिक रणधीर कुमार, मत्स्य सहायक प्रकाश चंद्रा ने कहा कि मौसम के पूर्वानुमान के आधार पर विभिन्न फसलों की खेती करना चाहिए। इससे प्राकृतिक आपदा के भय को कम किया जा सकता है। इसके लिए कृषि विज्ञान केंद्र द्वारा किसानों को सप्ताह में दो बार विभिन्न माध्यमों से मौसम के पूर्वानुमान की जानकारी दी जाती है। जिससे किसानों को मौसम अनुकूल खेती करने में काफी मदद मिलती है। कार्यक्रम में उदय कुमार, रामश्रेष्ठ राय, संजीत कुमारी, रेणु कुमारी, पूजा कुमारी, मुनचुन कुमारी, मनोज कुमार, उमेश कुमार समेत कुल 60 किसानों ने भाग लिया।
जैविक खेती करना होगा लाभप्रद
कार्यक्रम को संबोधित करते हुए पशु चिकित्सा वैज्ञानिक डॉ. किंकर कुमार ने बताया कि बेहतर स्वास्थ्य के लिए गुणवत्तापूर्ण एवं जैविक खेती करना काफी लाभप्रद है। इसके लिए पशुपालन एवं दूध उत्पादन जरूरी है। क्योंकि जैविक खेती के लिए गोबर सबसे महत्वपूर्ण है। जिसके द्वारा कम्पोस्ट या वर्मी कम्पोस्ट का निर्माण किया जाता है। गोबर पशुओं से प्राप्त किया जाता है, जिसे सड़ाकर बेहतर खाद बनाया जाता है। कहा कि पशुपालन से दूध उत्पादन एवं जैविक खेती दोनों साथ-साथ हो पाएगी एवं किसानों की आमदनी में भी काफी वृद्धि हो पाएगी।

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