महापंचायत का आयोजन:चीनी मिल को चलाने के लिए कमेटी बनाने का दिया सुझाव

रीगाएक महीने पहले
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स्थानीय किसान भवन परिसर में चीनी मिल किसान कामगार महापंचायत का आयोजन किया गया। इसकी अध्यक्षता डॉ. आनंद किशोर ने की। अपने अध्यक्षीय भाषण में डॉ. आनंद किशोर ने कहा कि चीनी मिल के बंद होने का एहसास 5 वर्ष पूर्व ही होने लगा था। उसी समय से किसानों और मजदूरों का भुगतान लगातार लंबित होने लगा था।

किसान नेता ने कहा कि इस बीच मुख्यमंत्री नीतीश कुमार को कई बार मिलकर आगाह किया गया, सरकार ने समय पर कोई कार्रवाई नहीं की। चीनी मिल 130 करोड़ किसानों का बकाया रखकर बिना सूचना दिए बंद कर दिया। इसमें चीनी मिल के मजदूरों का भी लगभग 20 करोड़ बकाया है। इस बीच प्रमुख उद्यमी पीएम सिंह ने महापंचायत को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य सरकार खासकर चीनी मिल के प्रति उदासीन है। बिहार में 29 चीनी मिल थे, आज मात्र 7 चीनी मिल ही चालू है। बैंक का 65 करोड़ लगभग बकाया है।

दिल्ली में हुई बैठक का कोई नतीजा नहीं निकल सका है। इसके लिए सरकार चीनी मिल का मूल्यांकन करे। उन्होंने मिल को चलाने के लिए 25 सदस्यीय कमेटी बनाने का सुझाव दिया। सामूहिक सहयोग से मिल चलाने की बात बताई। कहा कि आमदनी का 80% किसानों और मजदूरों का भुगतान होगा, बाकी मिल के देखरेख में खर्च किया जा सकता है।

चीनी मिल से 15 मेगावाट बिजली का उत्पादन हो सकता है और उससे होने वाले आमदनी से 3 वर्ष में किसानों और मजदूरों का एवं बैंकों का बकाया भुगतान हो किया जा सकता है। कहा कि इससे चीनी मिल सुचारू रूप से चलने लगेगा तो किसान स्वत: गन्ने की खेती प्रारंभ कर देंगे। चीनी मिल का देखरेख 25 सदस्यीय कमेटी को करना चाहिए।

मौके पर किसान नेता राजेश कुमार बागी, पारसनाथ सिंह, नरेंद्र कुमार सिंह, कुमार प्रभुनाथ, अमरेंद्र कुमार सिंह, मुकेश भूषण सिंह, मजदूर के पूर्व अध्यक्ष लालबाबू सिंह, राम नंदन ठाकुर, मजदूर नेता अशोक कुमार सिंह, मनोज कुमार, किसान नेता मोहन महतो, नवीन ठाकुर आदि उपस्थित थे।

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