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जानकारी:जैविक खेती का मूल आधार होता है ट्राइकोडर्मा

पूसा8 दिन पहले
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  • ट्राइकोडर्मा मिट्टी में पाया जाने वाला एक ऐसा फफूंद है जो मिट्टी के हानिकारक फफूंद का नाश करता है

ट्राइकोडर्मा जैविक खेती का मूल आधार होता है। यह खेतों में रोगकारक जीवों की वृद्धि को रोककर या उन्हें मारकर पौधों को रोगमुक्त करता है। इतना ही नहीं ट्राइकोडर्मा पौधों की रासायनिक प्रक्रियाओं को भी परिवर्तित कर पौधों में रोग रोधी क्षमता को बढ़ाता है। बिहार के किसानों को ट्राइकोडर्मा के उपयोग एवं इससे होने वाले फायदों के बारे में जानकारी होना बेहद जरूरी है। ये बातें डॉ. राजेंद्र प्रसाद केंद्रीय कृषि विवि पूसा के सह निदेशक अनुसंधान व अखिल भारतीय फल अनुसंधान परियोजना के प्रधान अन्वेषक डॉ. संजय कुमार सिंह ने कही।

उन्होंने बताया कि ट्राइकोडर्मा के प्रयोग से खेतों में रासायनिक दवाओं विशेषकर कवकनाशी पर निर्भरता काफी कम हो जाता है। उन्होंने बताया कि ट्राइकोडर्मा मिट्टी में पाया जानेवाला एक ऐसा फफूंद है जो मिट्टी के हानिकारक फफूंद का नाश कर पौधों को स्वस्थ्य व निरोग बनाता हैं। यह पादप रोगों के प्रबंधन के लिए खेतों में एक तरह से प्राकृतिक बायो कंट्रोल एजेंट का काम करता हैं। उन्होंने बताया की ट्राइकोडर्मा क्या है, इसे कैसे तैयार करें, इसका उपयोग कैसे किया जाए ऐसे तमाम तरह के प्रश्न है जिसका जवाब प्रायः किसानों के पास नही होता है। खेती किसानी करने वाले किसानों के लिए ट्राइकोडर्मा के बारे में जानना अत्यंत जरूरी हैं। उन्होंने बताया कि ट्राइकोडर्मा हाइपोक्रेसी परिवार के कवक का एक जीनस है। जो सभी मिट्टी में मौजूद रहता है। यह सर्वाधिक और प्रचलित खेती में प्रयोग होने वाला कवक हैं।

किसान ट्राइकोडर्मा से क्या-क्या करें और इसके फायदे

कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि किसान ट्राइकोडर्मा से पौधशाला के मिट्टी को उपचारित कर सकते है। किसान सभी तरह के पौधों को खेतों में लगाने से पूर्व पौधों के जड़ाें को ट्राइकोडर्मा के घोल में डुबाने के बाद ही उसे लगाएं। किसान पौध रोपण के समय खेत में प्रर्याप्त मात्रा में ट्राइकोडर्मा का प्रयोग कार्बनिक खाद जैसे कंपोस्ट, खल्ली आदि के साथ मिलाकर करें। इसके अलावे किसान खड़ी फसल में भी पौधों के जड़ क्षेत्र के आस पास ट्राइकोडर्मा का घोल समय समय पर डालते रहें। किसान अपने खेतों में प्रत्येक साल हरी खाद का अधिक से अधिक प्रयोग करें साथ ही साथ खेतों में प्रर्याप्त नमी भी बनाएं रखें।

किसान ट्राइकोडर्मा का ऐसे करें प्रयोग

कृषि वैज्ञानिक ने बताया कि किसान किसी भी तरह के बीजों की बुआई से पूर्व प्रति किलों बीज की दर से 6 से 10 ग्राम ट्राइकोडर्मा पाउडर मिलाकर बीज को शोधित करने के बाद ही बीजों की बुआई करें। इसके अलावे किसान अपने अपने पौधशाला में भी नीम की खल्ली, केंचुआ खाद या सड़ी हुई गोबर के खाद के साथ 10 से 25 ग्राम ट्राइकोडर्मा मिलाकर प्रति वर्ग मीटर के हिसाब से मिट्टी को शोधित कर सकते हैं। किसान जब भी अपने खेतों में सनई या धैचा को हरी खाद के उद्देश्य से पलटने का काम करें तो ठीक उसके बाद कम से कम 5 किग्रा प्रति हेक्टेयर की दर से अपने खेतों में ट्राइकोडर्मा पाउडर का बुरकाव जरूर कर दें।

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