अनदेखी:सिंघिया में 230 आंगनबाड़ी केंद्रों में 128 भाड़े के मकान में 59 सरकारी भवन में हो रहे हैं संचालित, बच्चों को परेशानी

समस्तीपुर9 महीने पहले
  • कॉपी लिंक
  • बुनियादी स्वास्थ्य, पोषण से संबंधित कार्य में होती है परेशानी, 230 में 43 आंगनबाड़ी केंद्रों को ही है अपना भवन

प्रखंड के ग्रामीण क्षेत्रों में मां, बच्चे की देख रेख कुपोषण से निपटने के साथ बुनियादी स्वास्थ्य की देखभाल और बच्चे को पूर्व विद्यालय की गतिविधियां की बढ़ावा देने के लिए 230 आंगनबाड़ी केंद्रों के जरिए प्रेरित किया जा है। लेकिन प्रखंड क्षेत्र के पंचायतों में महज 43 आंगनबाड़ी केंद्रों को ही अपना भवन नसीब हो पाया है। आज भी 128 आंगनबाड़ी केंद्र किराए के मकान में और 59 आंगनबाड़ी केंद्र अनुसूचितजनजाति दरवाजा स्कूल व सरकारी भवनों में संचालन हो रहा है। वर्षों बाद के भी 187 आंगनबाड़ी केंद्रों को अपना भवन नसीब नहीं हो पाया है। किराए की मकान में संचालन होने के कारण अक्सर बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाएं पोषण से संबंधित कार्य आदि में सेविका व सहायिका परेशाानी उठानी होती है। हालांकि कोरोना को लेकर बच्चों की स्कूल पूर्व शिक्षा की बढ़ावा बंद रखी गई है। वहीं इन केंद्रों पर गर्भवती महिलाएं की बुनियादी स्वास्थ्य व पोषण से संबंधित कार्य की संचालन होती है।
विभाग की माने तो किराए की मकान में चलने वाले आंगनवाड़ी केंद्रों की भाड़ा | 1000 रुपए प्रति महीने की दर से तय है। फिलहाल सभी किराए की भवनों में चलने वाले केंद्रों को राशि दिया जा रहा है। लेकिन मुख्य सचिव के निर्देशानुसार किराए पर चलने वाले सभी केंद्रों को नजदीकी सरकारी स्कूलों के भवन संचालन करने की निर्देश मिले है। स्थानीय लोगों की माने तो अधिकतर जगह वार्डों में सरकारी स्कूल नहीं है। इसके लिए कई पंचायत में दर्जनों केंद्रों के बच्चों को स्कूल आने जाने के लिए लंबी दूरी तय करनी पड़ेगी। दूसरी ओर प्रशासनिक उदासीनता के कारण कई पंचायतों में आंगनवाड़ी केंद्र की भवन आज भी अधूरा पड़ा है। कारण जो भी हो इन भवनों का वर्ष 2011 में 6 लाख से अधिक राशि से निर्माण कार्य शुरू हुआ था जो आज भी अधर में लटका हुआ है।
 अर्द्धनिर्मित भवनों में बीते 10 वर्षों में न ही प्लास्टर कराई गई है। न ही जमीन बनाए गए है। न खिड़की लगी गई न दरवाजे लगाएं गए है। आश्चर्य है कि इन जगहों पर अक्सर पदाधिकारियों का आना-जाना लगा रहता है। लेकिन किसी ने आज तक इन अधूरे पड़े भवनोंं की ओर ध्यान तक नहीं दिए। इन भवनों की स्थिति है की वर्षों से निर्माण की आस में यह भवन अब जर्जर होने लगा है। स्थानीय ग्रामीणों के अनुसार निर्माण कार्य में आए रुकावट के बाद कई बार प्रशासन से भवनों के निर्माण कार्य पूर्ण करवाने के लिए मांग की गई। लेकिन प्रशासन द्वारा आश्वासन ही मिलता रहा इस दौरान पंचायत के प्रतिनिधि व मुखिया बदल गए पंचायत सचिवों का तबादला हो गया। इसके कारण आज तक आंगनबाड़ी केंद्र भाड़े की घर स्कूल अनुसूचितजनजाति दरवाजे आदि सरकारी भवनों में में चल रही है।

खबरें और भी हैं...