पूजा-अर्चना:कलश स्थापना के बाद शहर हुआ भक्तिमय आज मां ब्रह्मचारिणी की हाेगी पूजा-अर्चना

समस्तीपुर9 दिन पहले
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बड़ी दुर्गा स्थान में कलश स्थापना करते श्रद्धालु। - Dainik Bhaskar
बड़ी दुर्गा स्थान में कलश स्थापना करते श्रद्धालु।
  • सबसे प्राचीन मंदिर होने की वजह से यह बड़ी मैया के रूप में जानी जाती है

कलश स्थापना के साथ ही सम्पूर्ण शहर एवं गांवों का वातावरण भक्तिमय हो गया। लोग घरों में कलश-स्थापना कर स्वयं या फिर पंडित के माध्यम से दुर्गा पाठ करवा रहें है। मंदिरों में भी मां की प्रतिमा निर्माण अंतिम चरण में है। चारों ओर “या देवी सर्वभूतेषु शक्ति रूपेण संस्थिता। नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमस्तस्यै नमो नम:।। का मंत्र और ‘’ जगदंब अहिं अवलंब हमर, हे माई अहां बिनु आस केकर..गीत से वातावरण गुंजायमान है। शहर के मनोकामना मंदिर, छोटी दुर्गा स्थान,महादेव मठ,दामोदर पुर,रजिस्ट्री ऑफिस, लक्ष्मी पुर,गुदरी बाजार,भरतदास मंदिर,सोनामाई मंदिर,थानेश्वरी मंदिर, नगरपंचायत परिसर स्थित मंदिर,मिर्जापुर,ढ़ट्ठा आदि स्थान पर मां के द्वितीय स्वरूप ब्रह्मचारिणी की पूजा निष्ठा पूर्वक की गई। संध्या काल में किशोरियों,युवतियों और महिलाओं ने माता के मंदिर पर मैया का गीत गाते हुए दीप जलाया। संध्या आरती और दीप जलाने के लिए सबसे अधिक महिलाएं बड़ी मैया के दरबार में ही आती है। बड़ी मैया की महिमा बड़ी अपरंपार है। सबसे प्राचीन मंदिर होने की वजह से यह बड़ी मैया के रूप में जानी जाती है। यहां वैष्णव पद्धति से माता की पूजा की जाती है। कहा जाता है कि करीब तीन सौ वर्ष पूर्व दरभंगा महाराज द्वारा बड़ी मैया की स्थापना की गई थी। स्थापना के समय स्वयं दरभंगा महाराज ने यहां उपस्थित होकर मैया की पूजा-अर्चना शुरू की थी। कुछ वर्षों के बाद दरभंगा महाराज द्वारा मैया की पूजा-अर्चना का दायित्व ईशरी मंडल और मिश्री मंडल को सौंपा गया था। इसे आज महथा परिवार सभी के सहयोग से निभा रहे हैं।

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