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ग्राउंड रिपोर्ट:सेरवा खरैया टाेला के पास कटाव कर रही मसान नदी, नहीं रोका गया तो बरसात में 10 गांवों की 30 हजार आबादी होगी प्रभावित

सेरवा, रामनगर6 दिन पहलेलेखक: कृष्णकांत मिश्र
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रामनगर की जोगिया पंचायत के शेरवा गांव में कटाव करती मसान नदी। - Dainik Bhaskar
रामनगर की जोगिया पंचायत के शेरवा गांव में कटाव करती मसान नदी।
  • चार साल पहले तक मसान पश्चिम रायबारी, महुअवा, झारमहुई से होकर बहती थी, वहां बांध बना दिया गया, उसके बाद से नदी की धारा मुड़ गई
  • रामनगर सीओ की सूचना के चार माह बाद भी एंटी एरोजन कार्य के लिए बाढ़ का इंतजार कर रहा था प्रशासन, आई बाढ़ तो गिराया बालू

नेपाल से निकलकर शिवालिक रेंज होते हुए गोर्वधना वन क्षेत्र से होकर बहने वाली मसान नदी को जिले की सबसे प्रलंयकारी नदी मानी जाती है। अन्य नदियों के वनिस्पत यह नदी कुछ ही देर में फुल हो जाती है। हल्की बारिश में भी नदी फुल हो जाती है।

इसकी वजह से इस किनारे बसे गांवों के लोग सालोंभर भयभीत रहते हैं। अब यही प्रलयंकारी नदी मसान रामनगर प्रखंड की जोगिया पंचायत में कटाव कर सेरवा खरैया टाेला गांव से महज तीन सौ मीटर की दूरी पर पहुंच गई है।

सेरवा गांव से करीब एक किलोमीटर दूर बहने वाली मसान पिछले साल से ही गांव के उतर-पश्चिम में कटाव कर रही है। इस साल भी यास के प्रभाव से हुई चार दिन की बारिश में सेरवा गांव में बाढ़ का पानी पहुंच गया था। इसके बाद प्रशासन जागा और आनन-फानन में बाढ़ समाप्ति के बाद चार दिन पहले एंटी एरोजन कार्य के लिए बालू गिराया है। रामनगर सीओ द्वारा बाढ़ प्रभावित इलाकों को चिह्नित कर वहां कटाव निरोधी कार्य की सूचना के बाद भी प्रशासन सजग नहीं हुआ। जब यास के प्रभाव से बाढ़ आई तो एंटी एरोजन कार्य के लिए बालू गिराना शुरू कर दिया है।

पिछले साल नदी की धारा उतर-पश्चिम में कटाव करते हुए गांव तक पहुंच गई थी

सेरवा खरैयाटोला निवासी कमरुद्दीन अंसारी, एमानुल्लाह अंसारी, रहमान मियां आदि ने बताया कि पहले भी कई बार मसान का पानी पश्चिम व दक्षिण से गांव में आ चुका है। लेकिन तब कटाव नहीं हुआ था। बाढ़ आई और चली गई। इधर, चार पांच साल पहले तक मसान गांव से एक किलोमीटर पश्चिम रायबारी, महुअवा, झारमहुई से होकर बहती थी। इसके बाद वहां बांध बना दिया गया। इसके बाद नदी इधर की ओर मुड़ गई। पिछले साल तो नदी की तेज प्रवाह ने गांव के उतर-पश्चिम में कटाव करते हुए गांव तक पहुंच गई। इसके बाद पूरा गांव जलमग्न हो गया। इसके बाद से कटाव का डर बना हुआ है।

सेरवा में कटाव हुआ तो तीन पंचायत होंगी प्रभावित

ग्रामीण खुर्शेद आलम, साकिर अंसारी, दिलनवाज आदि ने बताया कि अगर सेरवा खरैया टोला कट गया तो यहां की 700 की आबादी के साथ रामनगर अंचल के तीन पंचायत जोगिया, महुई व तेलपुर पंचायत के सेरवा, नवकाटोला, महुई, जोगिया, बड़गो, बहुअरी, तेलपुर आदि दस गांवों की करीब 30 हजार आबादी बाढ़ से प्रभावित हो जाएगी। क्योकि सेरवा गांव के कटाव के बाद पानी को इन गांवों में जाने से नहीं रोका जा सकता है।

नहीं होने दिया जाएगा कटाव

जल निस्सरण विभाग के कार्यपालक अभियंता लाल बहादुर गुप्ता ने बताया कि आने वाली चुनौतियों काे ध्यान में रखकर ही बालू स्टाक किया गया है। अधीक्षण अभियंता सहित वरीय अधिकारियों की टीम जल्द ही सेरवा समेत आसपास के अन्य मसान तटवर्ती गांवों का भ्रमण करेंगी। गांव को कटाव से उबारने के प्रयास में कोई कोर कसर नहीं छोड़ा जाएगा।

बांध बनाए बिना कटाव रोधी का कोई फायदा नहीं, नदी का पानी हमेशा बहा ले जाएगा

वार्ड 14 के पार्षद रउफ आलम सहित अन्य ग्रामीणों ने बताया कि पिछली साल के बाढ़ के बाद बगहा एसडीएम, रामनगर बीडीओ और सीओ गांव में आए थे। उस समय फ्लड फाइटिंग से तीन बार बैरकेटिंग कर धारा रोकने का प्रयास किया गया। लेकिन तीनों बार नदी का पानी उसे बहा ले गया। इसके बाद कोई काम नहीं हुआ। इस साल यास तुफान की वजह से पहाड़ी इलाकों में हुई बारिश की वजह से आई बाढ़ जब गांव में घुसी उसके बाद प्रशासन जगा और बालू गिराना शुरू किया है। ग्रामीणों ने बताया कि जबतक इस ओर भी बांध नहीं बनाया जाता और दोनों बांधों के बीच नदी प्रवाहित नहीं होती तबतक कितना भी कटाव निरोधी कार्य होगा, उसे नदी बहा ले जाएगी।

चार माह पहले सीओ ने प्रशासन को लिखा था पत्र

बाढ़ पूर्व तैयारियों के मद्देनजर बाढ़ कटाव वाले इलाकों को रामनगर सीओ ने फरवरी में ही चिन्हित किया था। पूरे अंचल में कुल 17 स्थानों को चिन्हित किया गया था। एंटी एरोजन कार्य के लिए चिन्हित की गई सूची में सबसे उपर सेरवा का ही नाम था। अपर समाहर्ता पश्चिम चंपारण को दिए पत्र के पत्रांक 92 दिनांक 02 फरवरी 2021 को रामनगर सीओ ने रामनगर अंचल में मसान, सिंघहा, रघिया, धमीनाहां, भलुई आदि नदियों से कटने वाले 17 स्थानों को चिन्हित कर वहां बाढ़ पूर्व एंटी एरोजन कार्य कराने की बात कही थी। लेकिन चार माह प्रशासन की तंद्रा भंग नहीं हुई।

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