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अनदेखी:हसनपुर में 40 में 26 बोरिंग है खराब, सिंचाई कार्यालय परिसर में 15 करोड़ की मशीनें बेकार

समस्तीपुर2 दिन पहले
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रामपुर गांव स्थित लघु सिंचाई विभाग कार्यालय परिसर में धूल फांक रही हैं नई मशीनें। - Dainik Bhaskar
रामपुर गांव स्थित लघु सिंचाई विभाग कार्यालय परिसर में धूल फांक रही हैं नई मशीनें।
  • पिछले दाे साल से लघु सिंचाई विभाग कार्यालय परिसर में रखी हुई है नई मशीन

प्रखंड की कुल 20 पंचायतों के अलग-अलग गांवों में लगाए गए लघु सिंचाई विभाग के 40 बोरिंगों में से 26 नलकूप पिछले 10 सालों से खराब है। इनके खराब होने का मुख्य कारण छोटे-बड़े मशीनों को खराब होना है। विभागीय अनदेखी के कारण न ही इन मशीनों को ठीक किया जा रहा ह और न ही खराब हुए मशीनों की जगह पर नए मशीन ही लगाई जा रही है। जबकि प्रखंड के ही रामपुर गांव स्थित लघु सिंचाई विभाग के कार्यालय परिसर में करीब 15 करोड़ से अधिक रुपए की नई मशीनें खुले आसमान के नीचे धूल फांक रही है। पिछले दो सालों से ये सभी मशीनें, धूलकण, कड़ी धूप व बारिश के पानी के संपर्क में आकर जंगयुक्त हो चुके हैं। लेकिन इन मशीनों के सदुपयोग के लिए किसी विभागीय पदाधिकारी व कर्मचारी की नजर इस ओर नहीं जाती।

जबकि इस कार्यालय पर विभागीय पदाधिकारियों व कर्मचारियों का कभी-कभी आना जाना लगा ही रहता है। क्षेत्र के किसानों का कहना है कि यदि धूल फांक रहे इन मशीनों का सदुपयोग सही ढंग से किया जाए तो जितने नलकूप खराब पड़े हैं, उन्हें फिर से संचालित किया जा सकता है। इससे मशीन का भी उपयोग हो जाएगा व बंद पड़े बोरिंग भी चालू हो पाएंगे। इससे सरकारी यंत्रों के बर्बादी पर रोक भी लग पाएगी। परिणाम यह होगा कि बोरिंग से किसान सिंचाई का लाभ ले पाएंगे।

ये सभी मशीनें, धूलकण, कड़ी धूप व बारिश के पानी जंगयुक्त हो चुका है

मशीन की खराबी से बंद पड़े हैं ये बोरिंग, नहीं हो रही है ठोस पहल
मशीन खराबी के कारण प्रखंड के जो 26 नलकूपें बंद पड़े हैं। उनमें प्रखंड के ही देवरा पंचायत के सपरी गांव, नयानगर, दाथ, रामपुर, सकरपुरा, कुंडल, पटसा, काले नरपतनगर सहित कई गांवों स्थित बोरिंग हैं। शेष बचे 14 बोरिंगों का संचालन भी सही तरीके से नहीं हो पा रहा है। क्षेत्र के किसानों की शिकायत पर विभाग के स्थानीय पदाधिकारियों द्वारा वरीय पदाधिकारियों को इस संबंध में लिखा जा चुका है। लेकिन कोई आदेश नहीं आने के कारण कोई ठोस पहल करने से प्रखंड स्तरीय व अनुमंडल स्तरीय पदाधिकारी कतराते हैं।

पटसा गांव में लगाई गई बोरिंग पिछले 40 सालों से है बंद
हसनपुर प्रखंड की औरा पंचायत के पटसा गांव में 1978 में लघु सिंचाई विभाग के तत्कालीन मंत्री गजेंद्र प्रसाद हिमांशु के पहल पर लगाया गया बोरिंग भी पिछले 40 सालों से बंद पड़ा है। वर्तमान समय में इस स्टेट बोरिंग का मशीन खराब हो चुका है। साथ ही इसका भवन भी जर्जर हो चुका है। इस कारण यह स्टेट बोरिंग धरातल पर केवल शोभा की वस्तु बनकर रह गई है। गांव के किसानों को इस स्टेट बोरिंग से सिंचाई की सुविधा नहीं मिल पा रही है।​​​​​​​

खरीफ की फसल को लेकर बढ़ जाती है परेशानी
प्रखंड क्षेत्र के अधिकतर बोरिंगों के खराब होने से किसानों को खरीफ फसलों के सिंचाई की चिंता सताने लगती है। नियमित रूप से बारिश नहीं होने के कारण खरीफ फसलों जैसे गन्ना, धान की फसलों की सिंचाई सही ढंग से नहीं हो पाती है। क्षेत्र के किसान आर्थिक रूप से उतने सुदृढ़ नहीं हैं कि भाड़े के पंपसेट से सिंचाई कर सके। इस स्थिति में प्रत्येक साल बोरिंग के माध्यम से सिंचाई की आश रखते हैं। लेकिन पिछले 10 सालों से विभागीय तौर पर खराब बोरिंगों को ठीक कराने के लिए कोई पहल नहीं की जा रही है। इस कारण उनकी आशा पर पानी फिर जाता है और फसलें मारी जाती हैं। इस साल भी क्षेत्र के किसान खराब बोरिंगों के ठीक कराए जाने की उम्मीद लिए बैठे हैं। लेकिन किसी तरह की कोई विभागीय सक्रियता नहीं दिखने से उनके उम्मीद पर पानी फिरता नजर आ रहा है।

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