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कहर:रोसड़ा में खतरे के निशान से 3.87 सेमी. ऊपर बह रही है बूढ़ी गंडक नदी, लोगों में दहशत

समस्तीपुर9 दिन पहले
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  • शिवाजीनगर के गुलाराही स्थित करेह नदी के तटबंध पर स्लुइस गेट से तेज रिसाव पर पाया काबू

बूढ़ी गंडक नदी के जलस्तर में लगातार हो रहे वृद्धि से बाढ़ की आशंका से लोगों में दहशत कायम है। शनिवार की दोपहर नदी का जलस्तर खतरे के निशान से 3.87 सेमी. उपर बह रहा था जो कि वर्ष 1987 से मात्र 1 सेमी. कम है। बाढ़ नियंत्रण प्रमंडल रोसड़ा के सहायक अभियंता चन्द्रशेखर आजाद ने बताया कि फिलहाल नदी का जलस्तर स्थिर है। दूसरी ओर नदी के तेज धारा में जगह - जगह कटाव जारी है। यहां बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य जोरो पर है। संवेदनशील स्थानों में शहर के सूर्य मंदिर स्थित राजेन्द्र आश्रम के अलावा रहुआ धर्मपुर, रजवाड़ा आदि स्थानों पर विशेष निगरानी और तत्परता बरती जा रही है। करेह नदी के जलस्तर में भी लगातार वृद्धि से लोगों की परेशानी बढ़ती ही जा रही है। लोग रतजगा कर तटबंध की सुरक्षा में लगे रहते हैं।

वहीं शनिवार को शिवाजीनगर प्रखंड के करेह नदी के बायां तटबंध गुलाराही , बुनियादपुर के समीप बने स्लुइस गेट से पानी का तेज रिसाव होने लगा। कानोंकान इसकी जानकारी मिलते ही लोगों में अफरा - तफरी का माहौल कायम था। मगर स्थानीय लोगों एवं विभागीय पदाधिकारियों व मजदूरों ने पूरी तत्परता के साथ पानी के रिसाव पर काबू पाया। कनीय अभियंता चन्द्रशेखर सिंह ने बताया कि संवेदनशील स्थानों पर जोर शोर से बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य जारी है। हलांकि पानी के तेज धारा के कारण जगह - जगह तटबंध पर खतरा उत्पन्न हो गया है । नदी का जलस्तर फिलहाल वर्ष 1987 के निशान को छूने पर है।

संवेदनशील स्थानों पर जोर-शोर से बाढ़ सुरक्षात्मक कार्य जारी, स्थानीय लोग भी रह रहे हैं जागरूक

शिवाजीनगर के गुलाराही के समीप स्लुइस गेट से पानी के रिसाव स्थल पर लोगों की भीड़।
रोसड़ा रेल पुल के पास जलस्तर में वृद्धि का नजारा।

सिंघिया में कमला, करेह व जीवछ नदी का हर दिन बढ़ रहा है पानी, स्थिति बनती जा रही है खतरनाक, मुश्किल में लोग

प्रखंड क्षेत्र में कमला, करेह व जीवछ नदी की प्रति दिन बढ़ता जलस्तर खतरनाक बनती जा रही है। दोनों नदी की 15 दिनों हुई पानी बढ़ोतरी गंभीर रूप ले लिया है। प्रखंड क्षेत्र में हर ओर सर्फ पानी ही नजर आ रहा। गांव पानी में घिरकर टापुओं में तब्दील हो चूका है। गांव तक जाने वाली सडकों पर पानी बह रहे है। लोगों को गांव से निकलना मुश्किल बना हुआ है। किसान से लेकर मजदूर तबके के लोगों की परेशानी बढ़ती जा रही है। क्षेत्र में बाढ़ की बनती विकराल स्थिति के बीच पिछले २४ घंटा के भीतर सौ से अधिक परिवार को बेघर कर दिया है।

इसके कारण प्रभावित पीड़ित की संख्या में लगातार इजाफा होना जारी है। स्थिति यह है की अब बाढ़ की विभीषिका से कोई भी पंचायत का गांव अछूता नहीं रहा। निचले इलाके के गांव में ऊंचे स्थानों पर शरण लिए प्रभावित बाढ़ पीड़ितों को अब गांव से पलायन करने की चिंता सताने लगी है। कई गांवो से पलायन कर लोग खुले आसमान के नीचे पन्नी तले सड़क व बांध पर शरण लेने लगे है। बाढ़ की त्रासदी झेल रहे लोगों की मुश्किलें बढती जा रही है। विकट स्थिति के बीच गांव से निकलने के लिए नाव भी उपलब्ध नहीं हो रहा है।

धूप व बारिश से जूझ रहे बाढ़ पीड़ित परिवारों के सामने भोजन, पानी के साथ पशु चारा की समस्या की समस्या उत्पन्न है। दूसरी और विगत तीन दिनों में क्षेत्र ने हुई साढ़े ढाई फिट पानी बढ़ोतरी के कारण प्रमुख सड़को पर आवाजाही बंद होने का खतरा मंडराने लगा है। स्थिति यह है की विगत 10 दिनों से सिंघिया को दरभंगा जिला के कुशेश्वरस्थान से जोड़ने सड़क पर पांच किलोमीटर के दायरा में पनि बह रहा है। एसएच - 88 सालेपुर गांव से तेनुआ तक जाने वाली सड़क पर तीन मीटर ऊंचा पानी बह रहा है। वहीं लगातार बढ़ रहे पानी की दबाव के कारण सिंघिया कुशेश्वरस्थान सड़क पर 1000 मीटर के दायरा में दो फिट ऊंची पानी की बह रहा है। बताया गया की धीरे - धीरे पानी की बहाव तेज होती जा रही है। पानी की बढ़ोतरी जारी रहा तो सड़क पर वाहन की आवाजाही ठप एक से दो दिन में पूरी तरह ठप हो जाएगी।

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